बाल्यकाल से आत्मबोध तक: महर्षि रमण के दिव्य जीवन की अनुपम गाथा
प्रायः लोग जीवन के उत्तरार्द्ध में ईश्वर-स्मरण की ओर उन्मुख होते हैं, पर कुछ विरल आत्माएँ ऐसी होती हैं जिनके भीतर पूर्वजन्म के संस्कार बाल्यकाल से ही जाग्रत हो जाते हैं। महर्षि रमण ऐसी ही दिव्य विभूति...
























