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‘माई लाई’ नरसंहार की बरसी और मीनाब की स्कूली बच्चियों की सामूहिक कब्रें: क्या नागरिक चेतना में धुंधलाते जा रहे हैं युद्ध अपराधों के सबक?

माई लाई में सेना द्वारा नरसंहार की खबरें सामने आने के बाद अमेरिकी जनता युद्ध के खिलाफ सड़कों पर उतर आई थी और आखिरकार अमेरिका को अपने सैनिक वियतनाम से वापस बुलाने पड़े थे, लेकिन क्या 'मीनाब' इस युद्ध का माईलाई मूमेंट बन पाएगा?

Sambhrant Mishra द्वारा Sambhrant Mishra
16 March 2026
in विश्व
क्या मीनाब में ईरानी बच्चियों की सामूहिक कब्रें एक बार फिर अमेरिकी नागरिकों की चेतना झकझोर सकेंगी?

क्या मीनाब में ईरानी बच्चियों की सामूहिक कब्रें एक बार फिर अमेरिकी नागरिकों की चेतना झकझोर सकेंगी?

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साल 1969 की बात है, वॉशिंगटन के एक फ्रीलांस खोजी पत्रकार सीमोर हर्श किसी ख़बर की तलाश में थे, जिसे अखबारों में छपवाया जा सके, तभी उन्हें अपने एक सूत्र से बेहद अजीब सी जानकारी मिलती है। उन्हें पता चलता है कि अमेरिकी सेना के एक अधिकारी विलियम कैली William Calley के ख़िलाफ़  कोर्ट-मार्शल होने वाला है। अब हर्श के सामने सवाल था- आख़िर क्यों? धीरे – धीरे उन्हें पता चलता है कि कैले पर वियतनाम वॉर के दौरान कुछ निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप है।

आम तौर पर जंगों में इन्हें कोलैट्रल डैमेज कह कर छोड़ दिया जाता है, लेकिन सीमोर हर्श को ये जानकारी छोड़ी असमान्य लगी।
आख़िरकार वो फोर्ट बेनिंग जाने का फैसला कर लेते हैं, ये वही जगह थी जहां लेफ्टिनेंट कैली को रखा गया था। शुरुआत में उन्हें कोई ख़ास जानकारी नहीं मिलती। कई दिन बीत चुके थे और हर्श अभी भी खाली हाथ थें, उनके पास कोई ठोस जानकारी नहीं थी। लेकिन इत्तिफाकन उनकी मुलाक़ात वियतनाम से लौटे एक अमेरिकी सैनिक से होती है और वो जो बताता है उसे सुनकर हर्श के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

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उन्हें पता चलता है कि बात सिर्फ दो या तीन लोगों की हत्या की नहीं-  लेफ्टिनेंट कैली पर नरसंहार का आरोप है, एक पूरे गाँव के खात्मे का आरोप।सीमोर हर्श जैसे फ्रीलांस जर्नलिस्ट के लिए ये बहुत बड़ी टिप थी, आख़िरकार वो लेफ्टिनेंट विलियम कैली से बात करने में कामयाब हो जाते हैं। कैली सीधे सीधे नरसंहार की बात तो स्वीकार नहीं करते, लेकिन जितना कुछ वो कबूलते हैं, उससे ये साफ़ हो जाता है कि वियतनाम के उस छोटे से गाँव में जो हुआ था, वो मानवता के विरुद्ध अपराध था।

वो स्टोरी लिखते हैं और उस वक्त के लगभग सभी बड़े अखबारों को एक साथ डिस्पैच कर देते हैं। ये वो समय था जब अमेरिकी सैनिक ज़मीन पर वियतनामी के काइतोंग विद्रोहियों की गुरिल्ला रणनीति के सामने बुरी तरह जूझ रहे थे, लेकिन इस युद्ध से जुड़ी खबरें बाहर नहीं आ रही थीं ।कोई भी अख़बार इतना बड़ा ज़ोखिम उठाने को तैयार नहीं होता- वो भी एक फ्रीलांस जर्नलिस्ट की रिपोर्ट पर।

थक कर हर्श अपनी रिपोर्ट Dispatch News Service नाम की एक छोटी सी समाचार एजेंसी को दे देते हैं, लेकिन 16 नवंबर 1969 को जैसे ही ये रिपोर्ट पब्लिश होती है। एक दिल दहला देने वाली घटना परत दर परत दुनिया के सामने खुलने लगती है। 16 मार्च 1968 का वो दिन वियतनाम के माई लाय गाँव के लिए बेहद मनहूस दिन था।सुबह से ही अमेरिकी सेना के हेलिकॉप्टर आसमान में मंडरा रहे थे।

इन हेलिकॉप्टर्स में लेफ्टिनेंट विलियम कैली की और उनकी C कंपनी की दो और प्लाटून्स थीं। कैली को वियतकांग (VC) की 48वीं बटालियन को ढूंढने और उन पर हमला करने के निर्देश दिए गए थे। इस इलाके में वियतकांग की अच्छी खासी मौजूदगी के इनपुट थे, इसलिए कंपनी C को भारी जवाबी कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन कैली और उसके सैनिक हैरान रह गए, क्योंकि नदी किनारे मौजूद उस गाँव में पलटवार तो दूर किसी ने एक गोली तक नहीं दागी।वहाँ न तो कोई बारूदी सुरंग थी और न ही कोई बूबीट्रैप।

C कंपनी को वहाँ कोई वियतकांग नहीं मिला। वहां सिर्फ बुजुर्ग पुरुष, महिलाएँ, बच्चे और दुधमुंहे शिशु थे। कैली और उनकी पलटन ने जब गाँव की तलाशी लेने का फैसला किया तब लोग अपने घरों में नाश्ता कर रहे थे, या फिर रोज़मर्रा के कामकाज में जुटे थे। वापस जाने की जगह  C कंपनी के जवानों ने वहाँ मौजूद पशुओं, मुर्गियों और बत्तखों को मारना शुरू कर दिया। कुछ सैनिक झोपड़ियों और इमारतों की तलाशी लेने लगे ताकि दुश्मन की मौजूदगी का कोई भी संकेत मिले तो उसे खत्म किया जा सके। तलाशी से उकताए कुछ सैनिकों ने झोपड़ियों के अंदर हैंड ग्रेनेड फेंकने शुरू कर दिए, जिसके बाद वहां आग लग गई।

इसीबीच अमेरिकी सैनिक निहत्थे गाँव वालों को बस्ती के बीचो बीच एक खुले स्थान पर ले आए, जबकि कुछ लोगों गावं के बाहर धान के  खेतों के पास इकट्ठा किया गया। जब एक एक गांववाला बाहर आ गया, तो लेफ्टिनेंट कैली ने सभी को मारने के आदेश दे दिए। अमेरिकी सैनिकों ने अपनी M 16 राइफलों से उन निहत्थे और निर्दोष ग्रामीणों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। देखते ही देखते वहां 100 के क़रीब लाशें बिछ गईं।

लेकिन यह तो केवल शुरुआत थी। सुबह 11 बजते बजते कैली और कंपनी C के अन्य सैनिक 300-400 नागरिकों की हत्या कर चुके थे। बाद में कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गोलियों और विस्फोटों से लोगों के शरीरों में बड़े-बड़े छेद हो गए थे, हाथ-पैर उड़ गए थे और कई लोगों के सिर फट गए थे। जब यह नरसंहार हो रहा था, उसी समय अमेरिकी सेना का ही एक अन्य हेलीकॉप्टर माय लाई के ऊपर बेहद नीची उड़ान भर रहा था। इस सर्विलांस हेलिकॉप्टर को वॉरंट ऑफिसर ह्यू सी. थॉम्पसन उड़ा रहे थे। उनका काम था दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाना और यह जानकारी जमीन पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों तक पहुँचाना।

लेकिन थॉम्पसन और उनके साथियों ने ऊपर से जो कुछ देखा उसे देखकर उनका दिल दहल गया। उन्होने देखा कि C कंपनी निहत्थे गाँव वालों को मौत के घाट उतारने में जुटी थी, जिसमें कुछ महीनों के बच्चे भी शामिल थे। उन्होने देखा कि गाँव का बड़ा हिस्सा आग की लपटों में घिरा हुआ था और पूरे गाँव को नष्ट करने की तैयारी चल रही थी।

आख़िरकार थॉम्पसन ने एक बेहद साहसिक फैसला लिया, उन्होने अपना हेलीकॉप्टर उन वियतनामी ग्रामीणों और उनका पीछा कर रहे अमेरिकी सैनिकों के बीच उतार दिया। इसके बाद उन्होंने अपने हेलीकॉप्टर के डोर गनर को आदेश दिया कि अगर अमेरिकी सैनिक इन गांववालों का पीछा करना बंद न करें, तो वो उन पर गोली चला दें।

कुछ देर की गहमा-गहमी के बाद आख़िरकार इन सैनिकों का नेतृत्व कर रहे सेकंड लेफ्टिनेंट स्टीफन ब्रूक्स ने गांववालों का पीछा करना छोड़ दिया। कैली की पलटन के पीछे हटते ही थॉम्पसन और उनके साथियों ने माई लाई के चंद जीवित बचे नागरिकों को हेलीकॉप्टर में बैठाया और वहां से निकाल कर उन्हें अपने बेस ले आए।

उन्होंने जो कुछ देखा था, उसकी जानकारी अपने यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर मेजर फ्रेडरिक वाटके को दी, लेकिन वाटके ने इसे वहीं दबा दिया। थॉम्पसन ने बाद में वहां मौजूद अन्य सीनियर अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दी, लेकिनकिसीनेभीइसयुद्धअपराधकीरिपोर्टमुख्यालयतकनहींभेजी। लेकिन किसी तरह ये टिप सीमोर हर्श तक पहुँच गई और इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पहली बार अमेरिकी जनता को पता चला कि उनकी सेना ने वियतनाम में आम लोगों के साथ क्या किया है।

माई लाई के नरसंहार की खबरें सामने के बाद अमेरिकी जनता वियतनाम युद्ध के विरोध में सड़कों पर उतर आई। बढ़ते दबाव के बीच सेना की उस कंपनी के छह जवानों का कोर्ट मार्शल किया गया, लेकिन सजा सिर्फ लेफ्टिनेंट विलियम एल कैली को हुई और उन्हें 22 लोगों की हत्या का दोषी करार दिया गया। माई लाय गांव में आज भी एक काली दीवार पर 504 मृतकों के नाम दर्ज हैं, जहां नाम के साथ उनकी उम्र भी दर्ज है। इनमें कई नवजात थे तो कई 80 साल के बुजुर्ग।

लेकिन इन क़रीब पचास सालों में क्या बदला है?

माई लाई में लेफ्टिनेंट कैली और उनकी M 16 रायफलें थीं तो मीनाब में उनकी जगह टॉमहॉक मिसाइलें, जिन्हें महज एक ऐसे खुफिया इंटेल के आधार पर बच्चियों के स्कूल की तरफ़ मोड़ दिया गया था, जो कई महीने पुरानी थी। अब जबकि न्यू यॉर्क टाइम्स जैसे अमेरिकी अख़बार 175 स्कूली बच्चियों की मौत को लेकर खबरें छाप रहें हैं तो क्या अमेरिकी जनता एक बार फिर सड़कों पर उतरेगी? क्या माई लाई की तरह ‘मीनाब’ के लिए भी सवाल किए जाएंगे? क्या ये खबरें अमेरिका को ये युद्ध रोकने के लिए मजबूर कर सकेंगी? पता नहीं….लेकिन इतना तो तय है कि माई लाई से अमेरिका ही नहीं, दुनिया भर के देशों ने कुछ नहीं सीखा, माई लाई के सबक आज भी धुंधले ही हैं।

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