वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 मैग्नीट्यूड के दो शक्तिशाली भूकंपों ने वहां कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। इसे वेनेजुएला में बीते 126 वर्षों में आया सबसे ताक़तवर भूकंप बताया जा रहा है। कई मायनों में ये उससे भी ज्यादा दुर्लभ घटना है जब एक ही जगह पर लगभग समान मैग्नीट्यूड के दो ताक़तवर झटके महसूस किए गए हों, वो भी महज़ कुछ सेकेंड के अंतराल में, अन्यथा, मुख्य झटके के बाद आने वाले ‘ऑफ्टरशॉक’ सामान्यतः कम तीव्रता के ही होते हैं।
वेनेजुएला से सामने आ रही तस्वीरें इस भूकंप की विनाशकारी ताक़त और तबाही के पैमाने को दर्शाने के लिए काफी हैं। लेकिन इसने फिर से दुनिया का ध्यान रिक्टर स्केल की ओर खींचा है। आमतौर पर जब लोग सुनते हैं कि कहीं 6, 7 या 8 तीव्रता का भूकंप आया है, तो उन्हें लगता है कि यह सिर्फ एक या दो अंकों का अंतर है। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। भूकंप मापने का पैमाना Linear नहीं बल्कि लॉगारिदमिक (Logarithmic) होता है। इसका मतलब है कि हर अगला स्तर पिछले स्तर से कई गुना अधिक शक्तिशाली होता है।
रिक्टर स्केल क्या है और ये कैसे काम करता है ?
रिक्टर स्केल का विकास वर्ष 1935 में अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्स एफ. रिक्टर ने किया था। इसका उद्देश्य भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा और उसकी तीव्रता को मापना था।
आज वैज्ञानिक मुख्य रूप से Moment Magnitude Scale (Mw) का उपयोग करते हैं, लेकिन आम बोलचाल में इसे अब भी ‘रिक्टर स्केल’ ही कहा जाता है।
इस पैमाने की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ‘लीनियर’ यानी एक समान दर पर नहीं चलता, बल्कि लॉगारिदमिक है।
इसका अर्थ क्या है?
लॉगारिदमिक का अर्थ– यदि किसी भूकंप की तीव्रता 5 से बढ़कर 6 हो जाती है, तो यह पिछले पैमाने से सिर्फ एक अंक या 20 – 25 प्रतिशत अधिक शक्तिशाली नहीं होता।
बल्कि इस स्केल पर सिर्फ एक अंक बढ़ने भर से भूकंपीय तरंगों का दायरा लगभग 10 गुना बढ़ जाता है और उनके निकलने वाली ऊर्जा 32 गुना तक बढ़ जाती है।
यानी 7 तीव्रता का भूकंप 6 तीव्रता के भूकंप से 32 गुना ज्यादा शक्तिशाली होगा
इसी तरह 8 तीव्रता का भूकंप 7 तीव्रता के भूकंप से भी 32 गुना अधिक ऊर्जा छोड़ता है।
रिक्टर स्केल पर दशमलव 1 का अंतर भी क्यों महत्वपूर्ण होता है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि 7.1 और 7.2 में सिर्फ दशमलव 1 अंक का ही तो अंतर है, लेकिन ये सत्य नहीं है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो भूकंप में 0.1 मैग्नीट्यूड की वृद्धि लगभग 1.4 गुना अधिक ऊर्जा पैदा करती है।
- इसी प्रकार 0.2 मैग्नीट्यूड की वृद्धि लगभग 3 गुना ऊर्जा पैदा करेगी।
- 0.3 मैग्नीट्यूड की वृद्धि लगभग 4.5 गुना ऊर्जा पैदा करती है।
- 0.5 मैग्नीट्यूड की वृद्धि लगभग 5.6 गुना ऊर्जा पैदा करती है।
यानी दशमलव में दिखने वाला छोटा सा अंतर भी ज़मीन पर भारी विनाश का कारण बन सकता है।
वेनेजुएला के भूकंप को रिक्टर स्केल पर समझिए ?
वेनेजुएला की राजधानी क्षेत्र में मात्र 39 सेकंड के अंतराल पर दो शक्तिशाली झटके महसूस किए गए।
पहला भूकंप 7.2 मैग्नीट्यूड का था। इसके तुरंत बाद दूसरा झटका 7.5 मैग्नीट्यूड का आया।
यानी पहली नजर में अंतर सिर्फ 0.3 का दिखाई देता है। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह अंतर बहुत बड़ा है।
रिक्टर स्केल के हिसाब से 7.5 मैग्नीट्यूड का दूसरा झटका 7.2 मैग्नीट्यूड के पहले झटके की तुलना में लगभग 2.8 गुना अधिक ऊर्जा लेकर आया होगा।
यानी लोगों को भले ही यह केवल 0.3 का अंतर लगे, लेकिन पृथ्वी के भीतर ऊर्जा के स्तर पर यह कई गुना अधिक शक्तिशाली घटना हो सकती है।
यही वजह है कि जब भूकंप 7 या उससे ऊपर की श्रेणी में पहुंच जाता है, तब 0.1 या 0.2 का अंतर भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तबाही का असली फ़ैक्टर क्या है ?
भूकंप की ‘तीव्रता’ निश्चित रूप से बेहद मायने रखती है, लेकिन भूकम्प कितना नुक़सान पहुंचाएगा ये कई और पहलुओं पर भी निर्भर करता है।
– जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है ये फ़ैक्टर की भूकंप का केंद्र सतह से कितनी गहराई पर है?
यानी भूकंप कितनी गहराई पर आया। भूकंप सतह के जितना क़रीब होगा, उसका फैलाव उतना ही ज्यादा होगा और नुक़सान के भी उसी अनुपात में ज्यादा होने की आशंका बनी रहेगी।
वहीं अगर भूकंप का केंद्र ज़मीन में काफी गहराई पर है (10 किलोमीटर या ज्यादा) तो रिक्टर स्केल पर तीव्रता ज्यादा होने के बावजूद नुक़सान की आशंका कम हो जाएगी।
– आबादी और इंफ्रास्ट्रक्चर
भूकंप और उससे होने वाले खतरे के मामले में ये भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है कि वहां आबादी कितनी घनी है, और इमारतें कितनी मजबूत हैं।
इसके आलावा आपदा प्रबंधन व्यवस्था से लेकर दूसरी तैयारियां भी काफी मायने रखती हैं।
जापान जैसा देश– जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं, वहां इसे लेकर उसी स्तर की तैयारियां भी रखी गई हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में भी उन पहलुओं का बखूबी ध्यान रखा गया है और शायद इसीलिए जापान में नुक़सान की घटनाएं कम ही सुनाई देती हैं।
हालांकि जब भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7 के ऊपर चली जाती है, तब किसी भी देश के लिए खतरा बेहद गंभीर हो जाता है।
वेनेजुएला का हालिया भूकंप इसी श्रेणी का उदाहरण है। रिक्टर स्केल पर दशमलव में दिखने वाला छोटा सा अंतर भी जमीन पर विनाश, जनहानि और बुनियादी ढांचे के नुकसान के स्तर को पूरी तरह बदल सकता है। वेनेजुएला से जो शुरुआती तस्वीरें सामने आई हैं, वो बड़े पैमाने पर नुक़सान की तरफ़ इशारा कर रही हैं।
यू.एस. जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भी आशंका जताई है कि इस आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या 10,000 से भी ज्यादा हो सकती है।
वेनेजुएला पहले से ही बेहद विषम आर्थिक और राजनैतिक स्थितियों का सामना कर रहा है, ऐसे में वहां इस आपदा का समुचित रूप से सामना करने और व्यापक पैमाने पर राहत–बचाव अभियान चलाने लायक़ पर्याप्त संसाधन भी होंगे– इस पर भी संदेह है। वेनेजुएला की इस स्थिति के चलते खतरा और भी ज्यादा बड़ा नज़र आ रहा है।
