पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लंबे समय से भोजन न करने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। उनकी खराब होती सेहत को लेकर समर्थकों और डॉक्टरों ने गंभीर चिंता जताई है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता अभिजीत दीपके ने कहा कि वांगचुक की शारीरिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है। उनका दावा है कि लगातार उपवास के कारण उनका वजन काफी घट गया है और शरीर की हड्डियां तक साफ दिखाई देने लगी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गुरुवार को वांगचुक दो बार गिरते-गिरते बचे। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में भी वे मंच से उतरते समय अपने साथियों का सहारा लेते नजर आए। वीडियो में उनकी चाल बेहद धीमी और लड़खड़ाती दिखाई दे रही है।
डॉक्टरों ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई है। चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन न करने से शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला और अनशन जारी रहा, तो ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों ने वांगचुक को जल्द चिकित्सकीय देखभाल लेने की सलाह दी है।
हालांकि, सोनम वांगचुक अपने फैसले पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस जवाब नहीं देती, तब तक वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च को सफल बनाने की भी अपील की है।
इस बीच, उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की रोजाना निगरानी की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। फिलहाल उनकी सेहत और अनशन दोनों को लेकर देशभर में चिंता बढ़ती जा रही है।
