दिल्ली में भारतीय वायुसेना (IAF) की 40 एकड़ जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 31 अक्टूबर को रिटायर होने से पांच दिन पहले यानी 26 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इस जमीन को वायुसेना के पास ही रखने की मांग की थी। यह जमीन दिल्ली के रेसकोर्स एयरफोर्स स्टेशन में स्थित है। यहां वायुसेना का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी है, जिसे अक्टूबर 2026 में बंद कर दिया गया था। बताया गया कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने इस जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि, जमीन वापस लेने का स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है।
5 हजार से ज्यादा वायुसेना कर्मियों से जुड़ी है जमीन
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने पत्र में कहा कि यह जमीन केवल खेल परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि वायुसेना की कई महत्वपूर्ण गतिविधियों का केंद्र है। इस स्टेशन पर 5,000 से ज्यादा वायुसेना कर्मियों के रहने की व्यवस्था है। इसके अलावा यहां ट्रेनिंग सेंटर, मेडिकल सेंटर और स्कूल भी मौजूद हैं।
इस स्टेशन से दिल्ली की हवाई सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभाई जाती हैं। यहां दिल्ली इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सेंटर के साथ मिलकर ड्रोन जैसे मानवरहित विमानों से निपटने की व्यवस्था भी है। वायुसेना 1940 के दशक से इस जमीन का इस्तेमाल कर रही है। यह इलाका प्रधानमंत्री आवास के नजदीक है, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिहाज से भी काफी अहमियत है।
लुटियंस दिल्ली में जमीन वापस लेने की तैयारी
यह मामला लुटियंस दिल्ली में सरकारी जमीनों को वापस लेने की बड़ी योजना का हिस्सा माना जा रहा है। लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस कई हफ्तों से लोक कल्याण मार्ग के आसपास की जमीनों की समीक्षा कर रहा है। इसमें रक्षा विभाग के गोल्फ और खेल परिसरों की जमीन भी शामिल है।
इससे पहले अगस्त में दिल्ली रेस क्लब को उसकी 53 एकड़ जमीन से हटा दिया गया था। उस समय सरकार ने जमीन को सार्वजनिक उपयोग के लिए जरूरी बताया था, लेकिन इसका स्पष्ट उद्देश्य नहीं बताया गया। जयपुर पोलो ग्राउंड और दिल्ली जिमखाना क्लब भी इस तरह की कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
इस फैसले का असर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के आखिरी दिनों पर भी पड़ा। रिटायरमेंट से पहले होने वाला उनका पारंपरिक विदाई गोल्फ कार्यक्रम भी रद्द करना पड़ा। कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे शर्मनाक बताया और कहा कि यह वायुसेना के जवानों और उनके परिवारों का अपमान है। हालांकि, सरकार ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि इस जमीन का इस्तेमाल किस काम के लिए किया जाएगा।
क्या वायुसेना के कामकाज पर पड़ेगा असर?
सिर्फ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बंद होने से वायुसेना की उड़ान गतिविधियों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर सरकार इस स्टेशन के दूसरे हिस्सों को भी अपने कब्जे में लेती है, तो वायुसेना की ट्रेनिंग, हवाई सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं।
खास तौर पर ड्रोन से निपटने वाली सुरक्षा व्यवस्था को दूसरी जगह ले जाना आसान नहीं होगा। इसके लिए समय और नई व्यवस्था की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा 5,000 से ज्यादा कर्मचारियों के रहने, स्कूल और मेडिकल सेंटर के लिए भी दूसरी जगह इंतजाम करना होगा।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 31 अक्टूबर को रिटायर हो चुके हैं। 1 नवंबर को नए वायुसेना प्रमुख ने पदभार संभाल लिया है। हालांकि, इस जमीन को लेकर आगे क्या फैसला होगा और नए वायुसेना प्रमुख इस मामले को कैसे संभालेंगे, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
