Reliance के अधिग्रहण से Future Group को बचाने का Amazon का दांव हुआ फेल, NCLT ने बिगाड़ा बना बनाया काम!

भारतीय खुदरा बाज़ार का स्वदेशीकरण, फ्यूचर ग्रुप का अधिग्रहण करेगी रिलायंस

Amazon vs Reliance, NCLT

Source- Google

भारतीय बाजार सबसे वृहद है, जिसके कारण इसपर वर्चस्व को लेकर काफी द्वंद है। इसपर अपना आधिपत्य स्थापित करने हेतु बड़े-बड़े उद्यम और रसूखदार जैसे Amazon, Walmart आदि मैदान में कूद पड़े है। इन वैश्विक उद्यमों के काले इतिहास और कार्यशैली से हम सभी परिचित है। भारत के किसी घरेलू उद्यम द्वारा इनको रोका जाना अनिवार्य है अन्यथा राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते है। ऐसे में भारतीय हितों के रक्षा हेतु रिलायंस समूह खुल कर सामने आया है। e-commerce और खुदरा क्षेत्र के भारतीय बाजार को Amazon से बचाने के लिए किशोर बियानी के फ्युचर ग्रुप को रिलायंस समूह ने खरीद लिया था लेकिन Amazon ने यह मामला मुकदमेबाज़ी मे फंसा दिया। अब इस मामलें में NCLT ने बड़ा फैसला सुनाया है।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने फ्यूचर ग्रुप की फर्मों को रिलायंस रिटेल लिमिटेड को संपत्ति बेचने के लिए अपने शेयरधारकों और लेनदारों की असाधारण आम बैठक (EGM) आयोजित करने की अनुमति दे दी है। मंगलवार को एक आदेश में एनसीएलटी ने कंपनी से बैठक के लिए एक उपयुक्त तारीख तय करने को कहा और अधिग्रहण प्रक्रिया की अनुमति भी दे दी है।

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समस्या की जड़

NCLT का फैसला

NCLT द्वारा EGM के लिए रास्ता साफ करने के साथ-साथ फ्यूचर-रिलायंस रिटेल के अधिग्रहण को भी मंजूरी दे दी गई है। NCLT ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल इस योजना को मंजूरी देने वाले अंतिम आदेश की घोषणा करने से रोका था ना की किसी प्रकार के क्रियान्वयन से। अगर यह सौदा पूर्ण हुआ तो यह भारतीय खुदरा उद्योग में रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी की स्थिति को मजबूत करेगा, जो कि Amazon और Walmart जैसे ई-कॉमर्स में बहुराष्ट्रीय खिलाड़ियों द्वारा भारी निवेश देख रहे है। इस तरह हम भारतीय खुदरा बाज़ार का स्वदेशीकरण भी देख सकते है। टाटा समूह भी अपने नए सुपरऐप के साथ ऑनलाइन रिटेल पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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Amazon और Future Group की प्रतिक्रिया

निष्कर्ष

फ्युचर ग्रुप का अधिग्रहण भारत के खुदरा और ऑनलाइन व्यापार को विदेशी शोषण से बचाएगा। अंबानी कितने भी बुरे होंगे लेकिन हमे इस बात का सदैव स्मरण रखना चाहिए की रिलायंस “भारत” का एक निजी उद्यम है। अतः सरकार को इन सभी पहलुओं पर ध्यान देते हुए रिलायंस समूह की मदद भी करनी चाहिए। अन्यथा, फ्युचर ग्रुप भी amazon के शोषण में दम तोड़ देगा। अगर ऐसा हुआ तो यह भारत के खुदरा व्यपार की हार होगी।

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