भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय के मिनीरत्न श्रेणी-I PSU हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने नई पहल की है। विशाखापत्तनम स्थित इस सरकारी शिपयार्ड ने आंध्र प्रदेश की काकीनाडा सीपोर्ट्स लिमिटेड (KSPL) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इसका मकसद काकीनाडा में पहले से मौजूद स्लिपवे, जेटी और अन्य समुद्री सुविधाओं का इस्तेमाल जहाज निर्माण के लिए करने की संभावनाएं तलाशना है। दोनों कंपनियां मौजूदा ढांचे का आकलन करेंगी, जरूरत के मुताबिक उसे विकसित करने और उपयुक्त परियोजनाओं की पहचान करने पर काम करेंगी। यह भविष्य में साझेदारी का रास्ता तलाशने की पहल है।
सूर्य से मिली स्वदेशी जहाज निर्माण को नई ताकत
6 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HSL में देश के पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप सूर्य का जलावतरण किया। करीब 43,500 टन क्षमता वाला यह जहाज समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, रसद और जरूरी सामान उपलब्ध कराएगा। इससे युद्धपोतों को लंबे समय तक समुद्र में तैनात रखने में मदद मिलेगी। इसी दिन इस श्रृंखला के पांचवें जहाज की कील भी रखी गई। यह HSL की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
अब काकीनाडा में क्या होगा?
KSPL काकीनाडा डीप वाटर पोर्ट का संचालन करती है। मार्च 1999 में आंध्र प्रदेश सरकार ने उसे 30 साल के कंसेशन समझौते के तहत बंदरगाह के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी थी।
अब इसी बंदरगाह पर मौजूद दो सुविधाओं के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
- स्लिपवे: ढलान वाला प्लेटफॉर्म, जिस पर जहाज का ढांचा तैयार किया जाता है और बाद में उसे पानी में उतारा जाता है।
- जेटी: बंदरगाह के किनारे बना प्लेटफॉर्म, जहां जहाजों को खड़ा करके उनकी फिटिंग, मरम्मत और दूसरे काम किए जाते हैं।
समझौते के तहत दोनों कंपनियां इन सुविधाओं की तकनीकी क्षमता का आकलन करेंगी। इसके बाद तय होगा कि किस तरह के जहाज यहां बनाए जा सकते हैं और किन अतिरिक्त सुविधाओं की जरूरत होगी।
नया शिपयार्ड भी HSL की योजना में
काकीनाडा समझौता HSL की आंध्र प्रदेश में विस्तार की एकमात्र योजना नहीं है। नवंबर 2025 में कंपनी ने आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड के साथ राज्य में ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित करने की संभावनाएं तलाशने के लिए समझौता किया था।
दोनों पहलों में अंतर है। ग्रीनफील्ड शिपयार्ड के लिए नया ढांचा विकसित करना होगा, जबकि काकीनाडा में पहले से मौजूद बंदरगाह सुविधाओं का इस्तेमाल करने की योजना है।
यानी HSL एक ओर नई जहाज निर्माण क्षमता विकसित करने का विकल्प तलाश रहा है, तो दूसरी ओर मौजूदा समुद्री ढांचे से अतिरिक्त क्षमता हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है जहाज निर्माण?
भारत जहाज निर्माण में घरेलू क्षमता बढ़ाने और विदेशी शिपयार्ड पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। सितंबर 2025 में केंद्र सरकार ने जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र के लिए 69,725 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी थी।
इसमें 19,989 करोड़ रुपये की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम शामिल है। इसका लक्ष्य देश की सालाना जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाकर 45 लाख ग्रॉस टन करना है।
सरकार के मुताबिक, इस पैकेज से करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 30 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
काकीनाडा में जहाज निर्माण की संभावनाएं सफल रहती हैं तो स्टील, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल उपकरण, मशीनरी और लॉजिस्टिक्स जैसे सहायक उद्योगों को भी फायदा मिल सकता है। स्थानीय MSME और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं के लिए नए अवसर बन सकते हैं।
1941 में शुरू हुआ था HSL का सफर
HSL की स्थापना उद्योगपति वालचंद हीराचंद ने सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी के तहत विशाखापत्तनम में की थी। 21 जून 1941 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसकी नींव रखी थी। तब इसे सिंधिया शिपयार्ड कहा जाता था।
वर्ष 1948 में यहां निर्मित जल उषा को पानी में उतारा गया। इसे स्वतंत्र भारत में देश के भीतर निर्मित पहला जहाज माना जाता है। बाद में शिपयार्ड सरकारी स्वामित्व में आया और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड बना। वर्ष 2010 में इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन कर दिया गया।
आज HSL जहाज निर्माण, मरम्मत, रीफिट और नौसेना की पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण का काम करता है। यहां 80,000 डेडवेट टन तक के जहाजों को संभालने वाला ढका हुआ बिल्डिंग डॉक भी है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2023-24 में 118.82 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था।































