TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

    ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

    Devender Mahto Ranchi student protest

    Jharkhand Student Protest: रांची में सड़कों पर छात्र, CBI जांच और JSSC CGL पर क्यों अटका पेंच?

    Gen Z voter and BJP

    क्या Gen Z बीजेपी के साथ है? धर्मेंद्र प्रधान के दावे का Election Data से समझिए सच

    बीजेपी हेडऑफिस में पार्टी के महामंत्री (संगठन) बी.एल.संतोष की अध्यक्षता में त्रिपुरा की बैठक

    मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा की टॉप लीडरशिप के साथ बीजेपी आलाकमान की बैठकों का दौर, कामकाज की समीक्षा के साथ जवाबदेही तय करने पर जोर

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    1947 to 2026 Independence Day Nehru to Modi

    Independence Day 2026: सुई बनाने से स्पेस तक, 80 साल में कितना बदला भारत?

    GOBARdhan Scheme Gas Import Bill

    GOBARdhan Scheme: ₹23,731 करोड़ की योजना से कैसे घटेगा भारत का $5 Billion गैस Import Bill?

    Bihar Liquor Ban NCAER REPORT

    Bihar Liquor Ban: बिहार को फायदा हुआ या नुकसान? NCAER रिपोर्ट ने उठाए सवाल

    Indian Economy Under Modi Govt Since 2014

    12 साल, 22 सेक्टर और एक तस्वीर: क्या भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सचमुच बदल गया?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    Chinese CCTV RISK

    CCTV के अंदर छिपा चीन का ‘सिक्योरिटी रिस्क’: ब्रिटेन में खुलासा, भारत में कितनी बड़ी चुनौती?

    Territorial Army AI Cyber Security and Direct Entry

    टेरिटोरियल आर्मी में अब AI और साइबर एक्सपर्ट्स की सीधी एंट्री? रक्षा मंत्रालय की नई योजना से बदल जाएगा TA का रोल

    म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 जून से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौर पर थे

    म्यांमार के रेयर अर्थ खनिज, भारत की रणनीति और चीन की चुनौती

    INS 'निपुण' भारतीय नौसेना का दूसरा स्वदेशी Diving Support Vessel (DSV)।

    INS निपुण: नेवी के बेड़े में शामिल होने वाला ये डाइविंग सपोर्ट वेसल इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    अमेरिका का बड़ा दावा

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    Jawaharlal Nehru

    नेहरू की वो 3 गलतियां जिन्होंने विभाजन की विभीषिका को जन्म दिया

    ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

    ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

    ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

    Devender Mahto Ranchi student protest

    Jharkhand Student Protest: रांची में सड़कों पर छात्र, CBI जांच और JSSC CGL पर क्यों अटका पेंच?

    Gen Z voter and BJP

    क्या Gen Z बीजेपी के साथ है? धर्मेंद्र प्रधान के दावे का Election Data से समझिए सच

    बीजेपी हेडऑफिस में पार्टी के महामंत्री (संगठन) बी.एल.संतोष की अध्यक्षता में त्रिपुरा की बैठक

    मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा की टॉप लीडरशिप के साथ बीजेपी आलाकमान की बैठकों का दौर, कामकाज की समीक्षा के साथ जवाबदेही तय करने पर जोर

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    1947 to 2026 Independence Day Nehru to Modi

    Independence Day 2026: सुई बनाने से स्पेस तक, 80 साल में कितना बदला भारत?

    GOBARdhan Scheme Gas Import Bill

    GOBARdhan Scheme: ₹23,731 करोड़ की योजना से कैसे घटेगा भारत का $5 Billion गैस Import Bill?

    Bihar Liquor Ban NCAER REPORT

    Bihar Liquor Ban: बिहार को फायदा हुआ या नुकसान? NCAER रिपोर्ट ने उठाए सवाल

    Indian Economy Under Modi Govt Since 2014

    12 साल, 22 सेक्टर और एक तस्वीर: क्या भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सचमुच बदल गया?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    Chinese CCTV RISK

    CCTV के अंदर छिपा चीन का ‘सिक्योरिटी रिस्क’: ब्रिटेन में खुलासा, भारत में कितनी बड़ी चुनौती?

    Territorial Army AI Cyber Security and Direct Entry

    टेरिटोरियल आर्मी में अब AI और साइबर एक्सपर्ट्स की सीधी एंट्री? रक्षा मंत्रालय की नई योजना से बदल जाएगा TA का रोल

    म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 जून से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौर पर थे

    म्यांमार के रेयर अर्थ खनिज, भारत की रणनीति और चीन की चुनौती

    INS 'निपुण' भारतीय नौसेना का दूसरा स्वदेशी Diving Support Vessel (DSV)।

    INS निपुण: नेवी के बेड़े में शामिल होने वाला ये डाइविंग सपोर्ट वेसल इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    अमेरिका का बड़ा दावा

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    Jawaharlal Nehru

    नेहरू की वो 3 गलतियां जिन्होंने विभाजन की विभीषिका को जन्म दिया

    ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

    ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

क्या गाँधी वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरा थे?

Abhishek Mishra द्वारा Abhishek Mishra
4 December 2017
in इतिहास
गाँधी-ब्रिटिश-साम्राज्य

Lord and Lady Mountbatten with Gandhi

Share on FacebookShare on X

स्कूल के दिनों में हमने भारत को आजाद कराने वाले लोगों के संघर्ष के बारे में अध्ययन करते हुए, मोहनदास करमचन्द गाँधी के गुणगानों को भी सुना और पढ़ा है। “दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल” यह गीत उनकी प्रशंसा में लिखे गए सैंकड़ो गीतों में से एक है। गाँधी एक युगपुरुष से कम नहीं थे, वे अंग्रेजों के घोर-विरोधी थे और साम्राज्यवादी ताकतों से अपने देश की स्वतंत्रता छीनने का माद्दा रखते थे। लेकिन एक सवाल यह उठता है कि अगर भारत में गाँधी वास्तव में अंग्रेजों के लिए बहुत बड़ा खतरा थे तो अंग्रेज उन्हें अपने रास्ते से हटाना क्यों नहीं चाहते थे?

अंग्रेज अपने शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए नैतिक और अनैतिक दोनों तरीकों का प्रयोग करने के लिए जाने जाते थे। अगर वास्तव में अंग्रेजों को यह लगता कि गाँधी उनके रास्ते में बाधा हैं तो वे उन्हें आसानी से मार कर इस मुद्दे को हमेशा के लिए सुलझा सकते थे और इस बात को दबाने के लिए मीडिया भी उनके नियंत्रण में थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

संबंधितपोस्ट

नेहरू की वो 3 गलतियां जिन्होंने विभाजन की विभीषिका को जन्म दिया

दांडी मार्च और वायसराय लॉर्ड इरविन को लिखा गया गांधी का वो ऐतिहासिक पत्र

वंदे मातरम् के 150 वर्ष: बंकिमचंद्र की वेदना से जनमा गीत, जिसने भारत को जगाया और मोदी युग में पुनः जीवित हुआ आत्मगौरव

और लोड करें

आइए जानने की कोशिश करें ऐसा क्यों?

अंग्रेज भारत पर लंबे समय तक शासन करना चाहते थे। यूरोपीय देशों ने लाभ पाने के उद्देश्य से विश्वभर में उपनिवेश किया था। भारत में सस्ते श्रम, सस्ते कच्चे माल और एक बड़े बाजार की सुविधा उपलब्ध थी। इसलिए हम यह मान सकते हैं कि अंग्रेजों का इरादा भारत छोड़ने का बिलकुल नहीं था, वे चाहते थे कि ज्यादा से ज्यादा दिनों तक वे भारत पर शासन करें।

अंग्रेजों ने अपने रास्ते में बाधा बन रहे ऐसे किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा, जो उनके लक्ष्यों और मंसूबों के लिए खतरा थे। ख़ास तौर पर 20वीं शताब्दी में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए, उन्होंने पक्षपाती कानून, भ्रष्ट व्यवहार और अनैतिक तरीकों का प्रयोग करके राजनैतिक हत्याएं भी कीं। ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास खून में लथपथ है। हम जानते हैं कि उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका या भारत में मूल आबादी का क्या हश्र हुआ था।

जैसा कि हमारे इतिहास की किताबें हमें बताती हैं कि भारत में गाँधी, ब्रिटिश साम्राज्य के लिए सबसे बड़ा खतरा थे।

अब इस तथ्य के आधार पर पहले दो बिंदु गलत साबित होते हैं। हम जानते हैं कि अंग्रेज भारत को छोड़ना नहीं चाहते थे और हम यह भी जानते हैं कि अंग्रेजों ने उनके रास्ते में अड़चनें पैदा कर रहे लोगों को बहुत ही आसानी से मार दिया था। लेकिन उन्होंने इसके लिए गाँधी को क्यों छोड़ दिया? जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाई और जो भारत में अंग्रेजी शासन के लिए सबसे बड़ा खतरा माने जाते थे।

इसका तार्किक स्पष्टीकरण केवल यह है कि वास्तव में गाँधी ब्रिटिश साम्राज्य के लिए कोई खतरा नहीं थे।

गाँधी को पाँच बार गिरफ्तार किया गया और उन्हें हर बार बहुत ही कम अवधि की सजा सुनाई गई थी, उनकी सबसे लंबी अवधि की सजा केवल छह साल की थी। इन पाँच बार में चार बार गाँधी जल्दी-जल्दी जेल जाते गए और अविश्वनीय रूप से पूरी सजा काटे बिना ही उन्हें रिहा कर दिया गया। जेल में समय बिताने की उनकी सबसे लंबी अवधि एक साल और दस महीने थी। कैसे अंग्रेज, उस व्यक्ति पर इतना दयावान हो सकते हैं, जिसे पूरा राष्ट्र अपनी आजादी के नायक के रूप में देखता था।

इसमें एक तर्क यह हो सकता है कि गाँधी ने कभी भी कोई कानून नहीं तोड़ा होगा, जिसके लिए उन्हें उम्र कैद या मौत की सजा सुनाई जाती। यह तर्क बिल्कुल गलत है क्योंकि गाँधी ने ऐसे कानून तोड़े थे, जिसके लिए आजीवन कारावास या मौत की सजा का प्रावधान था, लेकिन सोचनीय बात तो यह है कि उनके ऊपर ऐसे कोई आरोप कभी लगाए ही नहीं गए। उदाहरण के लिए, महामहिम (या इंग्लैंण्ड के विरुद्ध) के खिलाफ युद्ध छेड़ना एक धारा थी जो लगभग हर स्वतंत्रता सेनानी पर लगायी गयी, इसमें भगत सिंह (जिन्होंने स्वेच्छा से समर्पण किया) और सावरकर जैसे लोग भी शामिल हैं।

सावरकर, ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के संदेह में विदेश में पकड़े गए थे। हालांकि जब ये भारत से निर्वासित किए जा रहे थे तो इन्होंने भागने की कोशिश की लेकिन ये पकड़े गए और इन्हें दो जन्मों के आजीवन करावास की सजा सुनाई गई। उनके चार्जशीट में “द क्राउन के खिलाफ युद्ध छेड़ने” का उल्लेख किया गया था। उन्हें दुनिया की सबसे खराब जेल काला पानी में भेजा गया, जहाँ कैदी प्रतिदिन अपनी मौत के लिए प्रार्थना करते थे। काला पानी में ग्यारह वर्षों की सजा के बाद उन्हें इस शर्त पर छोड़ दिया गया था कि अब वह भारतीय राजनीति और क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।

गाँधी को कभी भी इन स्वतंत्रता सेनानियों की तरह सजा नहीं दी गई। बल्कि वह तय अवधि से पहले ही, बिना किसी शर्त के जेल से रिहा कर दिए जाते थे। अगर अंग्रेजों का उद्देश्य भारत न छोड़ने का था और यह भी स्पष्ट था कि गाँधी जी अहिंसक होकर लड़ रहे थे लेकिन फिर भी ये अंग्रेंजों के खिलाफ एक शक्तिशाली युद्ध था, तब भी अंग्रेजों ने कुछ क्यों नहीं किया? गाँधी के नेतृत्व वाला असहयोग आन्दोलन जो कि देशद्रोह के आरोपों का समर्थन करता था फिर भी वे सभी चुपचाप क्यों बैठे रहे और उन्होंने गाँधी द्वारा उनको बाहर क्यों निकालने दिया?

काला पानी की सजा का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्वतंत्रता सेनानियों को रोकने के लिए किया जाता था, ताकि लोग उनके बारे में भूल जाएं, क्योंकि उन्हें मारने से वे लोगों के दिलों में शहीद हो जाते थे, जिससे लोग और अधिक हिंसक हो जाते थे। लेकिन गाँधी पर कभी भी देशद्रोह का आरोप नहीं लगाया गया और न हीं उन्हें काला पानी भेजा गया।

गाँधी को एक राजनीतिक कठपुतली कहना निश्चित रूप से अनुचित होगा, लेकिन ऐसा लगता है कि अंग्रेजों ने उन्हें अपने लाभ के लिए उपयोग करने का तरीका ढूँढ़ लिया था। मुझे पूरा भरोसा है कि गाँधी जैसे चतुर, नीतिकुशल और दूरदर्शी राजनीतिज्ञ को ये ज़रूर पता चल गया होगा कि अंग्रेजी हुकूमत उनके साथ अलग सा व्यवहार कर रही है।

गाँधी ने जनता की राय को प्रभावित किया और फांसी या काला पानी के भय के बिना स्वतंत्रता संग्राम में डटकर लड़ते रहे। यह काफी उल्लेखनीय है। फिर उन्होंने एक मामूली घटना की वजह से असहयोग आंदोलन समाप्त कर दिया, जिसकी आलोचना सुभाष चंद्र बोस सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों ने की।

यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि गाँधी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों की सहायता करते थे और अफ्रीका के मूल निवासियों के स्वतंत्रता संग्राम के खिलाफ लड़े थे। उन्होंने भारतीय सैनिको को विश्व युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। इतिहासकारों ने हमेशा यह बताने असहजता महसूस की  है कि शांति और अहिंसा के दूत ब्रिटिश सेना के लिए भर्ती क्यों कर रहे थे?

क्या गाँधी एक अवसरवादी नेता हो सकते हैं जिनको अंग्रेजों से मदद मिली? 1920 के दशक के दौरान जब गाँधी से इस बारे में पूछा गया तो गाँधी ने विपरीत प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्हें अंग्रेज शासित भारत के द्वारा केसर-ए-हिंद पदक से सम्मानित किया गया था। एक तरफ उन्होंने सत्याग्रह आंदोलन किया वहीँ दूसरी ओर और अंग्रेजों के लिए लड़ने के लिए लोगों की भर्ती की (1917-1919)। हमें यह याद रखना चाहिए कि अंग्रेजों ने भारतीय लोगों को सबसे खराब मोर्चे पर भेज दिया था, जहाँ मरने की संभावना बहुत अधिक थी। ज़ाहिर सी बात है कि वे अंग्रेजों को पहले नहीं मरने दे सकते थे!

अंग्रेज हमेशा अपने अधीन किसी राज्य में होने वाले हिंसक विद्रोह के भय में जीवन व्यतीत करते थे। अमेरिका अंग्रेजों की अधीनता से एक हिंसक संघर्ष के माध्यम से १७७६ में आजाद हुआ था। १८५७ का स्वतंत्रता संग्राम भी एक इसी तरह का एक विद्रोह था, अंग्रेजों ने अपना भविष्य देख लिया कि यदि अगर अगला ऐसा ही कोई भीषण आंदोलन हुआ तो वह भारत में और अधिक टिक नहीं पाएंगे। ऐसे में उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता थी जो जनता की विचारधारा को बदलकर उनके गुस्से को भटका कर उनका नेतृत्व करे और उनको अहिंसा के रास्ते पर ले जा सके।

हिंसक संघर्ष का मतलब था कि ब्रिटिश राज एक ही महीने के अन्दर साफ़ हो जाता। क्रन्तिकारी यही करना चाहते थे लेकिन गाँधी द्वारा युवाओं को क्रांतिकारियों का अनुसरण न करने के लिए प्रेरित करके उन्हें लगातार कमजोर करने का प्रयास किया गया। इसके लिए गाँधी ने अंग्रेजो के हिंसक अत्याचारों पे बहुत कम बोला लेकिन क्रांतिकारियों के हिंसक संघर्ष पे बोलने के लिए उनके पास बहुत कुछ था।

ये बिल्कुल स्पष्ट था कि अंग्रेज़ चाहते थे कि गाँधी जहाँ तक संभव हो सके, भारतीयों को शांत रखें। जिससे कि आज़ादी को जितने लम्बे समय तक संभव हो, टाला जा सके। गाँधी के उपवासों ने अंग्रेजों पे असर डाला, इसलिए नहीं कि अंग्रेजों को गाँधी की मौत का डर था बल्कि इसलिए कि गाँधी की मौत के बाद भारत में हिंसक संघर्ष शुरू हो जायेगा। स्वयं गाँधी भी इस बात से भलीभांति परिचित थे कि काफी हद तक उन्होंने अपना ये ढोंग कायम भी इसीलिए रखा था। वास्तव में गाँधी का उपवास, हिंसा की एक धमकी थी। उनके समर्थकों द्वारा ये तर्क दिया गया की सशस्त्र संघर्ष से आज़ादी तो मिल जाएगी लेकिन लोकतंत्र बहाल नहीं हो पायेगा और एकता का भी अभाव रहेगा। अमेरिका भी एक हिंसक संघर्ष के बाद पचास राज्यों के संयुक्त देश लोकतंत्र के रूप में स्थापित हुआ।

अंग्रेज़ गाँधी को जिस जगह देखना चाहते थे गाँधी ठीक वहीं पर थे। उन्होंने जानबूझकर या अनजाने में जो कुछ भी किया उससे ब्रिटिश राज को यहाँ बने रहने में मदद मिली। अंग्रेजों को, गाँधी पर राज द्रोह लगाकर कालापानी जेल भेजने, फांसी देने, या उन्हें गुप्त तरीके से मार देने की भी आवश्यकता नहीं थी। उनकी हत्या या फांसी देश को संघर्ष की तरफ धकेल सकती था लेकिन उन्हें कालापानी जेल भेजने से ऐसा कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता, फिर भी अंग्रेजों ने ऐसा नहीं किया। हमें जिस व्यक्ति के बारे में ये पढाया गया कि उन्होंने विश्व के सबसे बड़े साम्राज्य को घुटनों टेकने को मजबूर कर दिया, वो अंग्रेजों के लिए संभवतः कोई खतरा थे ही नहीं। जो लोग वास्तव में उनके लिए खतरा थे उन्हें या तो फांसी दी गयी, गोली मारी गयी, गुप्त तरीके से हत्या कर दी गयी या बहुत लम्बे समय के लिए कारावास की सजा के लिए भेज दिया गया।

एक वकील होने के नाते गाँधी ब्रिटिश कानूनों और नौकरशाही को लगभग सभी भारतीयों से बेहतर समझते थे, जिसे उन्होंने निश्चित तौर पर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया। आमजनता में गाँधी वो गाँधी हैं ही नहीं जिन्हें हम लोगों ने जाना और पढ़ा है। उनकी कहानी को उन लोगों ने बदल दिया जो लोग स्वतंत्रता के बाद सत्ता में आये। इतिहास विजेताओं द्वारा लिखा गया है। उनकी गलतियों की अनदेखी की गई, उनके अतीत को मिटा दिया गया, उनके पाखंड को इतिहास से हटा दिया गया और गाँधी को भारत का राष्ट्रपिता घोषित कर दिया गया। इसका एक उदाहरण है “गाँधी” फिल्म का बनना, जिसे भारतीय राजकोष द्वारा एक तिहाई वित्त पोषित किया गया था। इंदिरा गाँधी और कांग्रेस के प्रमुखतम व्यक्ति इस फिल्म के प्रोडक्शन से पहले के प्रमुख बिन्दुओं के निर्धारण के समय मौजूद थे। कथानक उन्होंने चुना था इसलिए दुनिया ने सिर्फ वही जाना जिसे वे चाहते थे कि दुनिया जाने।

अतः क्या गाँधी वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरा थे? क्या उन्होंने वास्तव में हमें आजादी दिलवाई जैसा कि हमारी पाठ्यपुस्तकों में दावा किया जाता है? क्या उन्होंने अंग्रेजों की सहायता की थी जिसकी वज़ह से अंग्रेज़ उनको नहीं हटा सके? इस निबंध को पढने के बाद आपकी ये जिम्मेदारी बनती है कि आप भी सब कुछ समझने के बाद उत्तर ढूंढें कि क्या गाँधी हमारे लिए खड़े थे या नहीं खड़े थे। आगे और भी सवाल पूछना न भूलें।

Tags: गाँधीब्रिटिश साम्राज्यमहात्मा गाँधी
शेयर908ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

हम्मीर सिंह सिसोदिया: वह राजपूत योद्धा जिसने समूचे राजपुताना के गौरव को पुनर्स्थापित किया

अगली पोस्ट

सैनिटरी नैपकिन पर 12% जीएसटी के पीछे का गणित

संबंधित पोस्ट

‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?
इतिहास

‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ : भारत में कई ‘मिनी पाकिस्तान’ पैदा हो चुके हैं ?

14 August 2026

वर्ष 2021 में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अगस्त को 'विभाजन की विभीषका स्मृति दिवस' (Partition Horrors Remembrance Day) के रूप में मनाने...

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है
इतिहास

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

14 August 2026

15 अगस्त का दिन कहता आजादी अभी अधूरी है  सपने सच होने बाकी है रावी की शपथ ना पूरी है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई द्वारा 15 अगस्त 1947 के दिन लिखी गई यह कविता है जिसमें बताया गया है कि 31 दिसंबर 1929 को रावी नदी के तट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारतीय तिरंगा झंडा फहरा कर पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। एवं आगामी 26 जनवरी को देश भर मे  शपथ के कार्यक्रम का आयोजन का निर्णय किया था। उस समय अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू और इस प्रस्ताव का समर्थन महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया,...

दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों
इतिहास

दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

7 July 2026

कहते हैं संयोग और चमत्कार इस दुनिया में होते हैं। कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी घटित हुआ। एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक के अनुवाद कार्य में...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

RAW Chief’s Dhaka Visit: Is India Rebuilding Security Ties With Bangladesh? Reset or Routine?

RAW Chief’s Dhaka Visit: Is India Rebuilding Security Ties With Bangladesh? Reset or Routine?

00:03:30

Kargil From the Sky: Inside IAF’s Operation Safed Sagar

00:05:36

India Eyes Sixth-Generation Fighters: Why FCAS Matters Beyond AMCA

00:05:03

Beyond S-400: Why India's Indigenous Kusha Missile Could Change Air Defence

00:03:42

Rigvedic Names in Denmark? Nick Collins on India’s Forgotten Links With Europe

00:32:39
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited