चीन का BRICS AI प्रस्ताव: भारत के लिए साझेदारी का मौका या नई निर्भरता का खतरा?

Xi Jinping का BRICS AI प्लान: Open-Source मॉडल और साझा Cloud में भारत के लिए कितना बड़ा मौका, और क्या हैं जोखिम?

PM Modi and XI at BRICS 2026

नई दिल्ली में हुए BRICS Summit में एक प्रस्ताव ऐसा आया जिस पर आने वाले सालों तक बहस चलती रहेगी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS देशों के लिए एक Open-Source AI Community बनाने का सुझाव रखा, जिसमें बड़े AI मॉडल के विकास, ट्रेनिंग, स्किलिंग और डिजिटल क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर मिलकर काम करने की बात है। साथ ही चीन ने यह भी जता दिया कि इस पहल की अगुवाई वह खुद करना चाहता है।

सवाल यहीं से शुरू होता है। BRICS को AI में साथ लाने की बात तो समझ आती है, लेकिन इस पूरी व्यवस्था में भारत कहां खड़ा होगा ? क्या भारत एक बराबर की साझेदारी में, अपने मॉडल पेश करने वाले देश की भूमिका निभाएगा  या फिर अमेरिका के बाद चीन की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाले एक और बाजार के तौर पर इस्तेमाल होगें ?

Open-Source AI का मतलब क्या है, पहले यह समझना जरूरी है

दुनिया के सबसे ताकतवर AI मॉडल इस वक्त अमेरिकी कंपनियों के हाथ में हैं। OpenAI, Google या Anthropic जैसे प्लेटफॉर्म अपने मॉडल को काफी हद तक नियंत्रित तरीके से ही बाहर देते हैं। इसके उलट Open-Source या Open-Weight मॉडल में डेवलपर्स को मॉडल के भीतरी हिस्सों तक पहुंच मिलती है और वे उसे अपने ही सर्वर पर चला सकते हैं, हालांकि लाइसेंस और शर्तें मॉडल-दर-मॉडल अलग रहती हैं।

चीन इस मामले में तेजी से आगे निकला है। DeepSeek और अलीबाबा का Qwen इसी रणनीति का हिस्सा हैं—मकसद सिर्फ चीन के भीतर AI फैलाना नहीं, बल्कि विकासशील देशों तक इसे पहुंचाना है। BRICS मंच से आया प्रस्ताव इसी बड़ी योजना की अगली कड़ी माना जा सकता है। चीन का इशारा साफ है: AI की दुनिया में सिर्फ अमेरिकी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय विकासशील देशों के पास एक वैकल्पिक इकोसिस्टम होना चाहिए।

फिलहाल यह BRICS का नहीं, चीन का प्रस्ताव है

यहां एक बारीकी समझनी होगी। शी का यह प्रस्ताव अभी BRICS का साझा, आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बना है। नई दिल्ली घोषणा-पत्र में न तो Open-Source AI Community का जिक्र है, न ही किसी Common Cloud Platform का नाम। घोषणा-पत्र में बस इतना कहा गया है कि AI संसाधनों तक पहुंच बढ़े और AI को सुरक्षित, विश्वसनीय व जिम्मेदार बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग हो। यानी इसे अभी “BRICS का नया AI सिस्टम” कहना जल्दबाजी होगी—यह China-led proposal है।

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। 2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन के पास आ रही है, और ऐसा माना जा रहा है कि बीजिंग तब इस प्रस्ताव को दोबारा एजेंडे में लाकर इसे ज्यादा ठोस शक्ल देने की कोशिश करेगा।

भारत के लिए मौका कहां है

भारत खुद अपने तरीके से AI पर काम कर रहा है। नई दिल्ली की कोशिश यही है कि कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा और मॉडल तक पहुंच सिर्फ बड़ी विदेशी कंपनियों तक सीमित न रह जाए। इसी सोच के तहत IndiaAI Mission के जरिए देश में AI Compute Infrastructure, डेटासेट, अपने खुद के फाउंडेशन मॉडल, स्किलिंग और स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। IndiaAI का Compute Portal रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स, MSMEs और छात्रों को सब्सिडी वाला AI कंप्यूट मुहैया कराने के लिए बना है।

यानी एक बिंदु पर भारत और चीन की सोच मिलती है—विकासशील देशों की AI संसाधनों तक पहुंच बढ़नी चाहिए। लेकिन दोनों का रास्ता अलग है। भारत अपनी क्षमता घर में ही मजबूत करना चाहता है, जबकि चीन BRICS जैसे मंच के जरिए अपने इकोसिस्टम को बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजार तक ले जाना चाहता है।

असली चुनौती कहां छिपी है

मान लीजिए कल को BRICS का कोई साझा AI क्लाउड बनता है। सवाल उठेंगे—उसमें किन कंपनियों के मॉडल होंगे, डेटा किस देश के सर्वर पर रखा जाएगा, ट्रेनिंग डेटा पर नियंत्रण किसका होगा, संवेदनशील सरकारी डेटा कैसे सुरक्षित रहेगा, और अगर किसी मॉडल में खामी निकली तो जवाबदेही किसकी तय होगी? ये सवाल तकनीकी कम, डिजिटल संप्रभुता के ज्यादा हैं।

भारत के लिए चीन के साथ AI सहयोग के फायदे साफ हैं—सस्ते मॉडल, ज्यादा कंप्यूटिंग संसाधन, भारतीय स्टार्टअप्स के लिए नए बाजार और Global South में भारतीय समाधान पहुंचाने का मौका। लेकिन भारत यह भी नहीं चाहेगा कि अमेरिकी निर्भरता घटाने के चक्कर में वह चीनी टेक्नोलॉजी की नई निर्भरता में फंस जाए।

भारत और चीन BRICS में साथी हैं, लेकिन AI जैसी रणनीतिक तकनीकों में प्रतिस्पर्धी भी। हाल ही में मोदी-शी मुलाकात में रिश्तों को स्थिर करने की बात हुई, मगर सीमा और व्यापार से जुड़े सवाल अब भी अनसुलझे हैं। ऐसे में AI का मैदान भारत के लिए सहयोग और सतर्कता, दोनों साथ मांगता है।

चीन के पास मॉडल, मैन्युफैक्चरिंग और कंप्यूटिंग की मजबूत नींव है, लेकिन BRICS में रूस, UAE, सऊदी अरब और ब्राजील जैसे देशों की भी अपनी प्राथमिकताएं हैं—इसलिए अभी से यह मान लेना कि चीन ही BRICS का AI बॉस बन जाएगा, ठीक नहीं होगा। भारत के लिए सबसे मुफीद हालत यही होगी कि यह सहयोग किसी एक देश के मॉडल का विस्तार बनकर न रह जाए, बल्कि सच में एक multi-country ecosystem बने—जिसमें भारतीय मॉडल, भारतीय डेटासेट और भारत में बना कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बराबर की जगह पाएं।

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