फ्रांस ने फिर से साबित कर दिया है कि वह भारत का सच्चा दोस्त है

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PC: Indian Embassy

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए अभी फ्रांस के दौरे पर हैं जहां उन्होंने द्विपक्षीय मुद्दों पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के साथ करीब डेढ़ घंटे बात की। पीएम मोदी की यह फ्रांस यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वक्त पाकिस्तान पूरी दुनिया में कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की कोशिश कर रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी बारबार कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने की बात कर रहे हैं। हालांकि, भारत यह पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला है और इसे भारत और पाकिस्तान ही मिलकर सुलझाएँगे। अब पीएम मोदी की यात्रा के दौरान ही फ्रांस ने भी भारत के इस रुख का समर्थन किया है। फ्रांस ने भारत का पक्ष लेते हुए कहा है कि कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे देश को बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

इससे पहले जब चीन के कहने पर यूएन के सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दे पर एक अनौपचारिक मुलाक़ात हुई थी, तब भी फ्रांस ने भारत का एकतरफा समर्थन किया था। यानी फ्रांस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुलकर भारत का समर्थन करता आया है और कश्मीर मुद्दे पर भी उसने ठीक ऐसा ही किया है। फ्रांस और भारत के द्विपक्षीय संबंध बहुत गहरे हैं और फ्रांस भारत का एक बड़ा सुरक्षा साझेदार है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 36 राफेल विमान के लिए भारत सरकार पहले ही फ्रांस सरकार के साथ डील कर चुकी है। इसके अलावा जैतपुर परमाणु ऊर्जा प्रॉजेक्ट पर भी दोनों देश साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारत और फ्रांस साथ मिलकर इंटरनेशनल सोलर अलायंस का भी गठन कर चुके हैं और दुनिया के 60 से ज़्यादा देश इस अलायंस का हिस्सा बनने को तैयार हो चुके हैं। इस अलायंस का मकसद दुनियाभर में सोलर पावर के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

सिर्फ सुरक्षा स्तर पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी फ्रांस भारत सरकार के साथ काफी हद तक सहायोग करता रहा है। पिछले वर्ष जुलाई में जब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद में खड़े होकर राफेल डील पर एक भ्रामक बयान दिया था, तो फ्रांस सरकार ने उसका भंडाफोड़ करने में ज़रा भी देर नहीं लगाई थी। राहुल गांधी ने तब कहा था,रक्षा मंत्री ने कहा कि राफेल डील पर फ्रांस के साथ एक गोपनीय संधि हुई है। इस बारे में जानने के लिए मैं फ्रांस के राष्ट्रपति से व्यक्तिगत रूप से मिला और पूछा कि क्या ऐसी कोई संधि हुई है। इस पर राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी कोई संधि नहीं हुई है।इसके बाद फ्रांस की सरकार ने राहुल गांधी के राफेल डील पर दिए गए बयान को तुरंत खारिज कर दिया। फ्रांस सरकार ने साफ किया था कि राफेल डील एक गोपनीय प्रक्रिया के तहत हुई है जिसे सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

भारत और फ्रांस का सहयोग कोई नई बात नहीं है बल्कि फ्रांस दशकों से हमारा का एक साथी देश रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान जब भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था, तो अमेरिका ने भारत को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बाद यूरोपियन यूनियन द्वारा भी भारत को ब्लैकलिस्ट किए जाने की मांगे उठाई जा रही थी। उस वक्त फ्रांस ने खुलकर हमारे देश का समर्थन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि अगर कोई भी देश इंडिया को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव लेकर आता है तो वह उसपर वीटो कर देगा। इसके अलावा NSG यानि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में सदस्यता के लिए भारत का साथ देना हो, या यूएनएससी में स्थायी सीट के लिए हमारे देश की लोब्बिंग करनी हो, फ्रांस ने हर बार हमारे देश का ही समर्थन किया है।

भारत और फ्रांस 1998 से रणनीतिक साझेदार हैं और दोनों देशों के बीच व्यापक और बहुआयामी संबंध हैं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, साइबर, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत सहयोग है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और भारत के पीएम मोदी अच्छे दोस्त भी हैं और उम्मीद है कि भविष्य में दोनों देशों के रिश्ते और मज़बूत होंगे।

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