TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    ‘जाति’ कार्ड खेलने में माहिर हो चुके राहुल गांधी

    DU एंट्रेंस में कांग्रेस का ‘जाति’ कार्ड और बिहार में ‘राजपूत’ लड़की की गैंगरेप के बाद हत्या: क्या राहुल सारण में मृतका के घर जा कर इंसाफ़ मांगेंगे?

    पीएम किसान योजना

    पीएम किसान योजना: आज जारी होगी 22वीं किस्त, किसानों के खाते में ₹18,640 करोड़ ट्रांसफर

    सीएम योगी का ईधन पर बयान

    सीएम योगी का बयान- यूपी में नहीं है ईधन की कमी अफवाहों पर ना दें ध्यान

    नूंह में एटीएम लुटेरे को छुड़ाने की कोशिश

    नूंह में एटीएम लुटेरे को छुड़ाने की कोशिश, भीड़ और पुलिस में हिंसक झड़प

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी

    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी, रसोई गैस महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर

    Visakhapatnam Port Authority को मिलेंगे नए 60 टन बीपी टग

    Visakhapatnam Port Authority को मिलेंगे नए 60 टन बीपी टग, बंदरगाह संचालन होगा और सुरक्षित व तेज

    सनातन दृष्टि से ए.आई.

    भारतीय सनातन दृष्टि से ए.आई. समिट की सार्थकता

    भारत में एआई की नई शुरुआत

    भारत में एआई की नई शुरुआत: अपने मॉडल्स से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    Indian navy in hormuz and trump

    होर्मुज़ संकट: इधर ट्रम्प चीन से मदद मांग रहे हैं, उधर इंडियन नेवी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ को साथ लेकर भारत लौट रही है

    भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

    नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

    सुखोई-30 विमान दुर्घटना

    सुखोई-30 विमान हादसा: स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद

    रूस से 5 और S-400 खरीदने को वायु सेना को मिली हरी झंडी

    रूस से 5 और S-400 खरीदने को वायु सेना को मिली हरी झंडी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत को मिली अहम ऊर्जा राहत,

    ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य से LPG और तेल टैंकरों को दी अनुमति, भारत को मिली अहम ऊर्जा राहत

    रूसी तेल पर अमेरिका की नीति पर ईरान का हमला

    रूसी तेल पर अमेरिका की नीति पर ईरान का हमला: प्रतिबंधों और छूट में दिखा दोहरा रवैया

    ईरान और अमेरिका के लड़ाई में अब तक हुए इतने खर्चें

    ईरान युद्ध में अमेरिका का खर्चा भारी, 13 दिनों में लगभग 26 अरब डॉलर खर्च

    हॉर्मुज स्ट्रेट बहाल करवाने में ट्रम्प की नाकामी ने खाड़ी देशों के उन पर भरोसे को लगभग खत्म कर दिया

    ईरानी मिसाइलों का असर: हमले के लिए US को अपनी ज़मीन और हवाई क्षेत्र नहीं देगा UAE, लेकिन अब ट्रम्प क्या करेंगे ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तालिबान द्वारा मूर्तियों के विनाश के समय

    आज से ही के दिन तालिबान ने तोड़ी थीं बुद्ध की 2 हजार वर्ष पुरानी प्रतिमाएं, लेकिन भीम-मीम एकता के अनुयायी इस कृत्य पर 25 वर्ष बाद भी कुछ लिख बोल नहीं सकते

    मुंबई धमाकों ने शहर की सुरक्षा को चुनौती दी

    मार्च 1993 के मुंबई धमाकों ने शहर की सुरक्षा को चुनौती दी और नई व्यवस्थाएँ तैयार कीं

    4 मई को गांधी को उनकी कुटिया से सोते समय गिरफ्तार कर लिया गया था

    दांडी मार्च और वायसराय लॉर्ड इरविन को लिखा गया गांधी का वो ऐतिहासिक पत्र

    पाश्चात्य सभ्यता में महिलाओं को कमतर आँकने के विचार को एक सिद्धान्त ने और पुष्ट किया कि उनमें आत्मा नहीं पायी जाती है।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: नारी सशक्तिकरण और पाश्चात्य Vs वैदिक दर्शन, क्या वैदिक काल में महिलाओं को प्राप्त अधिकारों का स्तर हासिल कर सके हैं पश्चिमी देश?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    How India’s Growing Internet User Base Is Driving New Digital Entertainment Platforms

    How India’s Growing Internet User Base Is Driving New Digital Entertainment Platforms

    CroreBet India Review 2026: Sports Betting, Casino Games & Bonuses Explained

    CroreBet India Review 2026: Sports Betting, Casino Games & Bonuses Explained

    Top Bonus Rounds in Ice Fishing Game Review: What Indian Players Love Most

    Top Bonus Rounds in Ice Fishing Game Review: What Indian Players Love Most

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    ‘जाति’ कार्ड खेलने में माहिर हो चुके राहुल गांधी

    DU एंट्रेंस में कांग्रेस का ‘जाति’ कार्ड और बिहार में ‘राजपूत’ लड़की की गैंगरेप के बाद हत्या: क्या राहुल सारण में मृतका के घर जा कर इंसाफ़ मांगेंगे?

    पीएम किसान योजना

    पीएम किसान योजना: आज जारी होगी 22वीं किस्त, किसानों के खाते में ₹18,640 करोड़ ट्रांसफर

    सीएम योगी का ईधन पर बयान

    सीएम योगी का बयान- यूपी में नहीं है ईधन की कमी अफवाहों पर ना दें ध्यान

    नूंह में एटीएम लुटेरे को छुड़ाने की कोशिश

    नूंह में एटीएम लुटेरे को छुड़ाने की कोशिश, भीड़ और पुलिस में हिंसक झड़प

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी

    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी, रसोई गैस महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर

    Visakhapatnam Port Authority को मिलेंगे नए 60 टन बीपी टग

    Visakhapatnam Port Authority को मिलेंगे नए 60 टन बीपी टग, बंदरगाह संचालन होगा और सुरक्षित व तेज

    सनातन दृष्टि से ए.आई.

    भारतीय सनातन दृष्टि से ए.आई. समिट की सार्थकता

    भारत में एआई की नई शुरुआत

    भारत में एआई की नई शुरुआत: अपने मॉडल्स से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    Indian navy in hormuz and trump

    होर्मुज़ संकट: इधर ट्रम्प चीन से मदद मांग रहे हैं, उधर इंडियन नेवी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ को साथ लेकर भारत लौट रही है

    भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

    नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

    सुखोई-30 विमान दुर्घटना

    सुखोई-30 विमान हादसा: स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद

    रूस से 5 और S-400 खरीदने को वायु सेना को मिली हरी झंडी

    रूस से 5 और S-400 खरीदने को वायु सेना को मिली हरी झंडी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत को मिली अहम ऊर्जा राहत,

    ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य से LPG और तेल टैंकरों को दी अनुमति, भारत को मिली अहम ऊर्जा राहत

    रूसी तेल पर अमेरिका की नीति पर ईरान का हमला

    रूसी तेल पर अमेरिका की नीति पर ईरान का हमला: प्रतिबंधों और छूट में दिखा दोहरा रवैया

    ईरान और अमेरिका के लड़ाई में अब तक हुए इतने खर्चें

    ईरान युद्ध में अमेरिका का खर्चा भारी, 13 दिनों में लगभग 26 अरब डॉलर खर्च

    हॉर्मुज स्ट्रेट बहाल करवाने में ट्रम्प की नाकामी ने खाड़ी देशों के उन पर भरोसे को लगभग खत्म कर दिया

    ईरानी मिसाइलों का असर: हमले के लिए US को अपनी ज़मीन और हवाई क्षेत्र नहीं देगा UAE, लेकिन अब ट्रम्प क्या करेंगे ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तालिबान द्वारा मूर्तियों के विनाश के समय

    आज से ही के दिन तालिबान ने तोड़ी थीं बुद्ध की 2 हजार वर्ष पुरानी प्रतिमाएं, लेकिन भीम-मीम एकता के अनुयायी इस कृत्य पर 25 वर्ष बाद भी कुछ लिख बोल नहीं सकते

    मुंबई धमाकों ने शहर की सुरक्षा को चुनौती दी

    मार्च 1993 के मुंबई धमाकों ने शहर की सुरक्षा को चुनौती दी और नई व्यवस्थाएँ तैयार कीं

    4 मई को गांधी को उनकी कुटिया से सोते समय गिरफ्तार कर लिया गया था

    दांडी मार्च और वायसराय लॉर्ड इरविन को लिखा गया गांधी का वो ऐतिहासिक पत्र

    पाश्चात्य सभ्यता में महिलाओं को कमतर आँकने के विचार को एक सिद्धान्त ने और पुष्ट किया कि उनमें आत्मा नहीं पायी जाती है।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: नारी सशक्तिकरण और पाश्चात्य Vs वैदिक दर्शन, क्या वैदिक काल में महिलाओं को प्राप्त अधिकारों का स्तर हासिल कर सके हैं पश्चिमी देश?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    How India’s Growing Internet User Base Is Driving New Digital Entertainment Platforms

    How India’s Growing Internet User Base Is Driving New Digital Entertainment Platforms

    CroreBet India Review 2026: Sports Betting, Casino Games & Bonuses Explained

    CroreBet India Review 2026: Sports Betting, Casino Games & Bonuses Explained

    Top Bonus Rounds in Ice Fishing Game Review: What Indian Players Love Most

    Top Bonus Rounds in Ice Fishing Game Review: What Indian Players Love Most

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

प्यारे वामपंथियों! भगत सिंह एक सच्चे राष्ट्रवादी थे, उन्हें ‘वामपंथी’ कहकर खुद का मजाक मत बनाओ

Animesh Pandey द्वारा Animesh Pandey
29 September 2019
in इतिहास
भगत सिंह

PC: indiatvnews

Share on FacebookShare on X

जिस नाम को सुनकर आज भी देश के करोड़ों युवाओं में ऊर्जा का संचार होता है, उसी क्रांतिकारी भगत सिंह की विचारधारा को कुछ लोग हड़पने के प्रयत्न में लगे हुए हैं। साम्राज्यवाद विरोध, नास्तिकता जैसे कई सिद्धांतों के के सहारे वे यह सिद्ध करना चाहते हैं कि भगत सिंह विशुद्ध वामपंथी थे, और भारत में प्रचलित वामपंथ के समर्थक या अनुयाई थे। परंतु क्या यही सत्य है?

28 सितंबर 1907 को ल्यालपुर जिले [अब पाकिस्तान का फ़ैसलाबाद जिला] के बंगा ग्राम में हुआ था। इनके जन्म के समय इनके पिता सरदार किशन सिंह जेल से बाहर आ चुके थे और इनके चाचा अजीत सिंह और स्वरण सिंह का भी जेल से जल्द निकलना सुनिश्चित हो चुका था, इसलिए इनके दादा अर्जुन सिंह ने इन्हे ‘भागनलाल’ नाम दिया। यानि वह, जो भाग्यवान हो।

संबंधितपोस्ट

‘शिवायण’: भ्रांतियों से सत्य की ओर जाने का रास्ता बताती पुस्तक

राष्ट्रीय अपमान का बदला: सांडर्स वध से गूंजा भारत का क्रांतिकारी प्रतिशोध

कितना भरोसेमंद है BBC? नई दिल्ली से तेल अवीव और वॉशिंगटन तक क्यों गिरती जा रही है बीबीसी की साख और विश्वसनीयता ?tfi

और लोड करें

भगत सिंह का परिवार जाट सिख था, और विचारधारा से पूर्णतः आर्य समाजी था। अमृतसर में 13 अप्रैल 1919  को हुए जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। इसलिए गांधीजी के आह्वान पर भगत ने ज़ोर-शोर से असहयोग आंदोलन में भाग लिया। परंतु 1922 में चौरी चौरा में हुई हिंसा के कारण जब गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को रोक दिया, तो युवा भगत सिंह ने अहिंसा का मार्ग छोड़कर क्रांति का मार्ग अपनाया।

लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने केवल 16 वर्ष की आयु में भारत की स्वतन्त्रता हेतु नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी। इसके साथ ही 1923 में भगत सिंह ने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन असोसिएशन की सदस्यता भी ग्रहण की, जिसके संस्थापकों में योगेश चन्द्र चटर्जी, शचीन्द्र नाथ सान्याल, राम प्रसाद बिस्मिल जैसे क्रांतिकारी शामिल थे। यह वही हिंदुस्तान रिपब्लिकन असोसिएशन है जिसने काकोरी में नंबर 8 डाउन ट्रेन को रोककर अंग्रेज़ी सरकार से करीब 8000 से भी ज़्यादा रुपये [आज के लगभग 80 लाख रुपये] लूटे थे। इसके पश्चात अंग्रेजों द्वारा की गयी त्वरित कार्रवाई में राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ सहित 4 क्रान्तिकारियों को मृत्युदंड व 16 अन्य को सश्रम कारावास का दंड दिया गया था। केवल भगत सिंह और चन्द्र शेखर आज़ाद इस कार्रवाई से बच निकलने में सफल हुये थे, और इन दोनों ने काफी परिश्रम के बाद हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन का पुनर्गठन करते हुये उसे एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। यह नाम स्वयं भगत सिंह ने दिया था, जो रूसी क्रान्ति के जनक, व्लादिमीर लेनिन की कार्यशैली से काफी प्रेरित थी। कहते हैं कि मृत्यु से कुछ घंटे पहले जब उनके एक मित्र, प्राणनाथ मेहता उनसे अंतिम बार मिले थे, तो उन्होंने उनसे ‘द रिवोल्यूशनरी लेनिन’ नामक पुस्तक मंगाई थी। इसी कारण अधिकांश वामपंथी भगत सिंह को विशुद्ध वामपंथी मानते हैं, जबकि सत्य तो यह है कि भगत सिंह समाजवाद से प्रेरित अवश्य थे, परंतु यदि वामपंथ के सिद्धांतों पर उन्हे आँका जाये, तो वे विशुद्ध वामपंथी तो बिल्कुल नहीं थे।

एचएसआरए का प्रमुख उद्देश्य सेवा, त्याग और हर प्रकार की पीड़ा सहने वाले नवयुवक तैयार करना था। भगत सिंह ने इसी के अंतर्गत साइमन कमीशन के विरुद्ध लाहौर में हो रहे प्रदर्शन में भाग लिया था, जहां उन्होंने अपनी आँखों से लाला लाजपत राय को अंग्रेज़ अफसर जेम्स स्कॉट और जेपी सॉन्डर्स द्वारा बुरी तरह पिटते देखा। पिटाई से बुरी तरह घायल लाला लाजपत राय 17 नवंबर 1928 को परलोक सिधार गए। अंग्रेज़ों के इस दमनकारी कृत्य से क्रोधित होकर राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे० पी० सॉन्डर्स को मार गिराया था। इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी।

इसके कुछ महीनो बाद क्रान्तिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने वर्तमान नई दिल्ली में स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेण्ट्रल एसेम्बली के सभागार संसद भवन में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज़ सरकार को ‘उनकी नींद’ से जगाने के लिये बम और पर्चे फेंके थे। बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी। बाद में लाहौर षड्यंत्र केस के अंतर्गत भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम हरी राजगुरु को ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के आरोप में आईपीसी की धारा 302 और धारा 124 के अंतर्गत मृत्युदंड दिया गया, और उन्हे 23 मार्च 1931 को तय समय से कई घंटे पहले लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गयी थी।

अब जिन्हें भी ऐसा प्रतीत होता है कि भगत सिंह वामपंथ के अनुयायी हैं, उन्हे हम ये बता दें कि एक वामपंथी कभी भी राष्ट्र को एकत्रित करने के विचार को समर्थन नहीं देता। लाहौर के सेंट्रल जेल से अपने माँ को लिखे के पत्र के अनुसार भगत सिंह ने एक बार लिखा था, “मुझे कोई शंका नहीं है कि मेरा देश एक दिन स्वतंत्र हो जाएगा, मुझे इस बात का भय है कि साहब लोग जिन कुर्सियों को छोड़कर, जाएंगे उन पर भूरे साहबों का कब्जा हो जाएगा”।

तो भगत सिंह ने अपने इस पत्र में जिन ‘भूरे साहबों’ का जिक्र किया है,  वे कौन हैं?  क्या वे वही धनाढ्य व्यक्ति हैं, जो भारत में पैदा हुए लेकिन अंग्रेजों की तरह सूट-बूट पहनते हैं? या वे वो भूरे साहब हैं जिनकी सोच अंग्रेजों जैसी है? अंग्रेजों से सोच मिलने का अर्थ स्पष्ट करें  तो वह यह है कि व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति उनके लिए सर्वोपरि है, जो अंग्रेजों की तरह ‘दुर्बलों’ को सदैव अपना दास बनाकर रखने और उन्हें शोषित करने में विश्वास रखते हैं।

वहीं भगत सिंह के लिए प्रथम और अंतिम प्रेम देश था। उनके लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था, और यदि वे आज जीवित होते, तो वे निस्संदेह ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ गाने वाले वामपंथियों को देखकर या तो अपना माथा पीट लेते, या फिर स्वयं उन्हें सबक सिखाने निकल पड़ते।

यही नहीं, यदि वामपंथ के वर्तमान स्वरूप के अनुसार भगत सिंह को आँका जाये, तो भगत सिंह कहीं से भी वामपंथी नहीं दिखाए देते। आज के वामपंथी जिस प्रकार से तुष्टीकरण की निम्नतम राजनीति का अनुसरण करते हैं, भगत सिंह का उससे दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। उल्टे नौजवान भारत सभा में यदि किसी को प्रवेश करना होता था, तो उसे ये विश्वास दिलाना होता था कि उसे हलाल और झटका गोश्त के एक साथ पकने और एक साथ खाने से कोई आपत्ति नहीं है। ये हम नहीं कहते, बल्कि भगत सिंह की जीवनी लिखने वाले वयोवृद्ध पत्रकार कुलदीप नैयर ने स्वयं अपने पुस्तक ‘विदाउट फीयर’ में इसकी पुष्टि भी की है।

भगत सिंह ने एक बार अपने नोटबुक में भी लिखा था, ‘जो व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है,  उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी।’ परंतु  आज के वामपंथी तो आदिवासियों के क्षेत्र में रूढ़िवादिता को बढ़ावा देते हुये नक्सलियों के रूप में ‘वामपंथ’ को बचाने में लगे हुए हैं। इन नक्सलियों का तो विकास से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है। विकास के लिए जो सरकारी प्रयास किए भी जाते हैं, उन पर ये विध्वंसात्मक रवैया अपना लेते हैं।

वामपंथी वैसे तो लोकतंत्र और मानवाधिकार के पक्षधर हैं लेकिन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार ‘मतदान’ का विरोध करते हुए सरकारी अधिकारियों पर हमला करने वालों के पक्ष में खड़े हो जाते हैं। भगत सिंह तो देश और देशवासियों के लिए फांसी के फंदे पर झूल गए लेकिन आज के वामपंथी तो मानवाधिकार के नाम पर उनके पक्ष में भी खड़े हो जाते हैं जिनकी विचारधारा की नींव  हजारों मासूमों की हत्या से खड़ी हुई है। जो लोग यह कहते हैं कि भगत सिंह विशुद्ध वामपंथी थे, क्या वे इस बात से परिचित हैं कि वे वीर सावरकर को अपना आदर्श मानते थे। जिस विचारधारा के व्यक्ति आज सावरकर की निंदा करते नहीं थकते, उन्हे ये बात स्वीकारने में काफी असहजता होगी कि भगत सिंह न केवल वीर सावरकर का समर्थन करते थे, बल्कि उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘इंडिया’ज़ वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस’ [जिसे अंग्रेज़ी सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था] कि प्रतियाँ छपवा कर जगह जगह बँटवाई थी। इसके अलावा भगत सिंह स्वामी विवेकानंद की विचारधारा से भी बहुत प्रभावित थे, और उन्ही के आदर्शों से प्रेरित होकर उन्होने लाहौर सेंट्रल जेल में भारतीय कैदियों के बेहतर अधिकार के लिए भूख हड़ताल भी की थी। आज के वामपंथी तो दो दिन भी बिना राजसी भोजन के नहीं रह सकते, और भगत सिंह ने तो 116 दिन तक निरंतर भूख हड़ताल की थी, जिसमें वे अपनी मांगें पूरी करने में काफी हद तक सफल भी रहे थे।

भगत सिंह ने कहा था, ‘आमतौर पर जैसी चीजें होती हैं, लोग उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलना है।’ यदि आज के वामपंथियों की विचारधारा के संदर्भ में इसे देखें, तो यह कथन एकदम सटीक बैठता है। आज के वामपंथियों ने दुर्भाग्यवश एक खास विचारधारा के विरोध को ही क्रांति समझ लिया है। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे लोग जो कह रहे हैं, वह न्यायोचित है भी या नहीं।

उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे लोग जो कर रहे हैं, उससे किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे देश की संप्रभुता किस तरह खतरे में आ सकती है। आज के वामपंथी मोदी विरोध और भाजपा विरोध के चक्कर में यह भी भूल जाते हैं कि विरोध व्यक्ति का नहीं बल्कि नीतियों का करना चाहिए। देश के सर्वाधिक लोगों ने जिसके पक्ष में वोट डाला है, उसका थोड़ा सा सम्मान तो बनता है ना, उस व्यक्ति का नहीं तो कम से कम जनमत का सम्मान तो करना ही चाहिए।

केवल 23 वर्ष की आयु में 23 मार्च 1931 को सुखदेव थापर और शिवराम हरी राजगुरु के साथ अपने प्राण न्योछावर करने वाले भगत सिंह यदि आज जीवित होते, तो उन्हे स्वयं वही वामपंथी ‘एक कुटिल, कपटी संघी’ घोषित कर दिए होते, जो आज उनका नाम लेकर अपनी कुत्सित विचारधारा का प्रचार करते नहीं थकते। जिस व्यक्ति के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था, वो निस्संदेह हमारे ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ की विषैली विचारधारा को देखते हुये उनके विरुद्ध विद्रोह करने से पहले एक बार नहीं सोचते। आज भी हम भगत सिंह के ऋणी हैं, जिन्होने युवा पीढ़ी को देश के लिए मर मिटने का दृढ़ संकल्प लेने को प्रेरित किया था।

Tags: इतिहासभगत सिंहवामपंथ
शेयर64ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

असम राइफल्स, ITBP और BSF का नियंत्रण भारतीय सेना को देना साबित होगा निर्णायक कदम

अगली पोस्ट

इमरान खान की अमेरिकी यात्रा ‘सुपर फ्लॉप’, ‘रेड डोरमेट’ से लेकर इमरजेंसी लैंडिंग तक की पूरी कहानी

संबंधित पोस्ट

तालिबान द्वारा मूर्तियों के विनाश के समय
इतिहास

आज से ही के दिन तालिबान ने तोड़ी थीं बुद्ध की 2 हजार वर्ष पुरानी प्रतिमाएं, लेकिन भीम-मीम एकता के अनुयायी इस कृत्य पर 25 वर्ष बाद भी कुछ लिख बोल नहीं सकते

12 March 2026

अफ़ग़ानिस्तान की शांत बामियान घाटी में इस दिन बंदूक की गोली और मोर्टार विस्फोट की आवाज़ें गूंज उठीं थीं। तालिबान के लंबी दाढ़ी वाले सैनिक,...

मुंबई धमाकों ने शहर की सुरक्षा को चुनौती दी
इतिहास

मार्च 1993 के मुंबई धमाकों ने शहर की सुरक्षा को चुनौती दी और नई व्यवस्थाएँ तैयार कीं

12 March 2026

मार्च 1993 में मुंबई पर हमले ने शहर की सुरक्षा की तस्वीर बदल दी मार्च 1993 की एक सुबह मुंबई की पहचान बदल गई, जब...

4 मई को गांधी को उनकी कुटिया से सोते समय गिरफ्तार कर लिया गया था
इतिहास

दांडी मार्च और वायसराय लॉर्ड इरविन को लिखा गया गांधी का वो ऐतिहासिक पत्र

12 March 2026

12 मार्च 1930 की सुबह मोहनदास करमचंद गांधी गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम के अपने कमरे से 6 बजकर 10 मिनट पर बाहर आ...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05

India’s Swadesi ‘Meteor’: World’s Most Lethal BVR Missile | Gandiv| SFDR | DRDO

00:06:48
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited