करनाल SDM के खिलाफ खट्टर का एक्शन यही दर्शाता है कि सरकार चौटाला चला रहे हैं

खट्टर सरकार ने SDM आयुष सिन्हा को छुट्टी पर भेज दिया है!

करनाल एसडीएम आयुष सिन्हा

मोदी सरकार ने किसानों के लाभ के लिए तीन कृषि कानून पारित करवाए, तो अपनी राजनीतिक और आर्थिक विरासत के खत्म होने का पंजाब, हरियाण के कथित किसानों ने खूब विरोध किया। हालांकि, इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है। इसके विपरीत गठबंधन और पूर्ण बहुमत की सरकारों के बीच अंतर पुनः फिर दिखने लगा है। कथित किसानों की अराजकता के विरुद्ध ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही मोदी सरकार पर कोई कुछ नहीं बोल पा रहा है। वहीं इसी आक्रामक कार्रवाई का छोटा सा नमूना हरियाणा के करनाल जिले के एसडीएम आयुष सिन्हा ने दिखाया, तो किसानों ने हंगामा मचा दिया। कार्रवाई के बाद से सचिवालय के सामने धरने पर  बैठे कथित किसानों ने प्रशासन को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। ऐसे में कथित किसानों की मांगों को मानते हुए सरकार को एसडीएम आयुष सिन्हा के विरुद्ध कार्रवाई करनी पड़ी है। इस कार्रवाई का एक मात्र कारण है, राज्य में भाजापा-जेजेपी का गठबंधन… ध्यान देने वाली बात यह है कि जेजेपी प्रमुख एवं डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने करनाल के एसडीएम आयुष सिन्हा के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए थे। करनाल एसडीएम आयुष सिन्हा के खिलाफ खट्टर का एक्शन यही दर्शाता है कि सरकार चौटाला चला रहा है।

खट्टर सरकार ने एसडीएम आयुष सिन्हा को छुट्टी पर भेज दिया है

यह सर्वविदित है कि कथित किसानों ने पंजाब, हरियाणा से लेकर दिल्ली एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खूब अराजकता मचाई थी। 26 जनवरी के कांड के बाद तो उनके प्रति किसी के मन में भी सहानुभूति नहीं है। ऐसे में दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश में इन लोगों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। इसके विपरीत हरियाणा में गठबंधन के कारण सरकार पीछे रह जा रही है, जिसका ताजा नमूना एक बार फिर सामने आया है। कथित किसानों के विरुद्ध जिस तरह से करनाल के एसडीएम आयुष सिन्हा ने सख्ती दिखाते हुए बस्ताड़ा टोल प्लाजा पर लाठियां चलवाईं, उसके बाद अब एसडीएम आयुष सिन्हा के खिलाफ डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की आपत्ति के चलते कार्रवाई हो रही है।

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खबरों के मुताबिक कथित आंदोलनकारियों के विरुद्ध अभियान चलाने एवं उनके खिलाफ सख्ती का रुख दिखाने के लिए सिर फोड़ने की बात करने वाले एसडीएम आयुष सिन्हा के विरुद्ध ही एक्शन ले लिया गया है। एसडीएम आयुष सिन्हा के बयान के बाद से ही कथित आंदोलनकारी किसानों का एक बड़ा समूह जिला सचिवालय के सामने धरने पर बैठा था, जिसके बाद जिला प्रशासन उनके आगे झुक गया है। प्रशासन ने इनकी बात को मानते हुए आयुष सिन्हा को छुट्टी पर भेज दिया है, साथ ही उनके विरुद्ध जांच करने तक का भरोसा दिया है। करनाल के बस्ताड़ा टोल प्लाजा पर जिस तरह से कथित किसानों पर लाठीचार्ज किया गया था, उसके बाद से ही एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग हो रही थी, जिसे जिला प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है, जो कि इन अराजकता वादी किसानों के लिए जीत की तरह है।

‘कथित किसान’ फैसले से खुश हैं

कथित किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने जिला प्रशासन की कार्रवाई पर संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि वो अब अपने पुराने अड्डे टिकरी और सिंधू बॉर्डर पर जाएंगे। उनका ये बयान दर्शाता है कि एसडीएम पर हुई कार्रवाई के बाद इन सभी अराजकतावादी किसानों का जोश सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। वहीं इस फैसले को खट्टर सरकार की कमजोरी की तरह देखा जा रहा है, जो कि भाजपा के लिए मुसीबत का सबब हो सकती है।

भले ही ये निर्णय खट्टर सरकार के नाम पर लिया गया हो, किन्तु सत्य ये है कि इस निर्णय के पीछे मुख्य भूमिका जेजेपी नेता और भाजपा-जेजेपी गठबंधन वाली हरियाणा सरकार के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की है। बस्ताड़ा जिले में हुए लाठीचार्ज एवं एसडीएम आयुष सिन्हा का वीडियो सामने आने के बाद ही दुष्यंत चौटाला ने कार्रवाई की बात कही थी। चौटाला का रुख यही था कि किसी भी कीमत पर एसडीएम आयुष सिन्हा के वक्तव्यों एवं उनकी सोच के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। एक तरफ जहां 7 सितंबर से कथित किसान करनाल में जिला सचिवालय के सामने धरने पर बैठे थे तो दूसरी ओर एसडीएम आयुष सिन्हा कि खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे थे। नतीजा ये कि अब हरियाणा सरकार ने एसडीएम आयुष सिन्हा के खिलाफ एक्शन ले लिया है, और इसमें मुख्य भूमिका दुष्यंत चौटाला की ही है।

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ये पहली बार नहीं है कि हरियाणा सरकार ने को फैसला दुष्यंत चौटाला के इशारे पर लिया हो। राज्य में हरियाणा के लोगों के लिए 75 फीसदी आरक्षण का जेजेपी का वादा पूरा करवाने के मुद्दे पर भी चौटाला ने बीजेपी और सीएम मनोहर लाल खट्टर पर दबाव बनाया था। आरक्षण के उस मुद्दे पर भी ये ही सामने आया था कि चौटाला गठबंधन में होने के कारण सीएम मनोहर लाल खट्टर पर दबाव बना रहे हैं। दबाव का एक नया उदाहरण अब करनाल के एसडीएम आयुष सिन्हा पर कार्रवाई के फैसले पर भी सामने आया है। हालांकि, मजबूरी में लिया गया ये फैसला राज्य में भाजपा की कटिबद्धता के मुद्दे पर एक बड़ी चोट होगा, जो कि भविष्य के अन्य मुद्दों पर भी भाजपा पर भारी पड़ सकती है।

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