पंजाब में किसानों और मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने 17 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में रेल यातायात रोकने का ऐलान किया है। किसान नेता सरवण सिंह पंधेर के मुताबिक, सरकार को दोपहर 12 बजे तक मांगों पर ठोस फैसला लेने का समय दिया गया था।
मोगा में रेलवे ट्रैक की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस तैनात
मोगा के गांव महेश्वरी संधूआं में किसानों ने रेलवे ट्रैक पर धरना देने की तैयारी की। किसानों को ट्रैक तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने बड़ी संख्या में जवान तैनात किए और रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की भी हुई।
KMM ने पहले अमृतसर के देवीदासपुरा, गुरदासपुर, मोगा, फिरोजपुर और संगरूर-सुनाम समेत कई जगहों पर रेल रोको आंदोलन की घोषणा की थी। कुछ रिपोर्टों में छह स्थानों का भी उल्लेख किया गया है।
मंत्रियों के घरों के बाहर धरना भी जारी
किसान नेताओं के मुताबिक, पंजाब सरकार के कई मंत्रियों के घरों के बाहर चल रहे धरने भी जारी रहेंगे। संगठन का कहना है कि किसानों ने करीब एक महीने पहले मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अपनी मांगों की जानकारी दी थी। 31 अगस्त को डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर भी प्रदर्शन किए गए थे। किसानों का आरोप है कि इसके बावजूद सरकार की ओर से बातचीत शुरू नहीं की गई।
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली संशोधन कानून और बीज संशोधन कानून को लेकर स्थिति स्पष्ट करना शामिल है। इसके अलावा शंभू-खनौरी मोर्चे के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग भी की जा रही है।
किसानों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान करीब 3.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और सैकड़ों किसान घायल हुए। इसके साथ ही मूंग, मक्का और आलू समेत पांच फसलों पर कानूनी MSP गारंटी की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है।
सुनाम में भी किसानों ने बढ़ाया आंदोलन
सुनाम में एक मंत्री के आवास के बाहर तीन दिन तक धरना देने के बाद भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद ने आंदोलन तेज किया। आंदोलन के चौथे दिन किसानों ने जाखल-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर दोपहर करीब 12 बजे धरना शुरू किया। किसान नेता जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने कहा कि तीन दिन के प्रदर्शन के बावजूद सरकार की ओर से बातचीत नहीं की गई, इसलिए आंदोलन को आगे बढ़ाना पड़ा।
किसान नेताओं ने कहा है कि मांगों पर समाधान नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच रेलवे प्रशासन और पुलिस पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
