अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू–कश्मीर दौरा और उनका बयान पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। 19 अगस्त 2026 को श्रीनगर में जम्मू–कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने साफ कहा कि यह भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस एक वाक्य ने इस्लामाबाद को तिलमिला दिया। पाकिस्तान ने तुरंत अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध दर्ज कराया। यह दौरा 2019 में अनुच्छेद 370 हटने और हालिया सुरक्षा सुधारों के बाद अमेरिकी राजदूत का पहला स्वतंत्र दौरा है।
क्या कहा था अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने
गोर ने साफ शब्दों में कहा, “यह भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।” अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, “यहां आना खुशी की बात है… यह भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैं पहली बार यहां आया हूं।” इतना ही नहीं, गोर ने संकेत दिया कि कश्मीर के ज्यादातर हिस्से के लिए लागू सख्त लेवल-4 “यात्रा न करें” एडवाइजरी को अमेरिका डाउनग्रेड करने पर विचार कर सकता है।
पाकिस्तान ने क्यों तिलमिलाया
इस्लामाबाद से प्रतिक्रिया आने में देर नहीं लगी। पाकिस्तान ने बुधवार को अमेरिकी उप–राजदूत (चार्ज डी अफेयर्स) को तलब किया और गोर की टिप्पणियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस्लामाबाद ने कहा कि राजदूत की टिप्पणियां कश्मीर पर अमेरिका के दीर्घकालिक रुख से मेल नहीं खातीं।
भारत अमेरिका संबधों के लिए क्या मायने हैं गोर के बयान के
यह बयान सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं था। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत–अमेरिका संबंधों को बढ़ावा देता है और पाकिस्तान के लिए अप्रत्याशित झटका है। हाल ही में अमेरिका–ईरान तनाव में पाकिस्तान ने तथाकथित मध्यस्थता की भूमिका निभाने का दावा किया जा रहा था लेकिन दरअसल उसका रोल एक डाकिए से ज्यादा नहीं था। और अब वैसे भी ईरान डील में उसकी जरूरत अब उतनी नहीं रह गई है। अब कश्मीर पर गोर के बयान ने साफ कर दिया कि वॉशिंगटन के लिए भारत की अहमियत किसी समझौते या तात्कालिक जरूरत की मोहताज नहीं।
सर्जियो गोर का जम्मू–कश्मीर दौरा महत्वपूर्ण क्यों
यह दौरा सिर्फ बयान भर के लिए अहम नहीं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह किसी अमेरिकी राजदूत का कश्मीर का पहला स्वतंत्र दौरा है। इससे पहले 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राजूदत केनेथ जस्टर ने स्वतंत्र रूप से दौरा किया था। जस्टर 2020 में भी कश्मीर गए, लेकिन तब वे बहुदेशीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
साथ ही गोर का दौरा 15 साल बाद किसी बैठे मुख्यमंत्री से अमेरिकी राजदूत की पहली मुलाकात भी है। इससे पहले 2011 में तत्कालीन राजदूत टिमोथी रोमर ने अब्दुल्ला से मुलाकात की।
सर्जियो गोर लद्दाख भी जाएंगे, जो 2020 गलवान घटना के बाद पहला ऐसा दौरा होगा। यह दौरा सुरक्षा सुधारों, पर्यटन संभावनाओं और भारत के साथ गहरे रणनीतिक संबंधों का संदेश देता है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में असंतोष के बीच यह भारत के पक्ष को और मजबूत करता है।
