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जन्मदिवस विशेष: नाभा जेल में नेहरू की बदबूदार कोठरी और बाहर निकलने के लिए अंग्रेजों को दिया गया ‘वचनपत्र’

ऐसे समय में जबकि अपने राष्ट्र नायकों को लेकर भारत में राजनीतिक बहसें तेज़ हो रही हैं,  विचारधाराओं की लड़ाई भी पहले से ज़्यादा गहरी हो गई है- एक नाम बार-बार सामने आता है—विनायक दामोदर सावरकर, जिन्हें करोड़ों लोग ...

अंग्रेज़ और न्यायपूर्ण शासन ? गुलाम मानसिकता में जीने वालों को अब अपनी आंखों से औपनिवेशिक पट्टी हटा लेनी चाहिए

ज्ञात इतिहास में भारत पर आक्रांताओं के रूप में आने वालों में शक, हूण, कुषाण, मुसलमान, डच, पोर्तुगीज, फ्रेंच, अंग्रेज़ आदि प्रमुख हैं। इन में सबसे ज्यादा समय तक भारत के विभिन्न हिस्सों पर शासन किया, विभिन्न मुस्लिम वंशों ...

बिहार के थे आज हिंदी के नाम पर नफरत फैला रहे राज और उद्धव ठाकरे के पूर्वज, अंग्रेज़ से प्रेरित था सरनेम

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हिंदी और मराठी भाषा को लेकर विवाद गरमाया हुआ है। इस बार इस विवाद ने ठाकरे परिवार को केंद्र में ला खड़ा किया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण ...

अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

जब विनायक दामोदर सावरकर यानी वीर सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने अंडमान की सेलुलर जेल में कैद किया, तब उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि एक दिन स्वतंत्र भारत में भी उन्हें जेल में जाना पड़ेगा। कोल्हू में ...

नेहरू के विरोध के बावजूद भारतीय सेना के पहले हिंदुस्तानी कमांडर-इन-चीफ कैसे बने करियप्पा? अंग्रेज अफसरों को फौज की कमान क्यों सौंपना चाहते थे नेहरू?

15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हो गया, भारत-पाकिस्तान दो नए देश बने और सेनाएं भी दोनों देशों के बीच बंट गईं। तब तक सेना प्रमुख अंग्रेज़ ही होते थे और आगे भी करीब 2 वर्षों तक यह सिलसिला ...

जलियांवाला नरसंहार के अगले दिन जब पंजाब के इस इलाके में अंग्रेज़ों ने 3 लड़ाकू विमानों से बरसाए थे बम

Kesari 2 में जिस तरह ब्रिटिश हुकूमत के अमानवीय चेहरे को बेनकाब किया गया है, उसने एक बार फिर 1919 के जलियांवाला बाग़ जैसे ज़ख्मों को ताज़ा कर दिया है। उस हृदयविदारक नरसंहार की कहानी कोई इतिहास नहीं, बल्कि ...

प्लेग महामारी में दुर्व्यवहार कर रहे अंग्रेज अधिकारी को सरेआम मारी गोली और हाथ में गीता लिए चूम लिया फंदा: कहानी दामोदर चापेकर की

आज, 18 अप्रैल को उस महान राष्ट्रभक्त दामोदर हरी चापेकर की पुण्यतिथि है जिस वीर ने विदेशी सत्ता की जड़ें हिलाने वाली पहली क्रांति की चिंगारी जलाई और जिसके सनातन समर्पण ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की वैचारिक नींव ...

देश का पहला बागी मंगल पांडे: बलिया के लाल ने अंग्रेजों के दांत किए थे खट्टे, थर-थर कांपती थी हुकूमत

Freedom Fighter Mangal Pandey Biography: कहानी शुरू होती है आज से करीब 168 साल पहले...संयुक्त प्रांत यानी आज के उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पड़ने वाले नगवा गांव में 19 जुलाई 1827 को एक लड़के का जन्म होता ...

भारती आशा सहाय: रानी झांसी रेजिमेंट की वो वीरांगना जिन्होंने स्कूल जाने की उम्र में अंग्रेज़ों के खिलाफ बंदूक उठा ली

देश की आज़ादी में जिन नायिकाओं ने अहम योगदान दिया उनकी वीरता की कहानियां खोती जा रही हैं। जिन शख्सियतें को देश के सामने एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए था उनकी कहानियों पर वक्त की ...

INA की जासूस सरस्वती राजमणि: अंग्रेज़ों को छकाने वाली योद्धा जिन्हें भारत में पेंशन के लिए भटकना पड़ा

कई दशकों तक चली भारत की आज़ादी की लड़ाई में अनगिनत वीरों-वीरांगनाओं के बलिदान दिया। इस लंबे संघर्ष की गाथा में कई नायकों को देश ने सिर-आंखों पर बैठाया जबकि सैकड़ों-हज़ारों गुमनामी में छिपे रह गए। इन्हीं में से ...

गुरबक्श सिंह ढिल्लों: आज़ाद हिंद फौज के वो वीर जो अंग्रेज़ों के लिए लड़े और उनके खिलाफ भी

नवंबर 1945 की बात है, देश में स्वतंत्रता की लड़ाई ज़ोरों पर थी। विमान दुर्घटना में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निधन की खबर फैल गई थी और लाल किला समेत अनेक जगहों पर आज़ादी हिंद फौज के सैनिकों ...

‘पहला सावरकर’: कहानी बंगाल विभाजन के बाद अंग्रेजों को हिला देने वाले गणेश दामोदर सावरकर की

वह 20 साल की उम्र में अनाथ हो गया था। 13 साल तक जेल में संघर्ष करता रहा। होश संभालने के बाद से घर-परिवार की जिम्मेदारी और देश की कठिन परिस्थितियां दोनों ही उसे परेशान करती थीं। लेकिन हार मानना ...

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