TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद

    वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद : मुस्लिम संगठन ने वंदे मातरम को स्वीकार करने को हमला बताया

    फिल्म घूसखोर पंडित को लेकर बवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स को निर्देश दिया: ‘घूसखोर पंडित’ का नाम बदलें, फिल्म का टाइटल बदलने तक ‘रिलीज़ नहीं

    शेख हसीना का भारत में प्रवास और प्रत्यर्पण

    बांग्लादेश में बीएनपी की सत्ता वापसी: जानें क्या हुआ था साल 2024 में ?

    बांग्लादेश में नई सरकार की तैयारी

    बांग्लादेश में नई सरकार की तैयारी: तारिक रहमान को पीएम मोदी ने दी बधाई, कहां -मिलकर करेंगे काम

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत अमेरिका डिल में जानें क्या है खास बात

    India US Trade Deal: अमेरिका के साथ खेती और डेयरी को लेकर क्या हुई डील? जानें भारत ने क्या लिया फैसला

    सिस्टम की लापरवाही से दिल्ली में एक और मौत

    जल बोर्ड की चूक बनी जानलेवा, जनकपुरी में गड्ढ़े में गिरकर बाइक सवार की मौत

    चिकन नेक भारत की एक पतली ज़मीन की पट्टी है

    चिकन नेक में अंडरग्राउंड रेल कनेक्टिविटी: हकीकत या सिर्फ योजना?

    अडानी ग्रुप इटली के लियोनार्दो के साथ स्वदेशी समानों से बनाएगा हेलिकॉप्टर

    भारत में हेलिकॉप्टर उत्पाद बढ़ेगा, अदानी ग्रुप ने लियोनार्दो के साथ की पहल ,स्वदेशी को दिया जाएगा बढ़ावा

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    तेजस Mk1-A: बन कर तैया

    तेजस Mk1-A: बन कर तैयार हैं तो फिर Air Force को सौंपे क्यों नहीं गए ? इंजन या HAL की लेट लतीफी- क्या है देरी की असली वजह ?

    भारत में बनाएं जाएंगे स्वदेशी विमान

    फ्रांस से 114 राफेल खरीदने की ₹3.25 लाख करोड़ डील को जल्द मिल सकती है DAC की मंज़ूरी

    अग्नि-3 एक तैयार और मैच्योर मिसाइल सिस्टम है

    अग्नि -3 का एक और परीक्षण: भारत एक Active Nuclear Missile को बार-बार Test क्यों कर रहा है?

    डिंगातारा सिंगापुर के साथ मिलकर करेगा उपग्रहों की सुरक्षा

    अंतरिक्ष मलबे से निपटने के लिए भारतीय स्टार्टअप डिंगातारा और सिंगापुर की साझेदारी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत का ऊर्जा रणनीतिक बदलाव

    रूस पर निर्भरता घटाने की दिशा में भारत का कदम: वेनेजुएला से 20 लाख बैरल तेल की खरीद

    रूसी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में चाकू से हमला

    रूसी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में चाकू से हमला, 4 भारतीय छात्र घायल

    भारत–EU सहयोग को नई गति

    समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

    एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका

    एलन मस्क को झटका : भारत ने स्टारलिंक के GEN-2 सैटेलाइट सिस्टम को किया खारिज

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद

    वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद : मुस्लिम संगठन ने वंदे मातरम को स्वीकार करने को हमला बताया

    फिल्म घूसखोर पंडित को लेकर बवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स को निर्देश दिया: ‘घूसखोर पंडित’ का नाम बदलें, फिल्म का टाइटल बदलने तक ‘रिलीज़ नहीं

    शेख हसीना का भारत में प्रवास और प्रत्यर्पण

    बांग्लादेश में बीएनपी की सत्ता वापसी: जानें क्या हुआ था साल 2024 में ?

    बांग्लादेश में नई सरकार की तैयारी

    बांग्लादेश में नई सरकार की तैयारी: तारिक रहमान को पीएम मोदी ने दी बधाई, कहां -मिलकर करेंगे काम

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत अमेरिका डिल में जानें क्या है खास बात

    India US Trade Deal: अमेरिका के साथ खेती और डेयरी को लेकर क्या हुई डील? जानें भारत ने क्या लिया फैसला

    सिस्टम की लापरवाही से दिल्ली में एक और मौत

    जल बोर्ड की चूक बनी जानलेवा, जनकपुरी में गड्ढ़े में गिरकर बाइक सवार की मौत

    चिकन नेक भारत की एक पतली ज़मीन की पट्टी है

    चिकन नेक में अंडरग्राउंड रेल कनेक्टिविटी: हकीकत या सिर्फ योजना?

    अडानी ग्रुप इटली के लियोनार्दो के साथ स्वदेशी समानों से बनाएगा हेलिकॉप्टर

    भारत में हेलिकॉप्टर उत्पाद बढ़ेगा, अदानी ग्रुप ने लियोनार्दो के साथ की पहल ,स्वदेशी को दिया जाएगा बढ़ावा

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    तेजस Mk1-A: बन कर तैया

    तेजस Mk1-A: बन कर तैयार हैं तो फिर Air Force को सौंपे क्यों नहीं गए ? इंजन या HAL की लेट लतीफी- क्या है देरी की असली वजह ?

    भारत में बनाएं जाएंगे स्वदेशी विमान

    फ्रांस से 114 राफेल खरीदने की ₹3.25 लाख करोड़ डील को जल्द मिल सकती है DAC की मंज़ूरी

    अग्नि-3 एक तैयार और मैच्योर मिसाइल सिस्टम है

    अग्नि -3 का एक और परीक्षण: भारत एक Active Nuclear Missile को बार-बार Test क्यों कर रहा है?

    डिंगातारा सिंगापुर के साथ मिलकर करेगा उपग्रहों की सुरक्षा

    अंतरिक्ष मलबे से निपटने के लिए भारतीय स्टार्टअप डिंगातारा और सिंगापुर की साझेदारी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत का ऊर्जा रणनीतिक बदलाव

    रूस पर निर्भरता घटाने की दिशा में भारत का कदम: वेनेजुएला से 20 लाख बैरल तेल की खरीद

    रूसी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में चाकू से हमला

    रूसी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में चाकू से हमला, 4 भारतीय छात्र घायल

    भारत–EU सहयोग को नई गति

    समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

    एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका

    एलन मस्क को झटका : भारत ने स्टारलिंक के GEN-2 सैटेलाइट सिस्टम को किया खारिज

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

मीरा की CV कोविन्द से बेहतर! पर उनके पिछले पाप उन्हे राष्ट्रपति नहीं बनने देंगे

Yash Joshi द्वारा Yash Joshi
1 July 2017
in मत
मीरा कुमार रामनाथ कोविन्द

Image Courtesy: BBC

Share on FacebookShare on X

काफी गहमागहमी के बाद, दोनों सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष ने आखिरकार जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिये। एक लगभग गुमनाम उम्मीदवार के तौर पर बिहार के पूर्व राज्यपाल श्री रामनाथ कोविन्द के चुनाव ने विपक्ष की बत्ती गुल कर दी, जिस्से सकते में आकर उन्हे मजबूरी में भारत के प्रथम नागरिक के लिए दलित बनाम दलित का आयोजन करने पर मजबूर करते हुये, कथित दलित नेता एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को इस पद के लिए नामांकित किया।

आइये, दृष्टि डालें दोनों उम्मीदवारों पर :-

  1. श्री राम नाथ कोविन्द:-

मीडिया में फैले अफवाहों को धता बताते हुये भाजपा ने एक ही झटके में पूरे विपक्ष की धज्जियां उड़ा दी, जब उन्होने राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविन्द को नामांकित किया, जिनहे मीडिया ने पूछा तक नहीं। इनहोने हमेशा अपने आप को मीडिया और पब्लिसिटी से अलग रखा है, सो ज़ाहिर है की काफी कम जानकारी इनके उपलक्ष्य में प्राप्त होगी। 2015 में श्री कोविन्द को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जो इससे पहले पार्टी के राष्ट्रिय प्रवक्ता और राज्य सभा सांसद भी रह चुके हैं। 1999-2002 तक भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष भी यह रह चुके हैं।

संबंधितपोस्ट

हिंदुस्तान में ‘मुस्लिम प्रधानमंत्री’ क्यों बनना चाहिए?

राष्ट्रपति चुनाव: विपक्ष के टकराव ने भाजपा को दे दिया है आसान रास्ता

NCP की मदद से PM के बाद अब महामहिम भी बनना चाहते हैं नीतीश कुमार!

और लोड करें

दिल्ली हाइ कोर्ट में 1977-1979 में राम नाथ कोविन्द केन्द्रीय सरकार के वकील रह चुके हैं, और 1980-1993 तक केन्द्रीय सरकार के स्थायी वकील भी रह चुके है सुप्रीम कोर्ट में। भारत के सुप्रीम कोर्ट में ये 1978 में एडवोकेट ऑन रेकॉर्ड नियुक्त किए गए। 1993 तक इनहोने दिल्ली हाइ कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों को अपनी सेवाएँ दी।

इनहोने सिविल सेवा परीक्षा भी उत्तीर्ण की, पर सम्बद्ध सेवाओं में नियुक्ति के कारण इनहोने इन सेवाओं में हिस्सा नहीं लिया। राम नाथ कोविन्द को 1994 में राज्य सभा सदस्य नियुक्त किया गया, और 12 सालों तक इनहोने उत्तर प्रदेश और देश को अपनी सेवाएँ मार्च 2006 तक दी। एक प्रशासक के तौर पर इनकी क्षमताओं पर सवाल उठाने वाली विपक्ष ये भूल गए की गृह कार्य, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण , कानून एवं न्याय के तमाम सांसदीय समितियों की अध्यक्षता की और राज्य सभा सदन समिति के अध्यक्ष भी रहे। यही नहीं, इनहोने भारतीय प्रबंधन संस्थान, कलकत्ता के बोर्ड ऑफ गोवेर्नोर्स के सदस्य के तौर पर सेवा भी की।

कानपुर के पास परौख गाँव से दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट और संसद और फिर पटना में राज भवन का सफर करने वाले कोविन्द जी का सफर एक प्रतिबद्ध पार्टी कार्यकर्ता और एक समाजसेवी के तौर पर रहा है।

वो इलाका जहां रामनाथ कोविन्द बाज़ी मारते हैं अपने प्रतिद्वंदी से, वो है इनका पिछड़ापन। बतौर वकील, इनहोने समाज के पिछड़े वर्गों को अपनी सेवाएँ मुफ्त में प्रदान कारवाई, खासकर अनुसूचित जंजातियों की महिलाओं को । इनकी साफ सुथरी छवि और भ्रष्टाचार मुक्त आचरण भाजपा के लिए सोने पे सुहागा है।

पर वो क्या है न, जिसमें कोई कमी न हो, उसमें मीडिया फर्जी की कमियाँ निकालने में माहिर हैं। इनके साथ भी वही हुआ, हालांकि इनके हाथ कुछ खास नहीं लगा, सिवाय इसके की 2010 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिये गए साक्षात्कार ने कुछ हलचल ज़रूर मचवाई।

पर यह पूरी कहानी तो नहीं है, असली कहानी और समीक्षा तो यहाँ मिलेगी

शायद राम नाथ कोविन्द पूरी तरह गलत भी नहीं है, जब वो मुसलमानों और इसाइयों के आरक्षण के खिलाफ हैं। वर्तमान में जब उन्हे पिछड़ी जातियों के तौर पर आरक्षण मिल रहा हो, तो उन्हे और आरक्षण किस खुशी में मिलना चाहिए?

श्री कोविन्द जी को चिंता थी की कहीं ये लोग दलितों के लिए बनाए गए निर्वाचन क्षेत्रों में इन्ही के अधिकार न छीन ले, जो कुछ हद तक वाजिब भी है।

  1. मीरा कुमार:-

मीरा कुमार के पास कहने को उनके प्रतिद्वंदी से ज़्यादा रसूख प्राप्त हैं। लोक सभा की पहली महिला अध्यक्ष ये रही हैं, और पाँच बार सांसद भी रह चुकी हैं। ये बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं , जो एक कुशल स्वतन्त्रता सेनानी होने के साथ साथ 1977-1979 तक उप प्रधानमंत्री भी रहे हैं। हालांकि मीरा कुमार अपने पिता के साये से निकल कर बाहर आई, और अपने लिए अलग पहचान बनाई। ये पूर्व भारतीय विदेश सेवा अफसर रह चुकी हैं, जिनहोने स्पेन, यूके और मॉरीशस के दूतावासों में काम किया है। ये विधि की ग्रेजुएट भी हैं, पर रामनाथ कोविन्द की तरह इनहोने वकालत नहीं की। 1985 में ये काँग्रेस से जुड़ी, और राजनीति में इनका आगमन दलित नेता के तौर इनकी काबिलियत को तब साबित किया, जब इनहोने मशहूर दलित नेताओं, राम विलास पासवान और मायावती को पटककर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में चुनाव में विजय हासिल की।

इनके पिता का गृह राज्य बिहार होने के बावजूद इनहोने दिल्ली से तीन बार चुनाव लड़ा, जिनमे दो में विजय प्राप्त की, और एक में हार। 2004-2009 तक ये सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण की मंत्री भी रह चुकी है। इन्हे फिर से कैबिनेट में मंत्री बनाया गया था 2009 में, पर लोक सभा अध्यक्ष बनने के चक्कर में इनको अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि अपने राजनीतिक रसूख को यह संभाल न पायी, और 2014 में अपने ही घर, बिहार के सासाराम से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।

पर कोविन्द, जिनहे बीजेपी या आरएसएस से कोई शिकायत नहीं थी, मीरा कुमार ने 2000 में मतभेद के कारण काँग्रेस छोड़ दिया था। इन्हे दोबारा 2002 में पार्टी में जगह मिली।

पर इनके उपलब्धियों के साथ साथ इनका विवादों से भी चोली दमन का नाता रहा है, जिसके कारण ये रायसीना हिल्स में रहने लायक कतई नहीं है।

लुटयेंस’ दिल्ली में बंगले का भूत

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने यूपीए I से ही अपने 6, कृष्ण मेनन मार्ग स्थित अपने पिता के बंगले को एक स्मारक में परिवर्तित करना चाहती थी। फिर अध्यक्ष के तौर पे अपने पद का दुरुपयोग करते हुये इनहोने न सिर्फ मनमोहन सरकार से इस बात की रजामंदी कराई, बल्कि इसके लिए केंद्र और न्यायपालिका तक को ताक पर रखा। ये फैसला न सिर्फ 2000 के एनडीए सरकार के कैबिनेट के खिलाफ गया, जो ऐसे भेदभाव रोकने को तत्पर थी, बल्कि ये सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के सिर्फ एक महीने बाद हुआ, जिनहोने ये निर्णय लिया की आवासीय सुविधाओं के लिए आवंटित सरकारी घरों में कोई स्मारक नहीं बन सकता।

पर जिसके लिए ये सरकार कुख्यात थी, यूपीए 2 ने इस निर्णय की धज्जियां उड़ाते हुये 2013 के अगस्त महीने में मीरा कुमार की यह इच्छा पूरी कर दी। एक समय पर इनके पास दो बंगले थे लुटयेंस’ दिल्ली में, जिसमें एक बंगला इन्हे 20, अकबर रोड पर अध्यक्ष होने के नाते मिला था। एक आरटीआई जवाब के अनुसार मीरा कुमार पर सरकार ने 1.98 करोड़ रुपये का किराया संबन्धित बिल चस्पा किया था, जिसमें मीरा कुमार पर ये आरोप लगे की अध्यक्ष रहते हुये इस बिल को माफ करवा दिया। प्रत्यक्षा प्रमाण होने के बाद भी कई लोगों ने इस पूरे विवाद को नज़रअंदाज़ किया, पर काँग्रेस के हालिया ट्वीट ने तो मानो अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली।   मीरा कुमार रामनाथ कोविंद

हो सकता है काँग्रेस इस ट्वीट को डिलीट कर दे, जैसा की मशहूर है। ये नैतिक भ्रष्टाचार  का पहला ऐसा केस होगा, जहां काँग्रेस पीड़ित भी, अभियुक्त भी और न्यायाधीश भी वही। पार्टी ने अपने एक सदस्य का कर्जा अवैध तरीके से माफ कराया, और इसे अपनी उपलब्धि बता कर नाच भी रहा है। शायद इसीलिए लोग एक काँग्रेस मुक्त भारत चाहते हैं।

लोक सभा टीवी सीईओ को पद से हटाना:-

ये तो कुछ भी नहीं है। जब नरेंद्र मोदी की सरकार ने 26 मई 2014 को शपथ ली थी, नए अध्यक्ष के नामित होने तक मीरा कुमार कार्यवाहक अध्यक्ष का पद संभाल रही थी। पर 4 जून, को अपने पद के आखरी दिन, इनहोने लोक सभा टीवी के सीईओ राजीव मिश्रा को उनके पद के खत्म होने से पहले ही न सिर्फ हटाया, बल्कि आरटीआई याचिकाओं के अनुसार इनहोने मिश्रा जी का बकाया वेतन आरबीआई से कहकर वापस निकलवा लिया, जो बदले की भावना से किया गया था। और क्यूँ? सिर्फ इसलिए, क्योंकि इनहोने मीरा कुमार को अपने ही क्षेत्र से हारते हुये इनकी लोक सभा के चुनाव की तस्वीर प्रसारित कर दी। सच दिखाने के लिए इतनी बड़ी सज़ा?

हो सकता है मीरा कुमार की उपलब्धियां रामनाथ कोविन्द से ज़्यादा हों, पर उनके घोटाले उन्हे प्रथम नागरिक बनने के योग्य कहीं भी नहीं ठहरती। रामनाथ कोविन्द के जीवन का संबल ही था आत्म निर्माण, जबकि मीरा कुमार खुद काँग्रेस की प्रतिबिंब है, वंशवाद की चापलूस और भ्रष्टाचार समर्थक।

पर जब से कोविन्द जी का नामांकन हुआ है, तब से वामपंथी प्रेमी मीडिया जैसे हफ़्फ़्पोस्ट उन्हे बेइज़्ज़त करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही रही है। उनकी योग्यता गयी तेल लेने, ऐसे लोगों के लिए वो मीरा कुमार से कम दलित जो ठहरे, क्योंकि इनके हिसाब से बीजेपी के दलित दलित थोड़ी ना होते।

पर अगर किसी भी बिरादरी का कोविन्द प्रतिनिधित्व करते हैं, तो वो है भारत के बहुमत का, जो मिट्टी से जुड़ी है, कृषि प्रधान है, और आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ है। यही वो बिरादरी है, जिससे नरेंद्र मोदी भी आते हैं।

कई लुटयेंस बुद्धिजीवियों ने इन्हे चायवाला के नाम से भी चिढ़ाया। पर इसी हफ़्फ़्पोस्ट ने फारूक अब्दुल्लाह का नाम बतौर राष्ट्रपति सुझाया। जी हाँ, वही फारूक अब्दुल्लाह, जो पत्थरबाज़ों का समर्थन करता है और भारत के विचार से कोई संबंध नहीं रखता, वो इस एजेन्सी के हिसाब से राष्ट्रपति के पद के लिए रामनाथ कोविन्द से ज़्यादा योग्य है।

यह तो साफ है की मीरा कुमार ने अपने फायदे के लिए अपने पद का खूब दुरुपयोग किया है, जबकि रामनाथ कोविन्द अपने राज्यपाल के पद के दौरान किसी प्रकार की भिड़ंत के लिए प्रख्यात नहीं थे, जिससे नितीश कुमार ने न सिर्फ उनकी तारीफ की, बल्कि उनका समर्थन भी किया, खुदा न खस्ता, अगर काँग्रेस को बहुमत मिलता है, जो इस देश की बहुत बड़ी गलती हो सकती है, तब रामनाथ कोविन्द अपना काम बिना किसी भेदभाव के करने में सक्षम होंगे।

यहाँ तक की जब इनके परिवार वालों ने सिफ़ारिशों की बात की, तो श्री कोविन्द ने कहा, ‘मैंने जैसे स्वयं सफलता पायी, वैसे तुम लोग भी मेहनत करो।“

अब और किसी प्रमाण की आवश्यकता है की रायसीना हिल्स के लिए कौन योग्य उम्मीदवार है?

Tags: मीरा कुमाररामनाथ कोविंदराष्ट्रपति उम्मीदवार
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

दीक्षांत समारोह के लिए विदेशी चोगा फेंक, भारतीय पारंपरिक परिधान में सजे इन विद्यार्थियों की छवि देखते ही बनती है

अगली पोस्ट

ये मुख्यमंत्री हिन्दुओं को एक करने की अनोखी कोशिश में लगे हैं

संबंधित पोस्ट

बांग्लादेश
चर्चित

हिंदू दीपू दास की इस्लामी भीड़ के हाथों बर्बर हत्या उस्मान हादी हत्याकांड का ‘साइड इफेक्ट’ नहीं है, ये मजहबी कट्टरता को आत्मसात कर चुके बांग्लादेश का नया सच है

20 December 2025

बांग्लादेश इस समय गहरी अस्थिरता से गुज़र रहा है। दुर्भाग्य से ये अस्थिरता सिर्फ राजनैतिक नहीं है, ये नैतिक और सामाजिक भी है। अलग भाषाई...

ऑपरेशन सिंदूर 2:0
मत

दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

21 November 2025

पाकिस्तान एक आतंकी मुल्क है और इसमें शायद ही किसी को कोई संशय हो, ख़ुद पाकिस्तान के मित्र भी न सिर्फ इसे अच्छी तरह जानते...

शशि थरूर पीएम की तारीफ कर अपनी ही पार्टी के अंदर निशाने पर आ गए हैं
चर्चित

कांग्रेस का नया नियम यही है कि चाहे कुछ भी हो जाए पीएम मोदी/बीजेपी का हर क़ीमत पर विरोध ही करना है?

21 November 2025

कांग्रेस के नेता देश ही नहीं विदेशों में भी जाकर लोकतंत्र बचाने की दुहाई देते रहते हैं। लेकिन जब बारी आंतरिक लोकतंत्र की आती है...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05

India’s Swadesi ‘Meteor’: World’s Most Lethal BVR Missile | Gandiv| SFDR | DRDO

00:06:48

Between Rafale and AMCA; Where Does the Su-57 Fit | IAF| HAL | Wings India

00:06:10
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited