PAK दूतावास पर लगे भारत विरोधी पोस्टरों को ईरान ने ‘जबरदस्ती’ हटवाया, लगाई फटकार

पाकिस्तान

कश्मीर मुद्दे पर दुनियाभर में अपना एजेंडा फैला रहे पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक और झटका लगा है। अब की बार झटका देने वाला देश कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान का पड़ोसी और इस्लामिक राष्ट्र ईरान है। DNA की एक रिपोर्ट के मुताबिक कल रात ईरान ने उसके वहाँ मौजूद पाकिस्तानी दूतावास पर लगे भारत विरोधी पोस्टर्स और बैनर्स को जबरदस्ती हटवा दिया। पाकिस्तान वहां काफी दिनों से अपने दूतावास का इस्तेमाल भारत के खिलाफ अपना एजेंडा चलाने में कर रहा था, ऐसे में ईरान ने अपने इस कदम से पाकिस्तान को कडा संदेश भेजने का काम किया है। ईरान के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं और भारत भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान का साथ देता आया है। इतना ही नहीं, पड़ोसी होने के नाते ईरान भी भारत की ही तरह पाकिस्तान की प्रॉक्सि वॉर का शिकार होता आया है। ऐसे में अब पाकिस्तान को लताड़कर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत के साथ उसके रिश्ते उसकी प्राथमिकता है।

दरअसल, ईरान के शहर मशहद में मौजूद पाकिस्तान दूतावास पर भारत के खिलाफ काफी दिनों से पोस्टर्स और बैनर्स लगे हुए थे। इन पोस्टर्स में लोगों को कश्मीरियों पर हो रहे तथाकथित ज़ुल्मों को प्रकाशित किया गया था। इसपर ईरानी प्रशासन ने कडा रुख अपनाते हुए कहा कि अपने दूतावास का किसी तीसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल करना कूटनीतिक नियमों का उल्लंघन है, ऐसे में वह इन पोस्टर्स को बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके बाद ईरान के प्रशासन ने ‘जबरदस्ती’ पाकिस्तानी दूतावास से भारत विरोधी पोस्टर्स हटवा दिये। इसके जवाब में निराश पाकिस्तान ने ईरान को एक ‘नोट वर्बेल’ जारी कर अपनी आपत्ति जताई। बता दें कि नोट वर्बेल के जरिये दो देश एक तरह का मौखिक संवाद करते हैं। पाकिस्तान के इस नोट वर्बेल पर तेहरान ने भी अपनी निराशा जाहिर की।

बता दें कि इससे पहले ईरान में पाकिस्तानी दूतावास दो बार कश्मीर पर भारत विरोधी प्रदर्शनों को आयोजित कर चुका था। ये सभी विरोध प्रदर्शन बिना ईरान सरकार के अनुमति के आयोजित किए गए थे। इस पर भारत सरकार ने आपत्ति जताते हुए भारत में ईरान के राजदूत को इस पर कडा एक्शन लेने को कहा था।

ईरान और भारत के रिश्ते बेहद मधुर रहे हैं और भारत भी ईरान के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को प्राथमिकता देता है। ईरान पर अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद भारत ईरान में चाबहार बंदरगाह को विकसित कर रहा है जिसका भविष्य में भारत, अफ़ग़ानिस्तान के साथ-साथ ईरान को भी फायदा पहुंचेगा। स्पष्ट है कि यह ईरान के भी हितों में है कि वह कश्मीर मुद्दे पर भारत का साथ दे ना कि पाकिस्तान का! ऐसा इसलिए क्योंकि जहां एक तरफ भारत ईरान की आर्थिक मदद करता आया है, तो वहीं पाकिस्तान ईरान में आतंक का एक्सपोर्ट करता आया है। इसी बात से परेशान होकर इस वर्ष फरवरी में ईरान ने पाकिस्तान को धमकी भी जारी की थी। ईरान ने उस वक्त पाकिस्‍तान को चेतावनी देते हुए कहा था कि ‘वह आतंकी संगठनों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे।’ तब ईरान की कुर्द सेना के कमांडर ने कहा था कि पाकिस्‍तान अपने पड़ोसी देशों में आतंकवाद फैलाने का काम बंद करे। उन्‍होंने कहा था कि ‘अगर पाकिस्‍तान ने अपनी सरजमीं पर पनप रहे आतंकवाद को खत्‍म नहीं किया तो उन्‍हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।’

ईरान का भारत को समर्थन करना इस बात को दर्शाता है कि सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही पाकिस्तान की फजीहत नहीं हुई है, बल्कि उसके 4 में से 3 पड़ोसियों ने भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को पूरी तरह डंप कर दिया है। अफ़ग़ानिस्तान और अब ईरान, सभी ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के पक्ष का समर्थन किया है। इससे पहले ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर एक बेहद संतुलित बयान देते हुए कहा था ‘वह जम्मू एवं कश्मीर को लेकर भारत सरकार के फैसले पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। ईरान को उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान अपने क्षेत्रीय लोगों के हितों की रक्षा करेंगे’। अब अपने यहां पाकिस्तानी एजेंडे को धराशायी कर ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता देता है और यह पाकिस्तान की एक और कूटनीतिक हार है।

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