संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में सीमा पार सैन्य कार्रवाई की, जिससे कई निर्दोष नागरिकों की मौत हुई। इसके बाद पाकिस्तान ने इन कार्रवाइयों को आतंकवाद के खिलाफ अभियान बताकर सही ठहराने की कोशिश की।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथनेनी ने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या को किसी भी तरह से आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का नाम देकर सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इसे “पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण” बताया।
नागरिकों की मौत और मानवीय संकट पर चिंता
भारत ने सुरक्षा परिषद में कहा कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इन हमलों में आम नागरिक भी मारे गए, इसलिए इन्हें केवल सुरक्षा अभियान कहना उचित नहीं है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में 372 नागरिकों की मौत हुई। इनमें से बड़ी संख्या रमजान के दौरान हुई। भारत ने यह भी कहा कि लगातार हिंसा के कारण एक लाख से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा, जिससे क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा गया है।
पाकिस्तान के दावों को भारत ने बताया भ्रामक
भारत ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द “फितना अल हिंदुस्तान” को भी खारिज कर दिया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यह पाकिस्तान की एक सुनियोजित दुष्प्रचार (मिसइन्फॉर्मेशन) रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अपनी आंतरिक समस्याओं को बाहरी साजिश के रूप में पेश करना है।
भारत का कहना है कि पाकिस्तान बिना ठोस सबूत के पड़ोसी देशों पर आरोप लगाता रहा है और यह उसकी पुरानी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है। भारतीय प्रतिनिधि ने इसे “नफरत फैलाने वाली व्यवस्था” करार दिया।
अफगानिस्तान को भारत की मानवीय सहायता का भी किया जिक्र
पाकिस्तान की आलोचना के साथ-साथ भारत ने अफगानिस्तान के लिए अपने मानवीय सहयोग का भी उल्लेख किया। भारत ने बताया कि 2021 से अब तक उसने अफगानिस्तान को 50 हजार टन गेहूं, 420 टन दवाइयां और वैक्सीन तथा 40 हजार लीटर कीटनाशक उपलब्ध कराए हैं।
इसके अलावा भारत ने बाढ़ राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता भी भेजी है। भारत ने कहा कि अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में 500 से अधिक विकास परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें अस्पताल, मातृ स्वास्थ्य केंद्र, ट्रॉमा सेंटर और कैंसर उपचार सुविधाएं शामिल हैं।
भारत ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान के साथ उसके संबंध केवल सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेल और जन-जन के संबंधों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र में हुई यह बहस दिखाती है कि अफगानिस्तान का मुद्दा अब केवल मानवीय संकट नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीतिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का भी महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।
