भारतीय स्कूलों का नाम कुख्यात ‘संत’ फ्रांसिस जेवियर के नाम पर क्यों रखा जाता है?

सेंट जेवियर ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थी फिर भी...

सेंट जेवियर

आज से लगभग 500 साल पहले एक दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। उस समय जैन राजा कुमुद गोवा पर शासन कर रहे थे। पुर्तगालियों ने उन्हें जबरन हटाकर गोवा पर कब्जा कर लिया था। गोवा पर कब्जा करने के बाद गोवा की जनता पर भी कब्जा करना शुरू किया गया। वहीं, कैथोलिक पादरियों ने पुर्तगाली सेना के साथ बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों का धर्म परिवर्तन करने के लिए हमला कर दिया। पादरियों ने पूरे गोवा शहर पर कब्जा कर लिया और लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए धमकाया और मजबूर किया। जिन्होंने धर्म परिवर्तन का विरोध किया और धर्म परिवर्तन से इनकार किया, उन्हें बेरहमी से मार डाला गया। दरअसल, हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि धर्मांतरण को लेकर कुछ पादरियों ने न केवल देश को भटकाने की कोशिश की अपितु आज यह समुदाय पूरे देश में सेंट जेवियर (St. Xavier’s) स्कूल स्थापित कर चुका है।

सेंट जेवियर के क्रूरता की कहानी

गोवा में जिस व्यक्ति ने 22 हजार लोगों को मारा था, असल में उस व्यक्ति का नाम सेंट जेवियर था। जब गोवा के जैन समुदाय ने धर्मांतरण से मना कर दिया तब एक बड़े मैदान में, राजा कुमुद और धर्मी दर्शकों, लड़के और लड़कियों को बांध दिया गया था। फिर एक के बाद एक लोगों की बेरहमी से हत्या की जाने लगी। क्रिश्चियन जेवियर मर रहे लोगों के चेहरे पर मुस्कुरा रहे थे। सेंट जेवियर ने तब सबके सामने यह कहा था कि यह हालत उन सबकी होगी, जो ईसाई बनने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं, मौत के तमाशे से इस सन्देश को दुनिया तक पहुँचाने की तमन्ना सेंट जेवियर ने पूरी की थी।

और पढ़ें : अब कर्नाटक में धर्मांतरण कराने वालों की खैर नहीं, 10 साल की जेल और 1 लाख जुर्माना का प्रावधान

दरअसल, ईसाई मिशनरियों ने जैन राजा कुमुद और गोवा के सभी 22,000 जैनियों को 6 महीने के भीतर ईसाई धर्म में परिवर्तित करने, जैन धर्म को त्यागने और ईसाई धर्म स्वीकार करने या मृत्यु का सामना करने की धमकी दी लेकिन राजा कुमुद और जैन मरने के लिए तैयार थे और उन लोगों ने धर्मांतरण से इनकार कर दिया। इस छह महीनों के दौरान, क्रिश्चियन जेवियर ने साम (विनम्रता से), दाम (पैसा), दंड (दंड), भेद (विभाजन) का इस्तेमाल करके जैनियों को धर्मान्तरित करने के लिए हर संभव प्रयास किया लेकिन तब भी जैनों ने धर्मांतरण नहीं किया। फिर झल्लाय हुए क्रूर जेवियर ने सभी लोगों को मार दिया।

अगर आपके बच्चे, आपका भाई या आपकी बहन, जो भी ICSE में पढ़ रहा होगा तो अपने सेंट जेवियर्स स्कूल और कॉलेज का नाम अवश्य सुना होगा। भारत के हर बड़े शहर में एक स्कूल अवश्य होता है, जिसका नाम सेंट जेवियर्स के नाम पर रखा गया हो। कभी आपने सोचा है कि असल में ये जेवियर था कौन? या आप भी एक बढ़िया गुणवत्ता के नाम पर एक क्रूर ईसाई के नामपर बने स्कूल में अपने बच्चों को भेज रहे हैं।

पश्चिमीकरण के दीमक से पार पाने की है जरुरत

बता दें कि कैथोलिक धर्म की मुख्य आबादी ने सेंट जेवियर की सराहना की थी। जेवियर को विविध भूभाग देकर सम्मानित किया गया था और इस रक्तपात के बाद, फ्रांसिस जेवियर को सेंट जेवियर के रूप में पहचाना गया। आगे चलकर सेंट जेवियर का नाम भारत में अंग्रेजी स्कूलों और कॉलेजों की श्रेणी में जोड़ा गया। आज भारत में सबसे बड़ा स्कूल नेटवर्क सेंट जेवियर्स है। हजारों जैनियों और हिंदुओं के खून से लथपथ एक क्रूर ईसाई पादरी के नाम से चलाए जा रहे स्कूल में लोग बड़ी मात्रा में चंदा देकर अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजने को तैयार हैं!

और पढ़ें : गुजरात के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा ‘वैदिक गणित’, दूसरे राज्यों को भी इसे अपनाना चाहिए

ऐसे में, इस इतिहास को जानने के बाद हमें उनसे प्रेरणा लेकर धर्मांतरण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। आज के जीवन में पश्चिमीकरण और ईसाई धर्म का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। आज इस हिन्दू बाहुल्य देश में लोग हिंदू पंचांग की तारीख-महीने भूल रहे हैं। पश्चिमीकरण का दीमक हमें अंदर से कमजोर करता जा रहा है। वहीं, सरकार को भी इस मोर्चे पर काम करने की आवशयकता है।

Exit mobile version