बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर बात करते हुए दावा किया कि बिहार में अब अपराध (अपराध) खत्म हो चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अपराध की घटनाएं हो सकती हैं। मंगलवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “क्राइम हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं हो सकता।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मुख्यमंत्री बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने हिंदी में कहा कि बिहार में अपराध की अवधारणा ही खत्म हो चुकी है। अपराध की घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन अपराध नहीं है और कोई अपराधी भी नहीं है।
आमतौर पर हिंदी में ‘अपराध’ और अंग्रेजी में ‘क्राइम’ का मतलब एक ही होता है। ऐसे में मुख्यमंत्री के इस बयान ने लोगों को उलझन में डाल दिया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री क्राइम और अपराध के बीच क्या अंतर बताना चाहते हैं। माना जा रहा है कि उनके इस बयान का मकसद अपनी सरकार की कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर उपलब्धियां बताना था।
तेजस्वी यादव ने CM पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री के बयान पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने सम्राट चौधरी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा।
तेजस्वी ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी ने सम्राट चौधरी को बिहार बर्बाद करने का ठेका दिया है? उन्होंने मुख्यमंत्री के पुराने विवादों का भी जिक्र किया। तेजस्वी ने 1990 के दशक में सम्राट चौधरी के खिलाफ दर्ज उस मामले का हवाला दिया, जिसमें सात लोगों की हत्या का आरोप लगा था। हालांकि, मुख्यमंत्री इसे अपने खिलाफ झूठा मामला बताते रहे हैं।
इसके अलावा तेजस्वी ने जमुई में छेड़छाड़ के एक मामले को लेकर भी मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।
चिराग पासवान ने क्या कहा?
इस मामले में केवल विपक्षी नेताओं ने ही प्रतिक्रिया नहीं दी। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक बिहारी होने के नाते उनकी इच्छा है कि बिहार पूरी तरह अपराध मुक्त बने और निवेशकों के लिए एक बेहतर जगह के रूप में उभरे।
उनका बयान इस मायने में अहम है कि उन्होंने बिहार को अपराध मुक्त बनाने की इच्छा जताई, न कि यह दावा किया कि राज्य पहले ही अपराध मुक्त हो चुका है।
क्या कहते हैं बिहार के अपराध के आंकड़े?
बिहार में अपराध को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है। हर राजनीतिक दल अपनी सुविधा के हिसाब से आंकड़ों का इस्तेमाल करता है। नेशनल हेराल्ड में प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक, बिहार की कुल अपराध दर कई विकसित और समृद्ध राज्यों के मुकाबले काफी कम है। हालांकि, राज्य में हत्या और दहेज हत्या के मामले बड़ी संख्या में सामने आते हैं।
इस विश्लेषण में अपराध के मामलों की रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए गए हैं। यानी कम अपराध दर का मतलब यह जरूरी नहीं कि अपराध कम हो रहे हैं। यह भी संभव है कि कई मामलों की पुलिस तक शिकायत ही नहीं पहुंचती हो।
बिहार में पहले भी अपराध के आंकड़ों को लेकर इस तरह के दावे किए जाते रहे हैं। साल 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि अपराध के मामले में बिहार देश के राज्यों में 23वें स्थान पर है।
सम्राट चौधरी के बयान का राजनीतिक महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि वह बिहार में मुख्यमंत्री बनने वाले पहले BJP नेता हैं। 1990 के दशक से ही बिहार की राजनीति में कानून-व्यवस्था और ‘जंगलराज’ का मुद्दा अहम रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह कहना कि राज्य में अपराध खत्म हो चुका है, राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।


































