गलवान के बाद पहली बार आमने-सामने बैठे मोदी-शी, सीमा पर शांति को बताया रिश्तों की नींव, अब आगे क्या ?

मोदी-शी की 50 मिनट की मुलाकात में क्या निकला? 6 साल की दूरी के बाद क्या फिर बदल रहे हैं भारत-चीन रिश्ते?

India China Modi XI Talks BRICS 2026

नई दिल्ली के भारत मंडपम में शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। यह दोनों नेताओं की 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद पहली द्विपक्षीय बैठक थी। शाम करीब 5:45 बजे शुरू हुई यह बातचीत लगभग 50 मिनट तक चली।  और इस दौरान दोनों पक्षों ने सीमा से लेकर व्यापार तक, हर उलझे मुद्दे को मेज पर रखा।

गलवान के छह साल बाद यह मुलाकात क्यों अहम है?

2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई सैनिक झड़प के बाद भारत-चीन रिश्तों में गहरी खटास आ गई थी। तब से दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बना रहा और शीर्ष स्तर की सीधी बातचीत लगभग थम सी गई थी। ऐसे में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के मौके पर मोदी और शी की यह मुलाकात सिर्फ प्रोटोकॉल भर की बैठक नहीं थी, बल्कि छह साल के तनाव के बाद रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की एक कोशिश मानी जा रही है।

बैठक में क्या हुआ?

पीएम मोदी ने बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि मतभेद कभी विवाद में नहीं बदलने चाहिए। उन्होंने भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तीन ‘म्यूचुअल’ यानी पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित को मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।

मोदी ने इस पर खास जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता ही दोनों देशों के रिश्तों के लगातार विकास की असली बुनियाद है। दोनों नेताओं ने सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों का पालन करने और सीमा विवाद के निष्पक्ष व दोनों देशों को स्वीकार्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी तरफ से कहा कि भारत और चीन को ‘ग्रेटर BRICS सहयोग’ के तहत उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

व्यापार और लोगों के बीच संपर्क पर भी बात

सीमा के अलावा बैठक में व्यापार और आर्थिक रिश्तों को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन में दिक्कतों और एक-दूसरे के बाजार तक बेहतर व भरोसेमंद पहुंच से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर सहमति जताई।

इसके साथ ही लोगों के आपसी संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कारोबारी रिश्तों को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया,  यानी सिर्फ सरकारी स्तर नहीं, बल्कि दोनों देशों के आम लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाने की बात भी बैठक के एजेंडे में शामिल रही। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी सहमति का दायरा बढ़ाने और साझा चुनौतियों से मिलकर निपटने पर भी सहमति जताई।

मोदी ने जताया आभार

बैठक के आखिर में पीएम मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता को समर्थन देने और 2026 के BRICS शिखर सम्मेलन को सफल बनाने में योगदान के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग का आभार जताया।

यह मुलाकात किस माहौल में हुई?

यह बैठक ऐसे समय हुई जब शी जिनपिंग खुद भारत पहुंचे और शनिवार को कई अन्य वैश्विक नेताओं से भी मुलाकात के कार्यक्रम तय थे। इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत कई नेताओं से मिल चुके थे। यानी भारत मंडपम इन दिनों वैश्विक कूटनीति का सबसे व्यस्त केंद्र बना हुआ है, और मोदी-शी मुलाकात को इसी कड़ी की सबसे ज्यादा नजर वाली बैठक माना जा रहा था।

आगे क्या?

गलवान के बाद की यह पहली सीधी बातचीत भले ही सीमा विवाद का तुरंत हल न निकाले, लेकिन इतना जरूर संकेत देती है कि दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटने को तैयार हैं। सीमा पर मौजूदा समझौतों के पालन, व्यापार असंतुलन दूर करने और सांस्कृतिक-कारोबारी संपर्क बढ़ाने जैसी बातें आगे की दिशा तय करेंगी।  पर असल परीक्षा यह होगी कि जमीन पर, खासकर LAC पर, यह गर्मजोशी कितनी टिकाऊ साबित होती है।

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