TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    रेल मंत्रालय की मंथन योजना शताब्दी एक्सप्रेस की जगह वंदे भारत चेयर कार

    शताब्दी एक्सप्रेस को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी, वंदे भारत चेयर कार कोचों का बड़ा प्लान

    कोलकाता में IPAC प्रमुख के आवास पर ईडी की कार्रवाई के दौरान बढ़ा राजनीतिक तनाव

    IPAC प्रमुख पर ईडी की कार्रवाई से सियासी भूचाल, लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर उठे सवाल

    पीएम मोदी बोले– विध्वंस नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

    सोमनाथ 1000 वर्ष: मोदी ने कहा– आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    टैरिफ विवाद ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर बहस तेज की

    ट्रंप की 500% टैरिफ चेतावनी: भारत के लिए आर्थिक और कूटनीतिक चुनौती

    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    अमेरिका में कानून का राज कमजोर पड़ रहा

    क्या अमेरिका में कानून का राज कमजोर पड़ रहा है? मिनियापोलिस ICE गोलीबारी से उठते सवाल

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    रेल मंत्रालय की मंथन योजना शताब्दी एक्सप्रेस की जगह वंदे भारत चेयर कार

    शताब्दी एक्सप्रेस को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी, वंदे भारत चेयर कार कोचों का बड़ा प्लान

    कोलकाता में IPAC प्रमुख के आवास पर ईडी की कार्रवाई के दौरान बढ़ा राजनीतिक तनाव

    IPAC प्रमुख पर ईडी की कार्रवाई से सियासी भूचाल, लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर उठे सवाल

    पीएम मोदी बोले– विध्वंस नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

    सोमनाथ 1000 वर्ष: मोदी ने कहा– आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    टैरिफ विवाद ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर बहस तेज की

    ट्रंप की 500% टैरिफ चेतावनी: भारत के लिए आर्थिक और कूटनीतिक चुनौती

    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    अमेरिका में कानून का राज कमजोर पड़ रहा

    क्या अमेरिका में कानून का राज कमजोर पड़ रहा है? मिनियापोलिस ICE गोलीबारी से उठते सवाल

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

महान बल्लेबाज़ लेकिन औसत कप्तान- समय आ गया है कि विराट बेहतर कप्तान के लिए जगह खाली करें

TFI Desk द्वारा TFI Desk
16 July 2019
in मत
कप्तान विराट कोहली

PC: deccanchronicle

Share on FacebookShare on X

2019 के आईसीसी क्रिकेट विश्व कप में भारत का सफर सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड के हाथों 18 रनों की हार के साथ खत्म हो गया।  जहां, कई प्रशंसक सेमीफ़ाइनल में भारतीय टीम के उच्च क्रम के लचर प्रदर्शन से काफी निराश थे, तो वहीं कुछ लोगों ने इसके लिए टीम प्रबंधन और वर्तमान कोच रवि शास्त्री को दोषी ठहराया।

अब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो विराट कोहली के हाथ से कप्तानी छिन सकती है। पर आखिर ये नौबत ही क्यों आई ही क्यों? क्या विराट कोहली अन्य भारतीय कप्तानों की तुलना में असफल सिद्ध हुये हैं? इस प्रश्न के उत्तर के लिए आइये हम एक नजर डालते हैं भारतीय कप्तानों के कार्यकाल और उनके स्वभाव पर। इसके लिए हमें जाना होगा 1980 के दशक में, जहां 1987 के विश्व कप में सेमीफ़ाइनल में हारने पर भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर कपिल देव को कप्तानी से हाथ धोना पड़ा था। कपिल देव के कप्तानी से हटने के बाद मानो भारतीय टीम में कुशल नेतृत्व का अकाल पड़ गया था, जिसे कार्यवाहक कप्तान के रूप में रवि शास्त्री और कृष्णमचारी श्रीकांत पूरा नहीं कर पाये थे।

संबंधितपोस्ट

‘कोहली का वीडियो…RCB की ज़िद’: बेंगलुरु भगदड़ मामले में कर्नाटक सरकार ने टीम को ठहराया ज़िम्मेदार

RCB के जश्न में हुई भगदड़ में 11 लोगों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

IPL फाइनल से पहले मुश्किल में कोहली, पुलिस ने पब पर दर्ज की FIR; लगे ये आरोप

और लोड करें

उस समय बीसीसीआई ने प्रचलित बल्लेबाज़ मुहम्मद अजहरुद्दीन को भारतीय टीम की कमान सौंपी। हालांकि 1991 – 2000 के कार्यकाल में मुहम्मद अजहरुद्दीन के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट ने अपना सबसे खराब दौर देखा। गुटबाजी हो, या वंशवाद, या फिर फिक्सिंग कल्चर को ही बढ़ावा देना क्यों न हो, अजहरुद्दीन के कार्यकाल में क्रिकेट को छोड़कर सब देखने को मिला। इसके लिए काफी हद तक स्वयं अजहरुद्दीन भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार थे, क्योंकि उन्होंने भारतीय क्रिकेट की डूबती नैया को पार लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

मुहम्मद अजहरुद्दीन के हटाये जाने पर कुछ समय के लिए सचिन तेंदुलकर को कप्तान बनाया गया, पर वो एक अच्छे बल्लेबाज़ थे, कुशल कप्तान नहीं। वर्ष 2000 के मैच फिक्सिंग स्कैंडल में जब मोहम्मद अजहरुद्दीन सहित कई भारतीय और अन्य देशों के क्रिकेटरों को दोषी ठहराया गया, और उनपर कार्रवाई की गयी, तब भारतीय क्रिकेट टीम के क्रिकेटर और कुशल कप्तान, दोनों पर से विश्वास उठ गया था। इसके बाद खुद सचिन तेंदुलकर ने खुद ही कप्तानी छोड़ दी क्योंकि उन्हें भी इस बात का एहसास था कि वो एक बेहतर बल्लेबाज हैं परन्तु एक बेहतर कप्तान नहीं. इसीलिए उन्होंने भारतीय टीम की बेहतरी के लिए कप्तानी छोड़ दी. उस समय भारतीय टीम बुरे दौर से गुजर रही थी ।

लेकिन वो कहते हैं न, विपत्ति में ही असली नेतृत्व की पहचान होती है। इसी परिप्रेक्ष्य में 2001 में सामने आये कोलकाता से युवा बल्लेबाज़ सौरव चंडीदास गांगुली, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट और कप्तानी, दोनों के ही मायने बदल दिये। जो भारतीय क्रिकेट टीम मैच बचाने के लिए खेलती थी, उसे सौरव गांगुली ने न केवल मैच, बल्कि सीरीज जीतना भी सिखाया।

सौरव गांगुली के नेतृत्व का ही कमाल था, कि फॉलो-ऑन जैसे विकट परिस्थिति में आने के बाद भी भारतीय टीम ने न केवल ऑस्ट्रेलिया की उस समय की बेहद मजबूत टीम के विरुद्ध टेस्ट मैच जीता, बल्कि आगे चलकर उन्होंने इसी सीरीज़ को जीतते हुए कई सीरिज से चल रहे ऑस्ट्रेलिया विजय रथ को भी रोक दिया। इसी तरह 2002 के नेटवेस्ट सीरीज की ऐतिहासिक विजय से सौरव गांगुली ने सिद्ध कर दिया कि कप्तान किसे कहते हैं।

सौरव गांगुली ने कई अभूतपूर्व क्रिकेटरों के उत्थान में बतौर भारतीय कप्तान अपना अहम योगदान दिया, उनकी टीम में वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, युवराज सिंह, ज़हीर खान इत्यादि जैसे क्रिकेटर शामिल थे। इस दौरान सौरव गांगुली ने महेंद्र सिंह धोनी को उनके प्रदर्शन के लिए काफी बढ़ावा भी दिया । सौरव गांगुली को कोच ग्रेग चैपल से अनबन के बाद 2005 में कप्तानी से हाथ धोना पड़ा था।

सौरव गांगुली की कप्तानी से हटने के बाद राहुल द्रविड़ को कार्यभार सौंपा गया। परंतु उनका कार्यकाल औसत ही रहा। राहुल के बाद अनिल कुंबले को कुछ समय के लिए टीम की कमान सौंपी गयी। लेकिन दुर्भाग्यवश उनके कप्तानी के महत्व को कमतर आंका गया। जब 2007 में भारत विश्व कप हार गया था तब कुंबले ने ही अपने नेतृत्व से भारतीय टीम के गिरते मनोबल को ऊपर उठाया था।

अनिल कुंबले ने 2008 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया इसके बाद भारतीय टीम का सारा दारोमदार अब महेंद्र सिंह धोनी के कंधों पर आ पड़ा। सच कहें तो सौरव गांगुली के अधूरे सपनों को महेंद्र सिंह धोनी ने पूरा किया, और भारतीय टीम को मजबूती देने में इनकी भूमिका सबसे अहम रही है। सौरव ने भारत को मैच जीतना सिखाया, परंतु एमएस धोनी ने भारत को विश्व क्रिकेट में अपना सिक्का जमाने के लिए प्रोत्साहित किया।

चाहे टी20 विश्व कप दिलाना हो, या फिर आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप का तमगा दिलाना हो, या 2011 में अपने ही देश में भारत को आईसीसी विश्व कप दिलाना हो, या फिर 2013 की आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफी जितानी हो, महेंद्र सिंह धोनी के कुशल नेतृत्व में भारतीय टीम ने अपने आप को किसी भी स्थिति में लड़ने के लिए तैयार टीम में पूरी तरह परिवर्तित किया। सही मायनों में सौरव गांगुली द्वारा स्थापित की गयी इंडियन क्रिकेट की नींव पर महेंद्र सिंह धोनी ने सफलता के नए आयाम लिखे।

अब सवाल ये है कि विराट कोहली को कप्तान क्यों और कैसे बनाया गया ? दरअसल, 2016 में महेंद्र सिंह धोनी कप्तानी से हटना चाहते थे, और तब लगभग सभी अनुभवी खिलाड़ी सन्यास ले चुके थे और उनके अलावा कोई उचित विकल्प नहीं था। रोहित शर्मा भी तब फॉर्म में नहीं थे। ऐसे में विराट कोहली ही उचित विकल्प बच रहे थे। चूंकि विराट के नेतृत्व में भारत ने 8 वर्ष बाद अंडर 19 विश्व कप पर कब्जा जमाया था, और बल्लेबाज़ी के मामले में उन्हे ‘सचिन तेंदुलकर के उत्तराधिकारी’ के तौर पर देखा जा रहा था, इसलिए उन्हें भारतीय टीम की कमान सौंपी गयी।

लेकिन एक अच्छे बल्लेबाज़ होने और एक कुशल कप्तान होने में ज़मीन आसमान का अंतर होता है। कप्तान बनने के बाद शुरुआत के कई मैचों में विराट कोहली काफी असहज लग रहे थे। कई अहम निर्णयों के लिए वे तब भी एमएस धोनी की ओर ताक रहे थे। यहीं से विराट कोहली की कप्तानी पर लोगों को संदेह होना प्रारम्भ हुआ जो अनिल कुंबले के कोच पद से हटाये जाने पर और भी प्रबल हो गया। अनिल कुंबले अनुशासन भरे माहौल में विश्वास रखते थे, और विराट कोहली को उनका सख्त रवैया बिलकुल भी पसंद नहीं था, जिसके कारण इन दोनों में कई बार तनातनी भी हुई।

जब 2017 के आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफी के फ़ाइनल में भारत को पाकिस्तान के हाथों शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा,  इसी कारण अनिल कुंबले को विराट कोहली के अनुरोध के बाद कोच पद से हटाकर रवि शास्त्री को कोच नियुक्त किया गया। लेकिन जबसे भारत को सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड से पराजय झेलनी पड़ी, तभी से विराट कोहली की कप्तानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, और साथ ही साथ ये मांग भी उठ रही है कि रवि शास्त्री को भी कोच पद से हटाया जाये।

हाल के समय में ये आरोप लगाए गए हैं कि विराट कोहली अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को योग्य खिलाड़ियों की तुलना में ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, जिसके कारण टीम के प्रदर्शन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इनमें प्रमुख नाम है युजवेंद्र चहल, के लोकेश राहुल, मयंक अग्रवाल इत्यादि। कुछ लोगों के अनुसार भारतीय टीम की कमजोरी उनकी बेंच स्ट्रेंथ में परिपक्वता की कमी रही है, परंतु इस बार ऐसी कोई समस्या नहीं थी। तो ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि विराट कोहली को अयोग्य खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की क्या आवश्यकता आन पड़ी?

इस पर भी युजवेंद्र चहल को विश्व कप में उनके निरंतर असफल प्रदर्शन के बाद भी चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव के ऊपर प्राथमिकता दी गयी, जिसका विश्व कप में युजवेंद्र चहल के मुक़ाबले रन बचाने के मामले में काफी बेहतर प्रदर्शन रहा था। इसी तरह शिखर धवन के असामयिक रूप से घायल होने के बाद उनकी जगह पर अंबाती रायुडु अथवा अजिंक्य रहाणे को भी बुलाया जा सकता था, परंतु इन दोनों की जगह के एल राहुल को बुलाया गया।

पूरे लीग मैच में ख़ास प्रदर्शन न करने के बावजूद के एल राहुल पर विश्वास किया गया, और सेमीफ़ाइनल में जब उनकी आवश्यकता पड़ी, तो के एल राहुल फुस्स पड़ गए। यदि बेंच स्ट्रेन्थ मजबूत है, तो उनका प्रयोग न करके आउट ऑफ फॉर्म चल रहे खिलाड़ियों पर अनावश्यक विश्वास जताना कहाँ की समझदारी है? विराट कोहली पर ये आरोप भी लगाया गया है कि वे वनडे क्रिकेट से ज़्यादा लीग क्रिकेट को प्राथमिकता देते हैं।

यही नहीं, जब नॉकआउट मैचों में दबाव में प्रदर्शन करने की बात आती है, तो सौरव गांगुली और एमएस धोनी के मुक़ाबले विराट कोहली काफी असफल साबित हुए हैं। सौरव गांगुली के अंतर्गत भारत ने कई अहम टूर्नामेंट में निरंतर दबाव में भी मुक़ाबले जीते हैं, और एमएस धोनी के नेतृत्व में आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफी 2013 के फ़ाइनल में तनावपूर्ण स्थिति में होने के बावजूद भारत ने इंग्लैंड को 5 रन से हराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था।

पर ये इसलिए संभव हुआ क्योंकि सौरव और धोनी के नेतृत्व में भारत का यदि एक क्रम असफल होता था, तो बाकी दो क्रम उसकी कमी को पूरा कर देते थे। परंतु नॉकआउट मैचों में विराट कोहली की टीम में सारी ज़िम्मेदारी पहले की भारतीय टीम की तरह एक बार फिर उच्च क्रम पर ही निर्भर होती है, जिसके कारण बाकी दो क्रमों की देख रेख करने में किसी ने ध्यान नहीं दिया।

शायद यही कारण है कि अजेय टीम कहलाने के बावजूद भारतीय टीम आईसीसी के बड़े-बड़े टूर्नामेंटों में अहम पड़ावों पर मात खा जाती है, जिसके पीछे कई लोग विराट कोहली के नेतृत्व में परिपक्वता की कमी को प्रमुख कारण बता रहे हैं।

सच पूछें तो विराट कोहली में बतौर कप्तान न सौरव गांगुली जैसी परिपक्वता है, और न ही महेंद्र सिंह धोनी जैसा संयम। ऐसे में वर्तमान स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स भारत के आईसीसी विश्व कप के प्रदर्शन की समीक्षा करेगी, और साथ ही साथ कप्तान कोहली और मुख्य कोच रवि शास्त्री को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अब देखना यह है कि यह कमेटी दोनों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करती है।

Tags: भारतीय क्रिकेट टीमराहुल द्रविड़रोहित शर्माविराट कोहलीसचिन तेंदुलकरसौरव गांगुली
शेयर762ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

47 की उम्र में बेरोजगार, कैसे बरखा दत्त ने दो साल में अपने करियर का किया बेड़ा गर्क

अगली पोस्ट

तापसी पन्नू ने खुशी परिहार की हत्या पर तंज़ कसते हुए उड़ाया मज़ाक

संबंधित पोस्ट

बांग्लादेश
चर्चित

हिंदू दीपू दास की इस्लामी भीड़ के हाथों बर्बर हत्या उस्मान हादी हत्याकांड का ‘साइड इफेक्ट’ नहीं है, ये मजहबी कट्टरता को आत्मसात कर चुके बांग्लादेश का नया सच है

20 December 2025

बांग्लादेश इस समय गहरी अस्थिरता से गुज़र रहा है। दुर्भाग्य से ये अस्थिरता सिर्फ राजनैतिक नहीं है, ये नैतिक और सामाजिक भी है। अलग भाषाई...

ऑपरेशन सिंदूर 2:0
मत

दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

21 November 2025

पाकिस्तान एक आतंकी मुल्क है और इसमें शायद ही किसी को कोई संशय हो, ख़ुद पाकिस्तान के मित्र भी न सिर्फ इसे अच्छी तरह जानते...

शशि थरूर पीएम की तारीफ कर अपनी ही पार्टी के अंदर निशाने पर आ गए हैं
चर्चित

कांग्रेस का नया नियम यही है कि चाहे कुछ भी हो जाए पीएम मोदी/बीजेपी का हर क़ीमत पर विरोध ही करना है?

21 November 2025

कांग्रेस के नेता देश ही नहीं विदेशों में भी जाकर लोकतंत्र बचाने की दुहाई देते रहते हैं। लेकिन जब बारी आंतरिक लोकतंत्र की आती है...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58

A War Won From Above: The Air Campaign That Changed South Asia Forever

00:07:37

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

00:06:59

Dhurandar: When a Film’s Reality Shakes the Left’s Comfortable Myths

00:06:56
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited