पुतिन भारत पहुंचे, S-400 की सुरक्षा के लिए आएगा Pantsir-S1M सिस्टम; जानिए क्यों है खास

पुतिन शुक्रवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनका यह दौरा 18वें BRICS लीडर्स समिट के दौरान हो रहा है। पुतिन की यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा

पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनका यह दौरा 18वें BRICS लीडर्स समिट के दौरान हो रहा है। पुतिन की यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

रूस की ओर से भारत के सामने अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, Pantsir-S1M, आधुनिक रडार और रणनीतिक पनडुब्बियों से जुड़े प्रस्ताव रखे गए हैं। इसके अलावा रूस भारत की निजी रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर हथियारों और सैन्य उपकरणों के उत्पादन में सहयोग बढ़ाना चाहता है।

इन प्रस्तावों में सबसे ज्यादा चर्चा Pantsir-S1M की हो रही है। इसकी खास बात यह है कि यह सिस्टम दूसरे एयर डिफेंस सिस्टम यानी S-400 की सुरक्षा करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या है Pantsir-S1M?

Pantsir-S1M रूस का आधुनिक कम दूरी वाला मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे सैन्य ठिकानों, एयरबेस, कमांड सेंटर और दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।

इस सिस्टम में जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ 30 मिमी की दो तोपें भी लगी होती हैं। यह विमान, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और कुछ तरह के सटीक निर्देशित हथियारों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है।

इसके मिसाइल सिस्टम की मारक क्षमता करीब 30 किलोमीटर तक बताई जाती है। इसका मुख्य काम दुश्मन के उन हवाई खतरों को नजदीक आने से रोकना है, जो लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम की सुरक्षा परत को पार कर सकते हैं।

यानी आसान भाषा में समझें तो S-400 दूर से आने वाले बड़े हवाई खतरों को रोकता है, जबकि Pantsir-S1M उसके आसपास की नजदीकी सुरक्षा करता है।

S-400 को भी सुरक्षा की जरूरत क्यों?

S-400 एक लंबी दूरी का बेहद महत्वपूर्ण एयर डिफेंस सिस्टम है। लेकिन किसी भी बड़े एयर डिफेंस सिस्टम की अपनी कुछ सीमाएं होती हैं।

अगर दुश्मन बड़ी संख्या में छोटे ड्रोन, लो-फ्लाइंग हथियार या लोइटरिंग म्यूनिशन भेजता है, तो उन्हें रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे हमलों में एक साथ बड़ी संख्या में छोटे और कम लागत वाले ड्रोन इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

यही वजह है कि रूस S-400 के साथ Pantsir जैसे छोटे और नजदीकी एयर डिफेंस सिस्टम को जोड़ने की रणनीति पर जोर देता रहा है।

इस व्यवस्था में S-400 लंबी दूरी की सुरक्षा देता है, जबकि Pantsir-S1M नजदीकी सुरक्षा की दूसरी परत तैयार करता है

पुराने अनुभव से निकला यह सिस्टम

S-300 जैसे पुराने सोवियत एयर डिफेंस सिस्टम के दौर में भी यह समस्या सामने आती थी। मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम होने से दुश्मन के लिए उनकी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हुआ, लेकिन एक बार किसी बैटरी की स्थिति पता चल जाने के बाद उसे अलग-अलग हवाई हमलों से खतरा बना रहता था।

इसी तरह के खतरे से बचाने के लिए Pantsir जैसे सिस्टम को विकसित किया गया। इसका काम मुख्य एयर डिफेंस यूनिट के आसपास एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच तैयार करना था।

अब यही रणनीति S-400 और Pantsir के साथ भी इस्तेमाल की जा रही है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Pantsir?

भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के संघर्षों में ड्रोन और कम लागत वाले हवाई हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

2025 के संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सेना की ओर से कामिकाजे ड्रोन के जरिए भारत के S-400 सिस्टम को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। ऐसे ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और बड़ी संख्या में भेजे जाने पर एयर डिफेंस सिस्टम के सामने अलग चुनौती पैदा कर सकते हैं।

S-400 मुख्य रूप से लंबी दूरी से आने वाले बड़े और तेज हवाई लक्ष्यों को रोकने के लिए बनाया गया है। वहीं, छोटे ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे लक्ष्यों के खिलाफ एक अलग नजदीकी सुरक्षा परत की जरूरत हो सकती है।

यहीं Pantsir-S1M को S-400 का ‘बॉडीगार्ड’ कहा जा रहा है।

Pantsir-S1M में क्या है खास?

Pantsir-S1M पुराने Pantsir सिस्टम का आधुनिक संस्करण है। इसमें बेहतर रडार और लक्ष्य को ट्रैक करने की क्षमता दी गई है। इसकी मिसाइलों की रेंज भी पुराने संस्करणों की तुलना में बढ़ाई गई है।

यह एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को ट्रैक और उनसे मुकाबला करने के लिए बनाया गया है। इसलिए ड्रोन के बड़े समूह यानी ड्रोन स्वॉर्म जैसे हमलों के खिलाफ भी यह उपयोगी हो सकता है।

भारत-रूस के बीच S-400 का बड़ा सौदा

भारत ने 2018 में रूस के साथ करीब 5.43 अरब डॉलर में पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीदने का समझौता किया था। इस सौदे के तहत बाकी दो यूनिट की डिलीवरी पूरी करने की प्रक्रिया जारी है।

रूस ने यह भी संकेत दिया है कि वह भारत के साथ अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम पर बातचीत आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।

भारत पांच और S-400 स्क्वाड्रन खरीदने पर भी चर्चा कर रहा है। इस संभावित सौदे की कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।

Su-57 और Super Sukhoi पर भी बातचीत

पुतिन के भारत दौरे में सिर्फ एयर डिफेंस सिस्टम ही चर्चा का विषय नहीं है। रूस ने भारत में Su-57 फाइटर जेट के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव भी रखा है।

इसके अलावा भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड कर ‘Super Sukhoi’ बनाने की योजना पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। इस परियोजना की संभावित लागत 11 अरब डॉलर से ज्यादा बताई जा रही है।

रूस भारत की निजी रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने में भी रुचि दिखा रहा है।

बदलते युद्ध के हिसाब से बदल रही रणनीति

भारत और रूस के बीच S-400 सहयोग नया नहीं है। S-400 का समझौता भी 2016 में गोवा में हुए BRICS सम्मेलन के दौरान आगे बढ़ा था।

लेकिन अब युद्ध का तरीका बदल रहा है। पहले एयर डिफेंस सिस्टम को मुख्य रूप से बड़े विमान और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों से निपटने के लिए तैयार किया जाता था। अब छोटे ड्रोन, ड्रोन स्वॉर्म और कम लागत वाले हथियार बड़ी चुनौती बन रहे हैं।

ऐसे में S-400 और Pantsir-S1M की दोहरी सुरक्षा व्यवस्था भारत के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को लंबी और छोटी, दोनों दूरी से आने वाले हवाई खतरों से बचाने में मदद कर सकती है।

अगर भारत और रूस के बीच Pantsir-S1M को लेकर सौदा आगे बढ़ता है, तो यह भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क में S-400 की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

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