पंजाब में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में बंद, किसानों और विपक्ष ने भगवंत मान सरकार को घेरा

पंजाब बंद सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक चला। कई जिलों में बाजार और निजी स्कूल बंद रहे। लुधियाना के गिल चौक समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कीं।

पंजाब में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में बंद

पंजाब में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में बंद

पंजाब में गुरुवार को बंद का व्यापक असर देखने को मिला। किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और विपक्षी दलों ने एक साथ आकर परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में न्याय की मांग की। झोटा नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे। उन्हें मानसा में गोली मार दी गई थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और राज्य सरकार से जवाब मांगने की मांग की। उनका कहना है कि पंजाब सरकार ने राज्य को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग ही सुरक्षित नहीं हैं।

केमिस्ट की दुकान पर विवाद के बाद मारी गई गोली

यह घटना 13 अक्टूबर की बताई जा रही है। परविंदर सिंह झोटा एक केमिस्ट की दुकान पर कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर दुकानदार से बात करने पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों के बीच बहस हो गई। आरोप है कि दुकानदार ने गोली चला दी और झोटा को तीन गोलियां लगीं। उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

बठिंडा रेंज के डीआईजी ने बताया कि इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, पुलिस ने कथित तौर पर व्यक्तिगत दुश्मनी को घटना की वजह बताया है। इस बात से मृतक के परिवार और प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है।

झोटा के पिता भीम सिंह का कहना है कि सरकार ने उनके बेटे को सुरक्षा नहीं दी। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से अपने पोते-पोतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। यह मामला भगवंत मान सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है, क्योंकि सरकार का प्रमुख अभियान ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ यानी नशे के खिलाफ युद्ध है।

किसानों ने संभाला आंदोलन का मोर्चा

किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंधेर ने अमृतसर के गोल्डन गेट पर प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि किसान मजदूर मोर्चा और उससे जुड़े संगठनों ने बंद के समर्थन की अपील की थी। कई किसान संगठनों, छात्र संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने भी आंदोलन में हिस्सा लिया।

प्रदर्शनकारियों ने अमृतसर से दिल्ली को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को जाम करने की चेतावनी भी दी। झोटा के पिता भीम सिंह ने 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया था।

अमृतसर में प्रदर्शनकारियों ने भगवंत मान सरकार के खिलाफ नारे लगाए और सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। इस दौरान मुख्यमंत्री का पुतला भी जलाया गया। लुधियाना में वारिस पंजाब दे का सदस्य होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री के पोस्टर हटा दिए।

बाजार बंद, सड़कों पर प्रदर्शन

पंजाब बंद सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक चला। कई जिलों में बाजार और निजी स्कूल बंद रहे। लुधियाना के गिल चौक समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कीं।

फगवाड़ा में अधिकतर बाजार बंद रहे, लेकिन सड़कों पर यातायात चलता रहा। अमृतसर में बाजार बंद होने के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। स्वर्ण मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या कम देखी गई।

प्रशासन की कार्रवाई से भी नाराजगी बढ़ी। मानसा जाने वाली सड़कों पर पुलिस बैरिकेडिंग की गई। कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी और अकाली नेता अयाली को बंद से पहले रोके जाने की खबरों के बाद विरोध और तेज हो गया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हत्या के आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया है। इसके बावजूद राज्य में कई दिनों से नाराजगी बनी हुई है।

BJP, कांग्रेस और अकाली दल ने सरकार को घेरा

इस हत्या को लेकर विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और सरकार पर हमला बोला।

पंजाब भाजपा प्रमुख केवल सिंह ढिल्लों ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। उन्होंने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की अपील की।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने नशामुक्त पंजाब का वादा करके सत्ता हासिल की थी, लेकिन अब नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग ही खतरे में हैं।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई मामलों के कारण मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार ने नैतिक आधार खो दिया है। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी इस हत्या को राज्य की कानून-व्यवस्था की विफलता बताया।

CJP को लेकर भी AAP पर उठे सवाल

आम आदमी पार्टी के आलोचक दिल्ली में सक्रिय कॉकroach जनता पार्टी (CJP) का मुद्दा भी उठा रहे हैं। यह संगठन 16 मई को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने वाली टिप्पणी के बाद व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में शुरू हुआ था।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्वयंसेवक रह चुके हैं। AAP नेता आशुतोष रांका को CJP का प्रवक्ता भी बनाया गया था। CJP से अलग हुए एक गुट CJP-D ने दावा किया है कि राष्ट्रीय समिति के 12 सदस्यों में से 8 के AAP से संबंध रहे हैं।

दिपके ने AAP से अपने पुराने संबंध स्वीकार किए हैं, लेकिन कहा है कि फिलहाल उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में अरविंद केजरीवाल समेत AAP के कुछ नेता भी उनके साथ दिखाई दिए थे।

AAP के आलोचकों का आरोप है कि पार्टी पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए दिल्ली में चल रहे आंदोलनों का सहारा ले रही है। हालांकि, CJP और AAP के बीच किसी औपचारिक संबंध, वित्तीय व्यवस्था या साझा अभियान का सार्वजनिक रूप से प्रमाण सामने नहीं आया है। CJP के समर्थकों का कहना है कि उनका आंदोलन छात्रों और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।

आगे बढ़ सकता है आंदोलन

परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर पंजाब सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। जांच में हत्या की वजह व्यक्तिगत दुश्मनी निकलती है या कथित नशे के कारोबार से जुड़ा विवाद, यह आगे की कार्रवाई और राजनीतिक बहस के लिए अहम होगा।

विपक्षी दल सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों के पास बड़े स्तर पर आंदोलन करने की क्षमता है, इसलिए एक दिन का बंद आगे चलकर लंबे प्रदर्शन और राजमार्गों पर जाम में भी बदल सकता है।

पंजाब सरकार ने राज्य को नशामुक्त बनाने का वादा किया है। ऐसे में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले व्यक्ति की हत्या ने सरकार के सामने कानून-व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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