जन धन योजना के रथ पर सवार होकर भारत ने financial inclusion में चीन को पीछे छोड़ दिया

अद्भुत!

जन धन योजना

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कहते हैं कि पेड़ तभी फलता-फूलता है, जब उसकी जड़ें मजबूत होती है और मकान तभी ऊंचा बन सकता है, जब नींव मजबूत होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में ही भारत के नव निर्माण का जो सपना दिखाया था, उसे साकार करने के लिए उन्होंने जो भी फैसले लिए, वो जड़ें मजबूत करने वाले ही थे, जिनका परिणाम अब सामने आ रहा है। एक तरफ जहां भारतीय अर्थव्यवस्था का उत्थान तेजी से हो रहा है, तो दूसरी ओर भारत चीन, जर्मनी को भी पीछे छोड़ने के रिकॉर्ड बना रहा है। इसका हालिया उदाहरण Financial Inclusion के मामले में आया है, जिसमें भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। ये बैंकिंग सेक्टर में मोदी सरकार के सकारात्मक फैसलों और सर्वाधिक महत्वाकांक्षी जन धन योजना का परिणाम है।

भारत का नया कारनामा

मोदी सरकार के फैसलों के परिणाम दिखने लगने लगे हैं। खबरों के मुताबिक SBI की रिपोर्ट बताती है कि मोदी सरकार की जन धन योजना, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और गांव-गांव खुले बीसी के प्रयासों के कारण भारत ने चीन, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़ दिया है। भारत अब प्रति 100,000 वयस्कों पर बैंक शाखाओं की उपलब्धता के मामले में चीन से कई गुना आगे निकल गया है। भारत में अब प्रति 100,000 वयस्कों पर बैंक शाखाओं की संख्या बढ़कर 14.7 हो गई, जो साल 2015 में 13.6 ही थी।

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दरअसल, SBI समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष द्वारा बनाई गई रिपोर्ट्स में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि वित्तीय समावेशन नीतियों का आर्थिक विकास, गरीबी और आय असमानता को कम करने के साथसाथ वित्तीय स्थिरता पर कई गुना प्रभाव डालता है।

केवल वित्तीय नहीं अपितु इस रिपोर्ट में अपराध की दर में कमी का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया, जिन राज्यों में प्रधानमंत्री जनधन योजना खाते अधिक हैं, वहां अपराध में स्पष्ट गिरावट देखी गई है। यह भी देखा गया है कि जिन राज्यों में अधिक PMJDY खाते खोले गए हैं, वहां शराब और तंबाकू उत्पादों जैसे नशीले पदार्थों की खपत में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण और आर्थिक रूप से सार्थक गिरावट आई है।

बड़े सुधार की पर्याय हैं ये योजनाएं

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 2014 से PMJDY खातों की शुरुआत की। यह एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और बैंक शाखाओं के सावधानीपूर्वक पुनर्गणना द्वारा सक्षम है और इस तरह वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने के लिए बीसी मॉडल का विवेकपूर्ण उपयोग कर रहा है। इस तरह के वित्तीय समावेशन को डिजिटल भुगतान के उपयोग से भी सक्षम किया गया है, क्योंकि 2015 और 2020 के बीच प्रति 1,000 वयस्कों पर मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग लेनदेन 2019 में बढ़कर 13,615 हो गए हैं, जो 2015 में 183 थे।

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इसमें कहा गया, “2017 की नई शाखा प्राधिकरण नीति, जो बीसी को मान्यता देती है , प्रति दिन न्यूनतम 4 घंटे और सप्ताह में कम से कम 5 दिन बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, ‘गांवों में बैंकिंग आउटलेटबीसीकी संख्या मार्च, 2010 में 34,174 से बढ़कर दिसंबर‘ 2020 में 12.4 लाख हो गई है।

भारत ऐसे वक्त में आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ रहा है, जब विश्व कोरोना से जूझ रहा है। भारत अब विकसित देशों को भी टक्कर देने की स्थिति में आ चुका है। ये सभी सकारात्मक तस्वीरें केवल‌ इसलिए ही दिख रही हैं, क्योंकि मोदी सरकार ने बैंकिंग सेक्टर समेत सभी क्षेत्रों में बहुआयामी फैसले लिए है, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

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