दुनिया जब ईरान-इजराइल संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के मुहाने पर खड़ी है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक महा-दौरे पर निकले हैं। 15 मई से 20 मई 2026 तक चलने वाली इस पांच देशों की यात्रा की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से हुई है, जहाँ भारत के लिए ‘संकटमोचक’ बनते हुए यूएई ने ऊर्जा और तेल आपूर्ति को लेकर बड़े वादे किए हैं। यूएई के बाद पीएम मोदी नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जाएंगे, जो भारत के भविष्य की तकनीक और व्यापारिक नीतियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
यूएई में भव्य स्वागत और ऊर्जा सुरक्षा पर ‘महा-करार’
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का पहला पड़ाव यूएई रहा, जहाँ राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में, जहाँ कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता है, भारत और यूएई के बीच ‘स्ट्रैटजिक रिजर्व’ (रणनीतिक तेल भंडार) को लेकर हुआ समझौता सबसे महत्वपूर्ण है। यूएई ने आश्वासन दिया है कि भारत को एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। यह समझौता न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि आपातकालीन स्थिति के लिए भारत के रणनीतिक भंडारों को भी मजबूती प्रदान करेगा।
व्यापार और निवेश: भारतीय निर्यातकों के लिए नए द्वार
निर्यातकों के शीर्ष संगठन FIEO (फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस) के अनुसार, यह दौरा भारतीय व्यापार के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है। FIEO अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि पीएम मोदी की यह उच्चस्तरीय वार्ता इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, क्लीन एनर्जी और डिजिटल ट्रेड जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोलेगी। यूएई भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और यह अफ्रीका और मध्य पूर्व के बाजारों में भारतीय उत्पादों के प्रवेश के लिए एक प्रवेश द्वार (Gateway) की भूमिका निभाता है।
नीदरलैंड्स दौरा: सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन पर फोकस
यूएई के बाद पीएम मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड्स में रहेंगे। यहाँ डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन और किंग विलेम-अलेक्जेंडर के साथ उनकी मुलाकात में ‘भविष्य की तकनीक’ एजेंडा पर रहेगी। नीदरलैंड्स सेमीकंडक्टर निर्माण और जल प्रबंधन में विश्व स्तर पर अग्रणी है। भारत अपने ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ और ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ के लिए नीदरलैंड्स के साथ तकनीकी साझेदारी को अंतिम रूप दे सकता है। यह सहयोग भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक विश्वसनीय केंद्र बनाने में मदद करेगा।
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स्वीडन और नॉर्वे: इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन
17 मई को प्रधानमंत्री स्वीडन पहुँचेंगे, जहाँ वे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ को संबोधित करेंगे। इसके बाद 19 मई को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में तीसरा इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हरित विकास (Green Growth), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में नॉर्डिक देशों की विशेषज्ञता का लाभ उठाना है।
इटली यात्रा: रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा में बढ़ती साझेदारी
यात्रा के अंतिम चरण (19-20 मई) में पीएम मोदी इटली पहुंचेंगे। यहाँ प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी मुलाकात रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में स्थिरता पर केंद्रित होगी। हाल के वर्षों में भारत और इटली के बीच रक्षा सौदों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक में काफी घनिष्ठता आई है। इटली के साथ यह वार्ता भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम होगी।
वैश्विक कूटनीति में भारत का बढ़ता कद
प्रधानमंत्री की यह पांच देशों की यात्रा केवल द्विपक्षीय बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाती है। एक तरफ जहाँ यूएई जैसे खाड़ी देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यूरोप के विकसित देश भारत को तकनीक और निवेश के एक आदर्श गंतव्य के रूप में देख रहे हैं। 20 मई को जब यह दौरा समाप्त होगा, तब भारत के पास न केवल ऊर्जा का सुरक्षित भंडार होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक और रणनीतिक साझेदारी का एक नया और मजबूत ढांचा भी होगा।
































