डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व और राष्ट्रवादी सोच के बारे में जानकारी देना जरूरी है। उनका मानना है कि इससे छात्रों में देश के प्रति जिम्मेदारी और “नेशन फर्स्ट” की भावना मजबूत होगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री कोलकाता के मित्रा इंस्टीट्यूशन पहुंचे, जहां डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपनी शुरुआती शिक्षा प्राप्त की थी। वहां उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि देश को सर्वोपरि रखने का उनका संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनके समय में था।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार पाठ्यक्रम में बदलाव कर डॉ. मुखर्जी के जीवन, शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और राष्ट्रीय एकता के लिए किए गए कार्यों को शामिल करेगी। इसके अलावा मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास और वहां की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी कई योजनाओं की घोषणा की गई।
उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक महान शिक्षाविद भी थे। उनका मानना था कि शिक्षा और राष्ट्र निर्माण एक-दूसरे के पूरक हैं और युवाओं को देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना चाहिए।
वहीं, कोलकाता स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में भी डॉ. मुखर्जी की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने युवाओं तक उनके विचार पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बता दें कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वे देश के प्रसिद्ध शिक्षाविदों में शामिल थे और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री भी रहे। बाद में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक नींव माना जाता है। उनकी 125वीं जयंती के अवसर पर पूरे पश्चिम बंगाल में कई सरकारी और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
