पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच जारी संघर्ष को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशवासियों से घबराने की बजाय संयम बरतने की अपील की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल, गैस और LPG का भंडार मौजूद है।
सरकार के मुताबिक भारत के पास करीब 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और गैस का पर्याप्त स्टॉक है, जबकि रसोई गैस (LPG) का लगभग 45 दिनों का भंडार उपलब्ध है। ऐसे में लोगों को पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने या जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने की आवश्यकता नहीं है।
सोममवार को हुई पांचवी बैठक
सोमवार को रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में मंत्री समूह की पांचवीं बैठक हुई। इसमें पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और विज्ञान से जुड़े मंत्रालयों के मंत्री और अधिकारी शामिल हुए। बैठक में पश्चिम एशिया संकट, भारत की आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की गई।
बैठक में राजनाथ सिंह ने निर्देश दिए कि केंद्र और राज्य सरकारों के सभी विभाग मिलकर काम करें ताकि ईंधन बचाने की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें जमीन पर भी प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए कई देशों से तेल और गैस खरीदने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों ने बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है और यह लगभग 703 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी आयात को सीमित करने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
पेट्रोल डीजल कम खर्च करें
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों के कारण सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए 15 मई के आसपास पेट्रोल और डीजल के दाम 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। वहीं LPG सिलेंडर की कीमतों में भी करीब 50 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है।
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन आम लोगों पर बोझ कम रखने के लिए तेल कंपनियां फिलहाल हर दिन करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं।
भारत रोज करीब 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत करता है। पहले इस तेल को खरीदने पर रोज लगभग 3141 करोड़ रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब बढ़ती कीमतों के कारण यह खर्च बढ़कर करीब 4760 करोड़ रुपये प्रतिदिन हो गया है। यानी देश पर हर दिन लगभग 1619 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
भारत के रणनीतिक तेल भंडार विशाखापत्तनम, मंगलूरु और पादुर में स्थित हैं। यहां कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल रखने की क्षमता है। फिलहाल इनमें करीब 64% यानी 3.37 मिलियन मीट्रिक टन तेल भरा हुआ है, जो देश की लगभग 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। अगर तेल कंपनियों के स्टॉक और रणनीतिक भंडार को मिलाया जाए, तो देश के पास करीब 60 दिनों का कच्चा तेल और 45 दिनों का गैस व LPG भंडारण उपलब्ध है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किसी भी देश के पास कम से कम 90 दिनों के आयात के बराबर तेल भंडार होना चाहिए। भारत फिलहाल इस लक्ष्य से थोड़ा पीछे है, लेकिन विशेषज्ञ 60 से 74 दिनों के स्टॉक को भी सुरक्षित स्तर मानते हैं।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को लगातार दूसरे दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो वहां पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें तथा मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करें।
वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जैसे देश ने कोरोना महामारी के दौरान एकजुट होकर संकट का सामना किया था, उसी तरह मौजूदा हालात से भी देश मिलकर बाहर निकल जाएगा। उन्होंने विदेशों में रहने वाले भारतीयों से अपील की कि वे कम से कम पांच विदेशी मेहमानों को भारत घूमने के लिए लेकर आएं, ताकि देश के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
