दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई। कुछ ही सेकंड में व्यस्त इलाका मलबे में तब्दील हो गया और इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह इमारत कैफे, कार्यालय और एक ट्यूशन सेंटर के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। अचानक इमारत ढहने से पूरी मंजिलें नीचे आ गिरीं और अंदर मौजूद लोग भारी कंक्रीट और मलबे के नीचे फंस गए।
हादसे में किन लोगों की गई जान?
मृतकों में पास की कैंटीन की मालिक पार्वती, इंजीनियर कपिल, नलिन राय, आलोक वर्मा और डॉक्टर रवि वर्मा तथा एकता शामिल हैं।
इमारत के साथ लगी टिन शेड वाली कैंटीन भी मलबे में दब गई। इस कैंटीन में अक्सर मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र आते थे। हादसे में कम से कम 10 लोगों को जीवित बाहर निकाल लिया गया।
20 घंटे तक चला बचाव अभियान
हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया।
सईदुलाजाब इलाके की संकरी गलियों के कारण बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई जगह भारी मशीनों की बजाय हाथों से मलबा हटाना पड़ा।
बचाव दल ने हाइड्रोलिक कटर, अर्थमूवर मशीनें, ध्वनि सेंसर, विशेष कैमरे और प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद से फंसे लोगों को खोजा। कई स्थानों पर बचावकर्मियों ने बेहद सावधानी से टिन की चादरें और कंक्रीट के बड़े टुकड़े हटाए।
घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर, सफदरजंग अस्पताल और पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल भेजा गया। हादसे के करीब 20 घंटे बाद अंतिम शव बरामद किया गया।
अवैध निर्माण बना हादसे की वजह?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत में बिना अनुमति के अतिरिक्त मंजिलें बनाई जा रही थीं। अधिकारियों के अनुसार भवन की मूल संरचना इतनी अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने के लिए तैयार नहीं थी।
बताया जा रहा है कि इमारत 10 साल से अधिक पुरानी थी और हाल के निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री इस्तेमाल किए जाने की भी आशंका जताई जा रही है। इसी कारण संरचना कमजोर हो गई और अंततः ढह गई।
इमारत मालिक और ठेकेदारों पर मामला दर्ज
दिल्ली पुलिस ने फरार इमारत मालिक करमवीर और दो ठेकेदारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही से निर्माण कराने जैसे आरोप शामिल हैं।
इसके अलावा दिल्ली नगर निगम (MCD) के दो इंजीनियरों को भी निगरानी में कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।
मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
हादसे की विस्तृत जांच के लिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि भवन निर्माण की अनुमति कैसे मिली, अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कैसे हुआ और अधिकारियों की ओर से निगरानी में कहां चूक हुई।
अवैध इमारतों के खिलाफ अभियान शुरू
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने दक्षिण दिल्ली में भवन नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
साकेत, महरौली और आसपास के इलाकों में नियमों से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों को नोटिस जारी किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि 72 घंटे का नोटिस देने के बाद सीलिंग और खाली कराने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम ने यह भी माना कि अवैध निर्माण केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। सईदुलाजाब, पर्यावरण कॉम्प्लेक्स और फ्रीडम फाइटर्स एन्क्लेव जैसे क्षेत्रों को भी संवेदनशील माना गया है।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी केवल बिल्डरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय की जाएगी।
साकेत का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में निर्माण नियमों की अनदेखी के गंभीर परिणामों की चेतावनी भी माना जा रहा है। इससे एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या शहरों में निर्माण कार्यों की निगरानी और सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन हो रहा है।
