“जब लोग आपके खिलाफ बोलने लगे, समझ लो तरक्की करने लगे हो।” यदि ‘गुरु’ फिल्म के इस संवाद को परम सत्य माना जाए,...
शासन शक्ति और सख्ती से चलता है, शासन के इसी शक्ति और सख्ती का प्रतीक बन चुका है बुलडोजर। पहले, दंगाई दंगा करते...
“अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा”, आप भी सोच रहे होंगे तात्पर्य? प्रारंभ में हमें भी नहीं समझ आता...
हिमाचल की AAP इकाई के लिए “खालिस्तान की मांग संवैधानिक अधिकार है” यह क्रांति लाने आए थे जी, ये राजनीति बदलने आए थे...
समान नागरिक सहिंता, वो मांग है जो आजादी के बाद के 7 दशक बीत जाने के पश्चात समय की मांग बनकर सबके सामने...
पता है धूम्रपान से भी हानिकारक क्या होता है? जंक फूड? शायद, पर पूरी तरह नहीं। मदिरा? थोड़ा बहुत, पर वो भी नहीं!...
किसी भी देश की कानून व्यवस्था में भाषा का भी एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत जैसा विशाल देश जहां हर क्षेत्र में...
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का मुद्दा राज्य की पहचान के साथ जुड़ गया है और इसे सुलझाने के लिए हो रहे प्रयास...
भारत की आजादी के समय से एक विवाद, जिसे समय समय पर राजनीतिक आवश्यकता के अनुसार उभारा जाता रहा है, वह भाषागत विभिन्नता...
बड़ा दुःख होता है जब आप योग्य न हों और आपको योग्य प्रदर्शित करने का ढोंग रचा जाता है। ओला के संदर्भ में...
इन दिनों केंद्र सरकार हर उस संस्थान के विरुद्ध ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है, जो भारत के हितों के विरुद्ध जा रहे हैं,...
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और हर कथा के दो दृष्टिकोण होते हैं। अंतर इस बात से पड़ता है कि आपने...


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