केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद इस बार जो अभूतपूर्व माहौल बना है, उसने बोर्ड की पूरी मूल्यांकन प्रणाली (Evaluation System) पर बहुत बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमूमन हर साल परिणाम आने के बाद कुछ गिने-चुने छात्र ही री-चेकिंग या नंबरों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन इस बार सीबीएसई के इतिहास की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लाखों छात्र अपनी कॉपियों की स्कैन कॉपी देखने के लिए कतार में हैं। कोई नंबर कम मिलने से अवसाद में है, किसी को सही जवाब लिखने के बावजूद ‘जीरो’ नंबर मिलने का मलाल है। इस पूरे घटनाक्रम ने बोर्ड के डिजिटल चेकिंग सिस्टम यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) की विश्वसनीयता को पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया है।
इतिहास में पहली बार ‘अविश्वास’ का रिकॉर्ड: 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने मांगी कॉपी
सीबीएसई के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में कुल 17 लाख 80 हजार 365 छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 15 लाख 7 हजार 109 स्टूडेंट्स को उत्तीर्ण घोषित किया गया। बोर्ड ने करीब 98 लाख 60 हजार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अपने अत्याधुनिक ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के जरिए कराया था।
लेकिन, रिजल्ट जारी होने के बाद जैसे ही री-इवैल्यूएशन और स्कैन कॉपी के लिए आधिकारिक पोर्टल खोला गया, छात्रों की ऐसी भारी भीड़ उमड़ी कि शुरुआती 3 घंटों के भीतर ही 1.26 लाख से ज्यादा आवेदन दर्ज हो गए। अब तक कुल 4,04,319 छात्रों ने 11,31,961 उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी और मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई किया है। गणितीय आधार पर देखें तो यह कुल परीक्षार्थियों का लगभग 23 प्रतिशत है—यानी हर चौथा छात्र बोर्ड की चेकिंग प्रक्रिया पर सीधा सवाल उठा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश के सबसे बड़े बोर्ड के इतिहास में ऐसा व्यापक अविश्वास पहले कभी नहीं देखा गया।
पिछले साल के मुकाबले आवेदनों में 238% का रिकॉर्ड उछाल
अगर इस साल के आंकड़ों की तुलना बीते वर्ष से की जाए, तो सामने आने वाले आंकड़े बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं। साल 2025 में केवल 1.31 लाख छात्रों ने री-चेकिंग और नंबरों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया था, और तब करीब 2.82 लाख कॉपियों के मूल्यांकन को चुनौती दी गई थी। लेकिन इस साल यह संख्या सीधे बढ़कर 4 लाख से अधिक छात्रों और 11.31 लाख से ज्यादा कॉपियों तक पहुंच गई है। महज एक साल के भीतर आवेदनों में 238 प्रतिशत का यह भारी उछाल साफ तौर पर प्रमाणित करता है कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन तंत्र से पूरी तरह डगमगा गया है।
आखिर क्यों विवादों के घेरे में आया ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम?
सीबीएसई ने इस साल कॉपियों को तेजी से और पारदर्शी तरीके से जांचने के लिए डिजिटल ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को पूरी ताकत से लागू किया था। इस प्रक्रिया में छात्रों की कॉपियों को पहले स्कैन किया जाता है और फिर शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर ऑनलाइन तरीके से उनका मूल्यांकन करते हैं। बोर्ड का दावा था कि इससे मानवीय गलतियां खत्म होंगी, लेकिन जमीनी स्तर पर छात्रों की शिकायतें कुछ और ही भयावह कहानी बयां कर रही हैं:
सही उत्तरों पर शून्य अंक: कई मेधावी छात्रों का आरोप है कि उनके शत-प्रतिशत सही उत्तरों पर भी जांचकर्ताओं ने शून्य (0) अंक दे दिए हैं।
मल्टीपल चॉइस (MCQ) में गड़बड़ी: कई छात्रों का दावा है कि बहुविकल्पीय प्रश्नों के जवाब बिल्कुल सटीक होने के बावजूद उन्हें कोई नंबर नहीं मिला।
स्टेप मार्किंग की अनदेखी: गणित और विज्ञान जैसे विषयों में जहाँ स्टेप मार्किंग (चरणबद्ध अंक) का कड़ा नियम है, वहाँ सीधे पूरे नंबर काट लिए गए हैं।
धुंधली और अधूरी स्कैन कॉपियां: कॉपियों की गुणवत्ता इतनी खराब है कि कई छात्रों को बेहद धुंधली (Blur) स्कैन कॉपियां मिली हैं, तो कुछ छात्रों की कॉपियों के महत्वपूर्ण पन्ने ही डिजिटल पोर्टल से गायब हैं।
पांच दिनों से सीबीएसई का पोर्टल ठप, देर रात जागने को मजबूर छात्र
छात्रों और अभिभावकों की नाराजगी केवल नंबरों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि सीबीएसई के तकनीकी कुप्रबंधन ने उनकी मानसिक प्रताड़ना को और बढ़ा दिया है। पिछले पांच दिनों से सीबीएसई का मुख्य सर्वर और री-इवैल्यूएशन पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा है। वेबसाइट खोलने पर लगातार “Service Not Available” का एरर आ रहा है।
परेशान छात्रों का कहना है कि फॉर्म का एक पेज आगे बढ़ाने के लिए उन्हें 10 से 15 बार पेज को रिफ्रेश करना पड़ता है। दिनभर सर्वर पूरी तरह डाउन रहता है और देर रात 2:30 बजे के बाद कुछ समय के लिए सुचारू रूप से खुलता है। इस वजह से हजारों छात्र और उनके माता-पिता रात-रात भर जागकर फॉर्म भरने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं, कई छात्रों के बैंक खातों से आवेदन शुल्क (फीस) के पैसे कट गए, लेकिन पोर्टल पर उनका आवेदन सबमिट ही नहीं हुआ।
तीन कड़े स्तरों पर छात्र दे रहे हैं चुनौती, शिक्षा मंत्रालय हुआ सख्त
इस बार छात्र हार मानने के मूड में नहीं हैं और वे तीन अलग-अलग कानूनी चरणों में बोर्ड को चुनौती दे रहे हैं:
मार्क्स वेरिफिकेशन (टोटलिंग): पहले चरण में अंकों की गिनती और डेटा एंट्री की क्लैरिकल गलतियों को सुधारा जा रहा है।
स्कैन कॉपी प्राप्त करना: दूसरे चरण में छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका की पूरी फोटोकॉपी ऑनलाइन मंगा रहे हैं ताकि वे खुद अपनी आंखों से मूल्यांकन देख सकें।
री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन): तीसरे और अंतिम चरण में छात्र चुनिंदा प्रश्नों को दोबारा जांचने के लिए एक्सपर्ट्स को चुनौती दे रहे हैं।
मामले की गंभीरता और चौतरफा मचे बवाल को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई से सर्वर क्रैश होने, कॉपियों के धुंधले स्कैन और डिजिटल चेकिंग में हुई लापरवाही को लेकर एक विस्तृत और जवाबदेह रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय ने यह भी आदेश दिया है कि पेमेंट गेटवे को तुरंत दुरुस्त किया जाए और जिन छात्रों के पैसे असफल ट्रांजेक्शन में कटे हैं, उन्हें बैंकों के समन्वय से ऑटोमेटिक रिफंड दिया जाए।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कॉपियों की इस बड़े पैमाने पर गड़बड़ी को लेकर दोबारा परीक्षा (Re-Exam) कराने की मांग और चर्चाएं भी तैरने लगी हैं, लेकिन बोर्ड की तरफ से फिलहाल सारा ध्यान प्राप्त हुई 11.31 लाख कॉपियों की शिकायतों का निपटारा करने पर केंद्रित है, जिसमें से करीब 9 लाख कॉपियां छात्रों को डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।


































