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किसी भी अन्य राज्य की तुलना में झारखंड ला सकता है पदक, पर इसे अनदेखा किया गया

खेल में अनंत संभावनाओं के समंदर को समेटे हुए झारखंड को अगर मेहनत से मथा जाए तो सोना जरूर निकलेगा।

TFI Desk द्वारा TFI Desk
10 August 2021
in चर्चित
झारखंड ओलंपिक
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टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत का प्रदर्शन अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन है। इस ओलंपिक प्रदर्शन की विवेचना की जाए तो सबसे सुखद निष्कर्ष यह निकाल कर सामने आएगा की भारत में खेल की अपार संभावनाएं मौजूद है। वैसे तो ओलंपिक में हमेशा से हरियाणा का वर्चस्व रहा है लेकिन इस बार जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खीचा है वो प्रदेश है – झारखंड ।

टोक्यो ओलंपिक्स- 2020 मेंं झारखंड के तरफ से तीन खिलाड़ी भारत के पदक विजय के लिए उतरे। भाग लेनेवाले तीनों प्रतियोगी महिला खिलाड़ी थीं। एक तरफ जहां दीपिका कुमारी ने तीरंदाजी के रिकर्व महिला व्यक्तिगत और रिकर्व मिश्रित टीम में खेला तो वहीं निक्की प्रधान और सलीमा टेटे महिला हॉकी टीम में शामिल थीं।

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दीपिका कुमारी

भारत के अब तक के ओलंपिक सफर मेंं झारखंड से आने वाले खिलाड़ियों के योगदान को उँगलियों पर गिना जा सकता है। परंतु, जो चीज़ नहीं गिनी जा सकती, वो है खेल के क्षेत्र मेंं झारखंड मेंं मौजूद अनंत संभावनाएं। वर्ष 2000 मेंं बिहार से अलग हुआ झारखंड सिर्फ खनिज सम्पदा मेंं ही नहीं बल्कि खेल और खिलाड़ियों के मामले में भी समृद्ध है। सिर्फ आज ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक तौर पर झारखंड से ऐसे खिलाड़ी निकलते रहे हैं। निक्की ओलंपिक में जाने वाली झारखंड की पहली महिला थी, जिन्होंने वर्ष 2016 में रियो ओलंपिक के बाद अब टोक्यो ओलंपिक में भी शामिल हुई। झारखंड के खूंटी जिले का हेसेल गांव इसलिए भी मशहूर है क्योंकि इस गांव से अब तक 26 राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं स्टेट लेवल खिलाड़ी निकले हैं। यानि देखा जाए तो प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

और पढ़े: हरियाणा के Sporting Culture के पीछे है हरियाणा का Supporting Culture

समस्या है तो सिर्फ संसाधन, समर्थन और खेलों में निवेश की। गरीबी, सामाजिक प्रतिबंध, पारिवारिक दबाव – इनमेंं से कई एथलीटों ने अपने पसंदीदा काम करने के लिए इन बड़ी बाधाओं को पार किया है। कई चूक भी गए होंगे या बाधाओं के इन पर्वतों को पार नहीं कर पाये होंगे। यही मेहनतकश लोग हमारे अफसोस और हमारे उम्मीद की बड़ी वजह है। अफसोस इस बात का है कि भारत संभावित पदक से चुक गया और उम्मीद इस बात की है कि झारखंड की मिट्टी अभी भी सोना उगल रही है। जिस तरह खनिज पाने के लिए हमें धरती खोदनी पड़ती है उसी प्रकार खेलों के इस खदान से सोना निकालने के लिए मेहनत और निवेश की ज़रूरत है। लड़के और लड़कियां दोनों सक्षम और समर्थ हैं। इन्हें सिर्फ जरूरत है तो समर्थन और साहस की।

झारखंड में खेलों का गौरवशाली इतिहास

भले ही झारखंड, जिसने औद्योगिक विकास मेंं अपनी शुरुआती बढ़त के कारण भारत का ध्यान अर्जित किया परंतु, तीरंदाजी, हॉकी एथलेटिक्स, कबड्डी और बॉक्सिंग आदि खेलों मेंं प्रतिभा का एक बड़ा खजाना होने के अलावा, यहाँ एक अनूठी और शानदार खेल परंपरा भी थी। यह राज्य प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी जयपाल सिंह मुंडा, पहली ओलंपिक स्वर्ण विजेता टीम (एम्स्टर्डम ओलंपिक,1928) के कप्तान का भी घर है। झारखंड राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल उपलब्धियों के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से हॉकी और तीरंदाजी आदि जैसे खेलों मेंं। तत्कालीन बिहार राज्य के खेल के क्षेत्र मेंं लगभग 75 प्रतिशत उपलब्धियों का योगदान दक्षिण बिहार क्षेत्र यानी वर्तमान झारखंड राज्य द्वारा किया गया था। इसलिए, झारखंड ऐतिहासिक रूप से विशाल खेल क्षमता वाला राज्य है। झारखंड राज्य ने निर्माण के बाद से ही खेल के राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रों मेंं अपनी उपस्थिति को रेखांकित किया है।

जयपाल सिंह मुंडा

सिल्वेनस डुंगडुंग, दिलीप टिर्की, मनोहर टोपनो, सुमारई टेटे, सावित्री पूर्ति, विमल तिर्की, झानू हांसदा और एम.एस. धोनी आदि ने झारखंड को गौरवान्वित किया है और ये लोग युवा और आगामी खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा हैं। खेल की दृष्टि से झारखंड एक अनूठा राज्य है। इसमेंं खेलकूद की अपार संभावनाएं हैं। हालाँकि, राज्य मेंं केवल मुट्ठी भर खेल सुविधाएँ उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, वर्तमान मेंं हमारे पास रांची मेंं केवल कुछ राज्य स्तरीय स्टेडियम हैं और कुछ अन्य स्थानों पर कुछ जिला स्तर के स्टेडियम हैं। इसके अलावा टाटानगर मेंं कॉरपोरेट निकायों द्वारा बनाए गए कुछ अच्छे स्टेडियम हैं। परंतु यह ओलंपिक में मेडेल लाने के लिए आवश्यक ट्रेनिंग पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

खिलाड़ियों की उपलब्धियां

हाल के दिनों मेंं, झारखंड ने दो बार सुब्रतो मुखर्जी कप फुटबॉल टूर्नामेंंट की राष्ट्रीय चैम्पियनशिप जीती है। बैंगलोर मेंं, हाल ही मेंं झारखंड ने अंडर -17 राष्ट्रीय झार एनविस फुटबॉल चैम्पियनशिप मेंं स्वर्ण पर दावा किया है। पिछले साल राष्ट्रीय जूनियर बालिका हॉकी टूर्नामेंंट मेंं भी झारखंड उपविजेता रहा था। राष्ट्रीय महिला हॉकी टीम मेंं झारखंड ने सुमराई टेटे, सुभद्रा प्रधान, कांति बा आदि कई रत्नों से सुशोभित है। कई राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिताओं मेंं झारखंड ने आधे से अधिक पदक जीते। इस प्रकार, झारखंड मेंं खेलों मेंं कई सिल्वर लाइनिंग हैं जो इसे राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष पर ले जा सकते हैं। हॉकी, तीरंदाजी, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स (मध्य दूरी की दौड़ आदि) जैसे कुछ खेल आयोजनों मेंं हमारे पास सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपनी क्षमता को बार-बार साबित किया है। यदि उन्हें कुछ सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान साबित करने मेंं सक्षम होंगे।

 शासन के प्रयास और चुनौतियाँ

खेल के क्षेत्र मेंं आगे विकास के लिए खेल एजेंसियों से अधिक सक्रिय सहायता की आवश्यकता है। झार एनविस प्रतियोगिता यद्यपि बोकारो, धनबाद और पलामू के SAI उप-केंद्र मेंं हुए, फिर भी झारखंड को हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, बास्केटबॉल, भारोत्तोलन, हैंडबॉल, ताइक्वांडो, वुशु, कुश्ती, कबड्डी, खो-खो, जिम्नास्टिक जैसे खेलों आदि के लिए कुछ अतिरिक्त साई (SA।)प्रशिक्षण केंद्रों और कुछ नए केंद्रों की आवश्यकता है। एक विकल्प के रूप मेंं, भारत सरकार SAI को वित्तीय सहायता प्रदान कर सकता है। इसके लिए झारखंड के हजारीबाग मेंं एक साई प्रशिक्षण केंद्र के लिए भवन का निर्माण किया गया है, लेकिन यह अभी तक चालू नहीं है। इसके संचालन की आवश्यकता है। हॉकी और तीरंदाजी दो ऐसे खेल हैं जो राज्य के युवा खिलाड़ियों के खून मेंं हैं, इसलिए यदि यहां हॉकी और तीरंदाजी अकादमी/उत्कृष्टता केंद्र खोला जाता है, तो इसका सर्वोत्तम संभव परिणाम मिलना तय है।

और पढ़े: Indian Hockey Federation ने भारतीय हॉकी को खत्म कर दिया, फिर आये नवीन पटनायक और सब कुछ बदल गया

इस पहाड़ी क्षेत्र के युवा और ऊर्जावान आदिवासी और गैर-आदिवासी युवाओं, जिनका खेल के प्रति स्वाभाविक झुकाव है, उसे ध्यान मेंं रखते हुए, हमेंं महारानी लक्ष्मीबाई शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय, ग्वालियर की तर्ज पर झार एनविस्टेट मेंं एक शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय की आवश्यकता है। SA। ने राज्य मेंं 25 कोच तैनात किए हैं, लेकिन इन कोचों की संख्या मेंं काफी वृद्धि करने की आवश्यकता है। बड़ी संख्या मेंं अत्यधिक प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कोचों की संख्या कम से कम दोगुना करने की अवश्यकता है।

NYKS राज्य के केवल 16 जिलों मेंं कार्यात्मक है। NYKS केन्द्र शेष जिलों मेंं भी शुरू किए जाने चाहिए, ताकि बाकी 6 जिलों के युवाओं को भी राज्य की युवा गतिविधियों की मुख्यधारा मेंं लाया जा सके। इसी प्रकार वहां युवा मंडल चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसकी संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीण युवाओं को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग कुछ रचनात्मक गतिविधियों को सही दिशा मेंं करने का अवसर मिले। वर्तमान मेंं NYKS केवल 3 ब्लॉक प्रति जिले मेंं ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन कर रहा है, जबकि इसे अपनी गतिविधियों को सभी तक विस्तारित करना चाहिए।

34वें राष्ट्रीय खेलों को रांची (झारखंड) को आवंटित किया गया और इसके लिए बड़े स्तर पर इनफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण भी हुआ था परंतु आज उस इनफ्रास्ट्रक्चर का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। उसे भी पुनः जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। यानि कुल मिला कर झारखंड को खेल संबंधी गतिविधियों मेंं भारत सरकार से अत्यधिक सहायता की आवश्यकता है। इस उद्देश्य के लिए, प्राथमिकता के आधार पर तकनीकी सहायता और अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र आदि की आवश्यकता है। इतनी कमियों के बावजूद झारखंड ने राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मदद से कई उपलब्धियां हासिल की हैं और ये प्रयास सतत जारी है। खेल में अनंत संभावनाओं के समंदर को समेटे हुए झारखंड को अगर मेहनत से मथा जाए तो ओलंपिक में सोना जरूर निकलेगा।

Tags: ओलंपिकखिलाड़ीखेलझारखंड
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