नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस आपदा का असर नेपाल के रसुवा जिले से लेकर तिब्बत के कीरोंग इलाके तक देखने को मिला है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।
नेपाल में 826 और तिब्बत में 588 लोग लापता
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ के बाद 826 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 579 पर्यटक शामिल हैं। लापता लोगों में सुरक्षा बलों के जवान और हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं।
नेपाल सरकार के अनुसार, नेपाल सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान और सशस्त्र पुलिस बल के 13 जवानों से संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अलावा अलग-अलग हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले करीब 162 कर्मचारियों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 300 से ज्यादा भारतीय नागरिकों के लापता होने की भी पुष्टि की है।
वहीं, तिब्बत के कीरोंग इलाके में करीब 588 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह नेपाल और चीन के प्रभावित क्षेत्रों में लापता लोगों की संख्या 1,400 से ज्यादा हो गई है।
दलाई लामा ने जताया दुख
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने नेपाल के रसुवा और तिब्बत के कीरोंग में आई बाढ़ से हुई तबाही पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस आपदा में कई लोगों की जान गई है और भारी नुकसान हुआ है।
दलाई लामा ने मृतकों के लिए प्रार्थना करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
भूकंप नहीं, ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़
शुरुआत में ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि भूकंप के कारण तिब्बत में ग्लेशियर टूट गया और उसके बाद अचानक बाढ़ आई। हालांकि, अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार इस घटना के पीछे कोई बड़ा भूकंप नहीं था।
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लेशियर टूटने के दौरान पैदा हुई हलचल के कारण भूकंप जैसे झटके महसूस हुए। इस दौरान दर्ज की गई भूकंपीय कंपन की तीव्रता करीब 5.2 बताई गई।
ग्लेशियर टूटने के बाद पानी तेजी से नीचे की ओर आया और तिब्बत से होते हुए नेपाल की भोटेकोशी नदी तक पहुंच गया। इसके बाद नदी में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।
फिलहाल नेपाल और चीन दोनों जगह राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षा बल और बचाव दल लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं और प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
