अमेरिका में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जब अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। गबार्ड ने इसकी वजह अपने पति की गंभीर कैंसर बीमारी बताई, लेकिन दूसरी ओर कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि व्हाइट हाउस ने उन पर पद छोड़ने का दबाव डाला था। इस अचानक हुए घटनाक्रम ने वॉशिंगटन की राजनीति और खुफिया गलियारों में अटकलों का दौर तेज कर दिया है। कहीं इसे पारिवारिक संकट बताया जा रहा है, तो कहीं ट्रंप प्रशासन के भीतर सत्ता संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है।
पति के कैंसर का हवाला देकर दिया इस्तीफा
तुलसी गबार्ड ने एक्स पर जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उनके पति अब्राहम विलियम्स को हड्डियों के एक दुर्लभ और गंभीर कैंसर का पता चला है।
उन्होंने लिखा,
“इस समय मुझे सार्वजनिक सेवा से हटकर अपने पति के साथ रहना होगा और इस कठिन लड़ाई में उनका पूरा साथ देना होगा।”
उन्होंने बताया कि उनका आखिरी कार्यदिवस 30 जून होगा।
गबार्ड ने अपने इस्तीफे को पूरी तरह पारिवारिक और व्यक्तिगत फैसला बताया और कहा कि इस समय उनकी प्राथमिकता अपने पति की देखभाल है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी सेवा की सराहना की और उनके पति के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। ट्रंप ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि विलियम्स “पहले से ज्यादा मजबूत होकर लौटेंगे।”
व्हाइट हाउस ने दबाव के आरोपों को नकारा
हालांकि आधिकारिक तौर पर इस्तीफे को स्वैच्छिक बताया गया, लेकिन रॉयटर्स से जुड़े एक सूत्र ने दावा किया कि गबार्ड को व्हाइट हाउस ने “पद छोड़ने के लिए मजबूर” किया।
इस दावे के बाद प्रशासन के भीतर मतभेदों की अटकलें और तेज हो गईं।
लेकिन व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया। प्रवक्ता डेविस आर. इंगले ने गबार्ड को “अमेरिका फर्स्ट देशभक्त” बताते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 16 महीनों में बेहद ईमानदारी और मजबूती से काम किया।
उन्होंने जबरन इस्तीफे की खबरों को “बदनाम करने की कोशिश” बताया और कहा कि इस्तीफा केवल उनके पति की स्वास्थ्य स्थिति के कारण दिया गया है।
इन विरोधाभासी दावों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या गबार्ड ने खुद इस्तीफा दिया या फिर उन्हें अंदरूनी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा।
खुफिया तंत्र के भीतर बढ़ते मतभेद
गबार्ड का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया मामलों को लेकर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गबार्ड की सीआईए नेतृत्व समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नीतिगत मुद्दों पर टकराव हुआ था।
उनका कार्यकाल खासतौर पर विदेश नीति और ईरान तथा पश्चिम एशिया को लेकर प्रशासन की रणनीति पर वैचारिक मतभेदों से घिरा रहा।
पूर्व डेमोक्रेट सांसद रहीं गबार्ड लंबे समय से विदेशी सैन्य हस्तक्षेपों की आलोचक रही हैं। यही रुख उन्हें प्रशासन के उन नेताओं से अलग करता था जो अधिक आक्रामक सैन्य नीति के पक्षधर माने जाते हैं।
ईरान हमलों को लेकर बढ़ा विवाद
रिपोर्टों के मुताबिक इस साल ईरान के खिलाफ इजराइल के साथ समन्वित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद प्रशासन के भीतर तनाव और बढ़ गया था।
गबार्ड का युद्ध-विरोधी रुख उन्हें राजनीतिक रूप से कठिन स्थिति में ले आया था और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की सीमा तथा औचित्य को लेकर प्रशासन के भीतर मतभेद बढ़ने लगे थे।
इससे पहले राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के निदेशक जो केंट भी प्रशासन की सैन्य नीतियों से असहमति जताते हुए इस्तीफा दे चुके हैं।
इन घटनाओं ने ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के भीतर अस्थिरता की धारणा को और मजबूत किया है।
कानूनी विवादों से भी जुड़ा नाम
कानूनी विश्लेषक स्कॉट मैकफार्लेन ने दावा किया कि जॉर्जिया चुनाव केंद्र पर एफबीआई की विवादित छापेमारी में गबार्ड की मौजूदगी प्रशासन के लिए कानूनी और राजनीतिक परेशानी का कारण बन सकती है।
उनके अनुसार घरेलू राजनीतिक मामलों में खुफिया नेतृत्व की भूमिका को लेकर सवाल उठ सकते हैं, खासकर चुनावी विवादों से जुड़े मामलों में।
फुल्टन काउंटी से जुड़ा मामला पहले से ही कानूनी और राजनीतिक विवादों का केंद्र बना हुआ है।
खुफिया दस्तावेजों को लेकर भी दावे
कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि शीत युद्ध काल के गुप्त अभियानों और जॉन एफ. कैनेडी हत्या से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी खुफिया एजेंसियों के भीतर मतभेद थे।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप प्रशासन में लगातार बड़े इस्तीफे
गबार्ड का इस्तीफा हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन से हुए कई बड़े इस्तीफों की कड़ी माना जा रहा है।
होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम, अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी और श्रम सचिव लॉरी चावेज-डीरेमर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी या तो पद छोड़ चुके हैं या हटाए जा चुके हैं।
इससे प्रशासन की स्थिरता को लेकर सवाल उठने लगे हैं, खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा, न्याय और घरेलू नीति से जुड़े विभागों में।
आगे क्या होंगे राजनीतिक असर?
विश्लेषकों का मानना है कि गबार्ड का जाना अमेरिकी खुफिया समन्वय और विदेश नीति दोनों पर असर डाल सकता है।
उनकी राजनीतिक यात्रा — डेमोक्रेट सांसद से ट्रंप प्रशासन की अहम चेहरा बनने तक — उन्हें अलग पहचान देती थी।
उनके इस्तीफे से प्रशासन के भीतर मौजूद सबसे प्रमुख युद्ध-विरोधी आवाज भी खत्म हो गई है।
भले ही आधिकारिक तौर पर इस्तीफे की वजह पारिवारिक संकट बताई जा रही हो, लेकिन राजनीतिक हलकों में इससे जुड़ी अटकलें जल्द खत्म होती नहीं दिख रहीं।
अब यह सवाल चर्चा का विषय बन चुका है कि तुलसी गबार्ड का इस्तीफा वास्तव में निजी कारणों से लिया गया फैसला था या फिर ट्रंप प्रशासन के भीतर बढ़ते राजनीतिक दबाव और मतभेदों का नतीजा।
