पीएम मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा की। उन्होंने अपने संदेश में डॉ. मुखर्जी के बहुआयामी व्यक्तित्व और राष्ट्रनिर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।पीएम मोदी ने लिखा कि डॉ. मुखर्जी ने कुलपति, केंद्रीय मंत्री, प्रखर शिक्षाविद, राजनीतिक नेता और राष्ट्रवादी विचारक के रूप में देश की अमूल्य सेवा की। उन्होंने विशेष रूप से भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए किए गए उनके संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 और 35(ए) को हटाया जाना उनके सपनों को साकार करने और उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि देने वाला ऐतिहासिक कदम है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि आधुनिक भारत के उन दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माताओं में से एक थे जिन्होंने शिक्षा, राजनीति और राष्ट्रीय एकता के क्षेत्र में अमिट योगदान दिया। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था। कम उम्र में ही वे प्रतिष्ठित कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और शिक्षा जगत में कई महत्वपूर्ण सुधारों की शुरुआत की। इसके बाद स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में उन्होंने देश के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखने में अहम भूमिका निभाई।
उनका सबसे बड़ा योगदान भारत की अखंडता और एकता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता रही। उनका स्पष्ट मानना था कि देश में “एक देश, एक संविधान, एक निशान” की व्यवस्था होनी चाहिए। जम्मू-कश्मीर को लेकर उनकी सोच राष्ट्रीय एकीकरण की भावना से प्रेरित थी। अनुच्छेद 370 और 35(ए) के विरोध में उन्होंने लंबा संघर्ष किया और अंततः अपने प्राणों का बलिदान दिया। वर्ष 2019 में इन प्रावधानों को हटाया जाना उनके विचारों और संकल्प को साकार करने वाला एक ऐतिहासिक निर्णय माना जाता है।
