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अमेरिकियों का संदेश स्पष्ट है: अब कोई भी स्थापित नेता या deep state एजेंट नहीं चाहिए

Vikrant Thardak द्वारा Vikrant Thardak
7 January 2021
in अमेरिकाज़
अमेरिकियों का संदेश स्पष्ट है: अब कोई भी स्थापित नेता या deep state एजेंट नहीं चाहिए
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6 जनवरी 2020 का दिन लोकतांत्रिक अमेरिका के इतिहास में सबसे काले दिन के रूप में अपनी जगह लगभग पक्की कर चुका है। बुधवार को दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका के संसद भवन से दुनिया ने वो तस्वीर देखी, जिसने अमेरिकी लोकतंत्र पर सदैव के लिए अमिट धब्बा लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हजारों समर्थकों ने अमेरिकी संसद भवन को लगभग चार घंटों तक बंधक बनाकर रखा और इस दौरान संसद में जारी Electoral College को गिनने एवं अगले राष्ट्रपति को मनोनीत करने की प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया गया। ट्रम्प के हजारों समर्थक Trump 2020 और अमेरिका के झंडे लहराते हुए अमेरिकी संसद में घुस गए और जमकर उपद्रव मचाया। हिंसा में चार लोगों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है। चार घंटे चले ड्रामे के बाद आखिरकार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को भवन से बाहर निकाला और सांसदों ने Electoral College गिनने की प्रक्रिया समाप्त कर जो बाइडन को आधिकारिक रूप से अगले राष्ट्रपति के तौर पर मनोनीत कर दिया गया। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि ट्रम्प के समर्थकों का गुस्सा आखिर अमेरिकी लोकतंत्र की किस कमजोरी को दिखाता है, और इसके जरिये ट्रम्प समर्थक अमेरिकी सरकार को क्या संदेश देना चाहते हैं?

ज़ाहिर है कि ट्रम्प अपनी तरह के सबसे अलग राजनेता हैं, या कुछ लोग तो उन्हें राजनेता मानने तक से परहेज करते हैं। उन्हें अमेरिकी Power circles में एक “बाहरी” के तौर पर देखा जाता है, जो सब अपनी ही धुन में करता है और जो अमेरिकी लोकतांत्रिक संस्थानों के दबाव के सामने झुकने से साफ़ मना कर देता है। ट्रम्प को अमेरिकी deep state के सबसे बड़े दुश्मन के तौर पर देखा गया जो अमेरिका की पुरानी और सांस्कृतिक नीतियों को कूड़े के ढ़ेर में फेंककर अपनी खुद की नीति बनाने में विश्वास रखते हैं। चीन के साथ चार सालों तक भीषण ट्रेड वॉर करना, कुछ मुस्लिम देशों के लोगों पर अमेरिका में घुसने पर पाबंदी लगाना, ईरान के कमांडर को जान से मार देना, अफ़ग़ानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान करना और खुलकर चीनी आक्रामकता के खिलाफ सैन्य कदम उठाना, ये सब ऐसे कदम थे, जिन्हें बिना Deep State के प्रभाव के कुचले उठाया नहीं जा सकता था।

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यहां deep state का अर्थ ऐसे तंत्र से है, जो अमेरिकी प्रशासन में पैठ जमा चुके ब्यूरोक्रैट्स, अधिकारी, राजनेताओं से मिलकर बनता है और जो सरकार बदलने के बाद भी पुरानी सरकारों की घिसी-पिटी नीतियों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखता है। अब चूंकि, ट्रम्प से पहले लगातार आठ साल Democrats की सरकार ही रही थी, ऐसे में ट्रम्प के समय में भी deep state पर Democrats की नीतियों का ही अधिकतर प्रभाव दिखता रहा! शायद यही कारण था कि हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ जारी emails से जुड़ी जांच को “कमजोर” बताकर नवंबर 2017 में ट्रम्प ने Deep state पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था! रूस के साथ उनकी “मिलीभगत” की “झूठी कहानियों” को लेकर भी ट्रम्प समय-समय पर Deep State को कोसते रहे हैं। मुस्लिमों पर लगाए गए उनके प्रतिबंधों के फैसले को पलटने के लिए भी ट्रम्प ने Deep State पर ही आरोप लगाया! कुल मिलाकर ट्रम्प ने अपने समर्थकों के बीच ऐसी छवि बना ली, जिसके बाद उन्हें कुख्यात Deep State के संहारक के तौर पर जाना जाने लगा और इसके लिए वे अपने समर्थकों के बीच और ज़्यादा पोपुलर होते गए!

ऐसे में चार सालों के “सुनहरे” काल के बाद अब वे दोबारा ऐसे शख्स को राष्ट्रपति बनते नहीं देखना चाहते, जिन्हें वे Deep State का पिछलग्गू समझते हों! इसमें कोई शक नहीं है कि ओबामा के कार्यकाल के दौरान Deep State कभी प्रभावशाली रहा। अब चूंकि, ओबामा के उपराष्ट्रपति रहे जो बाइडन अब देश के राष्ट्रपति बनने वाले हैं, तो यह Deep State दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होकर सरकार की नीतियों को उसी तरह प्रभावित करना शुरू कर देगा, जैसे कि ट्रम्प से पहले हुआ करता था। अब दोबारा अमेरिकावासियों को एक ऐसा राष्ट्रपति देखना पड़ेगा, जो इंसान कम और राजनेता ज़्यादा होगा, जो हमेशा Political correct होने की कोशिश में रहेगा! वो भी तब जब इन चुनावों में बड़े पैमाने पर fraud होने के आरोप लगाए जा रहे हों और ट्रम्प के समर्थक चुनावों के नतीजों को मानने से ही इंकार कर रहे हों।

जो बाइडन अगले चार वर्ष deep state के प्यादे के तौर पर काम करने वाले हैं, और शायद यही कारण है कि ट्रम्प के समर्थन और अमेरिकी लोग ट्रम्प के हारने से ज़्यादा बाइडन की जीत के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट कर रहे हैं। अमेरिकी लोकतंत्र के लिए बुधवार का दिन बेशक काला रहा, लेकिन ट्रम्प के समर्थकों की वजह से नहीं, बल्कि ऐसे अमेरिकी तंत्र के कारण जो उन हजारों लोगों को अपने विश्वास में लेने में असफ़ल रहा! उन्हें आज भी लगता है कि ट्रम्प को चुनाव हरवाया गया और बाइडन जैसा शख्स देश का राष्ट्रपति बनने के लायक तो बिलकुल नहीं है! उन्हें लगता है कि यह बाइडन की नहीं, बल्कि अमेरिका के Deep State की जीत है, जिसे ट्रम्प ने पिछले चार सालों में बर्बाद करने की भरपूर कोशिश की।

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