पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। ट्रंप ने इसे क्षेत्र में संघर्ष खत्म होने और स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का फैसला किया है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दिया जाएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है। सभी को बधाई।” उन्होंने यह भी कहा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू करिए। तेल का प्रवाह फिर शुरू होने दीजिए।”
ट्रंप के मुताबिक, यह समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक इस समझौते का आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया है।
भारत ने किया स्वागत, समुद्री व्यापार की आजादी पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण दुनिया को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और कई देशों में लोगों की जान भी गई है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मोदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस समझौते से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी। उन्होंने समुद्री मार्गों को खुला रखने की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि नौवहन (Navigation) और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बाकी बचे मुद्दों पर बातचीत जारी रहनी चाहिए, ताकि भविष्य में एक स्थायी और व्यापक समझौता हो सके।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज़ जलडमरूमध्य?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
अगर इस मार्ग में कोई रुकावट आती है तो तेल की कीमतों में तेजी, महंगाई और वैश्विक व्यापार पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस मार्ग को दोबारा खोलने की घोषणा को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है।
समझौते के लागू होने पर अब भी सवाल
हालांकि ट्रंप ने समझौते की घोषणा कर दी है, लेकिन इसके कई अहम पहलू अभी स्पष्ट नहीं हैं। व्हाइट हाउस ने समझौते का पूरा विवरण जारी नहीं किया है, इसलिए इसके नियम, शर्तें और पालन की प्रक्रिया को लेकर सवाल बने हुए हैं।
ईरान के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने के बाद ही इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में मानी जा रही है।
दुनिया की नजर आगे की प्रक्रिया पर
अमेरिका इस समझौते को शांति और सुरक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि बता रहा है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों पक्ष समझौते का कितना पालन करते हैं।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया पर है, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने और अमेरिका-ईरान समझौते से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
