ममता बनर्जी के लिए समस्याएं खत्म होने का नाम नही ले रही है। हसरतें प्रधानमंत्री बनने की है और हकीकत यह है कि कहीं मुख्यमंत्री का पद भी ना चला जाये। बंगाल चुनाव के बाद जो हिंसा हुई थी, उसपर भले बात करने को मीडिया, राजनीतिक दल ने तैयार हो लेकिन जिनकी हत्यायें हुई, जिनके साथ गैंगरेप हुआ, उनके साथ न्याय होकर रहेगा। बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधे-सीधे राजनीतिक अभिमान का तमाचा है, जिससे बढ़िया तरीके से निपटकर ही स्वावलंबी, समृद्ध और सशक्त लोकतंत्र की स्थापना की जा सकती है।
पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ने चाहा कि देश की जनता को भूलने का मौका दिया जाए। ये तो उनकी किस्मत खराब थी जस्टिस चंदा को कोलकाता हाईकोर्ट का स्थायी न्यायधीश बना दिया गया। जस्टिस चंदा की नियुक्ति के बाद से ही खेला होबे अध्याय 2 शुरू हुआ। जस्टिस चंदा ने ही मामलें की जांच के लिए सीबीआई को तलब किया था और सीबीआई जांच शुरू होते ही, बंगाल में तिलमिलाए कुछ लोग चैन की सांस नही ले पा रहे है।
रविवार को सीबीआई द्वारा 7 एफआईआर दर्ज की गई जिससे कुल दर्ज केसों की संख्या 28 हो गई है। मामलें से जुड़े हुए दो लोगों की गिरफ्तारी भी हो गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच कर रही है। 28 FIR मर्डर, गैंगरेप, हत्या की कोशिश के लिए दर्ज किए गए है जो बंगाल चुनाव के बाद हुए थे।
सीबीआई ने शनिवार को 2 लोगों को गिरफ्तार किया है जिनपर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता धर्मा मंडल के मर्डर करने का संदेह है। धर्मा मंडल को नदिया छपरा में मारा गया था। इधर सीबीआई के शिकंजे में फंस चुकी बंगाल सरकार अभी अपना दर्द बता पाती, उससे पहले ममता बनर्जी के भांजे अभिषेक बनर्जी पर ED ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय के अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को पूछताछ के लिए समन भेजा है।
अभिषेक बनर्जी 33 वर्षीय टीएमसी नेता है जो पार्टी के राष्ट्रीय सचिव है और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद भी है।मामले पर अभिषेक बनर्जी ने कहा, “भाजपा को लगता है कि वह प्रवर्तन निदेशालय से मुझपर दबाव बनवा सकता है लेकिन हम मजबूत से उबरेंगे।” टीएमसी संसद को 6 सितंबर को पेश होने के लिए कहा गया है।
अभिषेक बनर्जी से जुड़े हुए अन्य लोग जिसमें उनके वकील और आईपीएस अधिकारी शामिल है, उन्हें भी समन जारी किया गया है।
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ये मामला सीबीआई जांच में सामने आया था जब नवम्बर 2020 में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला ईस्टर्न कोलफील्ड् लिमिटेड नामक कम्पनी को कुनिस्टोरिया, आसनसोल और कजोर में अवैध रूप से खनन अधिकार आवंटित करने का है। इसी मामले में दो गिरफ्तार हो चुके है जिसमें एक TMC युवा मोर्चा के नेता विनय मिश्रा का भाई, विकास मिश्रा है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, 730 करोड़ रुपये मिश्रा बंधुओ और किसी ‘बड़े’ इंसान को दिया गया था।
टीएमसी की मुसीबतें बढ़ती जा रही है और ऐसा लग रहा है कि यह तो बस शुरुआत है। टीएमसी के नए गुंडे और पुराने कार्यकर्ता, दोनों के दिन बस बीतने वाले है।






























