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क्रिप्टोकरेंसी का वो नकारात्मक पहलू जिस पर कोई प्रकाश नहीं डाल रहा

दुनिया के लिए उभरता हुआ खतरा है क्रिप्टोकरेंसी!

Abhinav Kumar द्वारा Abhinav Kumar
24 October 2021
in चर्चित
Bitcoin

Source- Google

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क्रिप्टोकरेंसी जब से मार्केट में आया है इसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। दुनिया बिटकॉइन जैसे कई क्रिप्टोकरेंसी को स्वीकार करने के लिए उत्साहित दिखाई दे रही है। हालांकि, मीडिया केवल क्रिप्टोकरेंसी में अपना अव्वल स्थान बना चुके बिटकॉइन के सकारात्मक पक्ष को दिखाने में व्यस्त है, जबकि इसका एक नकारात्मक पक्ष भी है, जिसपर चर्चा करना अति आवश्यक है। इस लेख में बिटकॉइन के नकारात्मक पक्ष को विस्तार से समझेंगे और यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि क्या हमें वास्तव में बिटकॉइन को स्वीकार करना चाहिए?

बिटकॉइन की लोकप्रियता इस तथ्य से परिलक्षित होती है कि 2020 में बिटकॉइन की कीमत चार गुना बढ़ चुकी थी और वर्ष के अंत तक इसकी कीमत 29,000 डॉलर के करीब पहुंच गयी थी। मौजूदा समय में इसकी कीमत 60,290 डॉलर के करीब पहुंच गई है। वैश्विक ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी बाजार में साल 2025 तक इसकी कीमत 57 बिलियन डॉलर से अधिक तक पहुंचने का अनुमान है। समस्या यह है कि वर्तमान में क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार के लिए कोई कानूनी नियम नहीं हैं। यहां तक कि कई देशों की सरकार भी बिटकॉइन जैसे क्रिप्टोकरेंसी को लेकर संशय में हैं। यही कारण है कि कोई भी विनियमित वित्तीय संस्थान क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन का समर्थन नहीं करता है।

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इसके अलावा नियमों की कमी के कारण क्रिप्टोकरेंसी को ट्रैक करना बेहद मुश्किल है और इसलिए लोग अक्सर इसका इस्तेमाल डार्क ट्रेडिंग के लिए करते हैं। इस प्रकार यदि यह सभी लेनदेन नियामकों के नियंत्रण से बाहर हैं, तो बिटकॉइन वित्तीय बाजार में उथल-पुथल लाने में प्रवण है।

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उभरता हुआ खतरा है क्रिप्टोकरेंसी

जब आप पैसे को ट्रैक नहीं कर सकते, तो लोग अवैध लेनदेन के लिए इसका फायदा उठाना शुरू कर देते हैं। डार्क वेब पर इसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग, फिरौती की मांग जैसे मामलों के लिए किया जा रहा है। साल 2017 और 2020 के बीच सबसे अधिक क्रिप्टोकरेंसी फंडिंग प्राप्त करने वाले अपराध के उदाहरण देखें, तो इसमें आतंकवादियों की फंडिंग, डार्क वेब पर ड्रग्स और हथियार का क्रय-विक्रय, कई तरह के घोटाले आदि शामिल हैं। इसके अलावा क्रिप्टो का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग और कर चोरी तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है।

हम देख सकते हैं कि कानून प्रवर्तन और सुरक्षा संगठनों द्वारा क्रिप्टोकरेंसी को एक उभरता हुआ खतरा क्यों माना जाता है। उदाहरण के लिए अगर भारत ने क्रिप्टोकरेंसी को वैध बना दिया तो फिर न तो मनी लॉन्ड्रिंग के स्रोतों का पता चलेगा और न ही आतंकी फंडिग का। पाकिस्तानी आतंकियों के लिए भी फंडिंग के नए रास्ते खुल जाएंगे और अमेरिका तथा अन्य देशों में बैठी भारत-विरोधी ताकतें इसका सबसे अधिक फायदा उठाएंगी तथा सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह जाएगा। यही कारण है कि भारत सरकार ने हाल ही में बजट सत्र के दौरान क्रिप्टो करेंसी से जुड़ा बिल, “The Cryptocurrency and Regulation of official digital currency Bill 2021” पारित किया था।

Source- Chainalysis

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तथ्य यह है कि ये समस्याएं वैसी ही हैं, जैसी हमारे पास नकदी अर्थव्यवस्था के साथ हैं। यदि समस्या बनी रहती है (या बढ़ जाती है जो कि स्पष्ट है), तो डिजिटल मुद्रा को चुनने का कोई मतलब नहीं है।

फरवरी 2021, की शुरुआत में जब टेस्ला ने बिटकॉइन में 1.5 बिलियन डॉलर की खरीददारी की और साथ ही यह घोषणा भी किया कि आगे जाकर वह भुगतान के रूप में क्रिप्टोकरेंसी को स्वीकार करेगा, तब बिटकॉइन की ओर लोगों का झुकाव ज्यादा बढ़ा था। टेस्ला के महत्वपूर्ण निवेश के साथ-साथ इस मामले पर हो रहे अन्य विकास से यह समझा जा सकता है कि ये नई डिजिटल मुद्राएं विश्व के वित्तीय मार्केट में अपने-अपने पांव जमा रही हैं और साथ ही साथ कई उद्योगों को बाधित भी कर रही हैं।

एक तरफ बिटकॉइन जैसे क्रिप्टोकरेंसी वैध लेन-देन और उपभोक्ताओं के बीच अपनी वैधता साबित करने में लगे हैं, तो दूसरी ओर ये अवैध गतिविधियों और अपराधियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी पर Chainalysis की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में अवैध क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन का मूल्य 10 बिलियन डॉलर पहुंच चुका था। हालांकि, वैश्विक स्तर पर लेन-देन देखा जाए, तो यह आंकड़े अधिक नहीं है, लेकिन यह इतने कम भी नहीं है कि इसे नजरअंदाज किया जा सके।

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इससे मिलेगा वित्तीय अपराधों को बढ़ावा

ब्लॉकचेन एक बेहतरीन तकनीक है और वास्तव में वित्तीय लेनदेन के लिए उपयोगी भी है। हालांकि, यह दिन-प्रतिदिन के लेनदेन को लक्षित नहीं करता है। क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के लिए ब्लॉकचेन तकनीक पर निर्भर करता है जो एक पारस्परिक समझौता आधारित Mutual Agreement पर आधारित प्रणाली है। ब्लॉकचेन तकनीक में कई स्थानों पर शेयरिंग और अपडेटिंग की आवश्यकता होती है, जिससे खुदरा लेनदेन के लिए सिस्टम बहुत धीमा हो जाता है।

अगर देखा जाये तो क्रिप्टोकरेंसी किसी भी तरह से विश्वसनीय नहीं है। नकारात्मक पक्ष सीधे तौर पर किसी भी देश की आंतरिक सुरक्षा को निशाना बनाते हैं। क्रिप्टोकरेंसी की चलन बढने से न सिर्फ देश में आतंकी गतिविधियों के बढने का डर रहेगा, बल्कि हर प्रकार के वित्तीय अपराधों को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे में यह आवश्यक है कि हम इस सवाल पर दोबारा विचार करें कि क्या हमें वास्तव में बिटकॉइन को स्वीकार करना चाहिए?

Tags: क्रिप्टोकरेंसीबिटकॉइन
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