अग्निपथ योजना में सबसे बड़ा बदलाव अग्निवीरों की सेवा अवधि को लेकर हो सकता है। अभी अग्निवीरों को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाता है। अब इस अवधि को बढ़ाकर छह साल करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है।
इस बदलाव का सीधा असर भर्ती प्रक्रिया, ट्रेनिंग, सेना में जवानों की उपलब्धता और चार साल बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के भविष्य पर पड़ सकता है। हालांकि, प्रस्ताव और सरकार के अंतिम फैसले में अंतर है। इसलिए छह साल की सेवा को अभी लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए।
1. अग्निवीर योजना में अभी क्या व्यवस्था है?
केंद्र सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य सेना में युवाओं की संख्या बढ़ाना, जवानों की औसत उम्र कम करना और रक्षा पेंशन पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करना था।
मौजूदा व्यवस्था के प्रमुख प्रावधान:
सेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के लिए भर्ती।
ट्रेनिंग भी चार साल की सेवा अवधि में शामिल।
चार साल बाद अधिकतम 25% अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल करने का प्रावधान।
बाकी 75% को सेवा से मुक्त किया जाता है।
सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को करीब 11.71 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज मिलता है।
चार साल की सेवा के बाद नियमित पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलता।
2. चार से छह साल का बदलाव क्या है?
इस प्रस्ताव का मकसद उन अग्निवीरों को दो साल और सेना में सेवा का अवसर देना है, जिन्हें चार साल बाद नियमित सैनिक के रूप में नहीं चुना जाता।
| प्रावधान | मौजूदा व्यवस्था | प्रस्तावित बदलाव |
|---|---|---|
| शुरुआती सेवा | 4 साल | 4 साल |
| अतिरिक्त सेवा | नहीं | 2 साल |
| कुल सेवा | 4 साल | 6 साल |
| नियमित कैडर | अधिकतम 25% | चयन के नियमों पर निर्भर |
| बाकी अग्निवीर | 4 साल बाद सेवा समाप्त | 2 साल अतिरिक्त सेवा का अवसर |
इसका मतलब यह नहीं है कि सभी अग्निवीरों को छह साल बाद स्थायी सैनिक बना दिया जाएगा। नियमित कैडर में चयन और अस्थायी सेवा विस्तार दो अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं।
4 नवंबर को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कैबिनेट के फैसले के बाद दो साल के सेवा विस्तार की घोषणा की है। यानी चार साल की सेवा पूरी करने वाले और नियमित कैडर में शामिल नहीं होने वाले अग्निवीरों को दो साल और सेवा का विकल्प दिया जाएगा। यह विकल्प लेना अग्निवीरों की इच्छा पर निर्भर होगा।
3. किसे मिलेगा दो साल का एक्सटेंशन?
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन अग्निवीरों को होगा, जो चार साल बाद नियमित सैनिक के रूप में चयनित नहीं हो पाते।
पहले बैच में तीनों सेनाओं में करीब 24,400 अग्निवीर भर्ती हुए थे। करीब 18,300 अग्निवीर यानी लगभग 75% ऐसे थे, जिन्हें चार साल बाद सेवा से बाहर होना था। अब उन्हें दो साल और सेवा करने का विकल्प मिलेगा।
यानी सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हजारों अग्निवीरों की चार साल की सेवा समाप्त होने वाली थी।
4. दो साल अतिरिक्त सेवा से क्या बदलेगा?
इस बदलाव के तीन बड़े पहलू हैं। पहला, सेना को अनुभवी जवान मिलेंगे: चार साल की ट्रेनिंग और सेवा के बाद अग्निवीरों को सैन्य उपकरणों, हथियारों और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं का अनुभव मिल चुका होता है। दो साल अतिरिक्त सेवा से इस अनुभव का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
दूसरा, अग्निवीरों को मिलेगा ज्यादा समय: पहले चार साल बाद उन्हें सेना छोड़कर नौकरी या दूसरे करियर की तैयारी करनी पड़ती थी। अब दो साल का अतिरिक्त समय मिलेगा। इससे उन्हें सैन्य अनुभव और कौशल को और बेहतर करने का अवसर मिलेगा।
तीसरा, नियमित सैनिक बनने का एक और रास्ता: CDS के मुताबिक, एक्सटेंशन पाने वाले अग्निवीरों को उनके प्रदर्शन के आकलन के आधार पर नियमित पदों के लिए भी विचार किया जा सकेगा। उन्हें अतिरिक्त सेवा के दौरान बेहतर वेतन भी मिलेगा।
क्या अब अग्निवीरों को पेंशन भी मिलेगी?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। छह साल की सेवा का मतलब अपने आप नियमित सैनिक जैसी पेंशन का अधिकार मिलना नहीं है। अभी घोषित बदलाव में दो साल का सेवा विस्तार, बेहतर वेतन और नियमित पदों के लिए प्रदर्शन आधारित विचार शामिल हैं। लेकिन पेंशन, ग्रेच्युटी, सेवा निधि की नई गणना और अन्य सेवा शर्तों को लेकर विस्तृत नियमों का इंतजार करना होगा।
क्या अग्निपथ योजना का स्वरूप बदल रहा है?
चार साल से छह साल की सेवा का फैसला अग्निपथ योजना में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। सरकार ने मूल भर्ती मॉडल को पूरी तरह समाप्त नहीं किया है, बल्कि चार साल बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए एक अतिरिक्त अवसर बनाया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि कितने अग्निवीर दो साल का विस्तार स्वीकार करते हैं और उनमें से कितनों को आगे नियमित कैडर में जगह मिलती है।































