तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी के लिए इन दिनों राजनीतिक चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी में लगातार हो रहे इस्तीफों और अंदरूनी असंतोष के बीच अब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस सप्ताह टीएमसी छोड़ने वाली वह दूसरी राज्यसभा सांसद हैं, जिससे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष की चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, सुष्मिता देव ने बुधवार सुबह राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने केवल राज्यसभा की सदस्यता ही नहीं छोड़ी, बल्कि असम में तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से भी इस्तीफा दे दिया। इससे असम में टीएमसी के संगठन को बड़ा झटका माना जा रहा है।
इस्तीफे के बाद बोलीं- अब मैं एक आजाद महिला हूं
इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सुष्मिता देव ने कहा, “आज मैं एक आजाद महिला हूं। मैं हिमंता दा (असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा) को लंबे समय से जानती हूं। मैं उनसे केवल शिष्टाचार मुलाकात के लिए गई थी। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि कौन क्या कर रहा है। साथ ही मैं बंगाल की राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं हूं क्योंकि मैं असम से हूं।”
हालांकि, उनके इस बयान के बावजूद राजनीतिक गलियारों में उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से उनकी मुलाकात ने इन चर्चाओं को और हवा दी है। हालांकि, उन्होंने अभी तक किसी नई पार्टी में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
कांग्रेस से टीएमसी तक का राजनीतिक सफर
53 वर्षीय सुष्मिता देव ने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। उस समय उन्होंने कहा था कि वह जनता की सेवा के लिए एक नई राजनीतिक यात्रा शुरू कर रही हैं। इससे पहले वह कांग्रेस की महिला इकाई ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं और असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रह चुकी हैं। उनके पिता संतोष मोहन देव असम कांग्रेस के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता थे।
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी टीएमसी छोड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने अपने बयान में पार्टी और पश्चिम बंगाल में उसकी 15 साल की सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।
बंगाल से दिल्ली तक बढ़ा पार्टी के भीतर असंतोष
इसी बीच पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के भीतर असंतोष सामने आया है। हाल ही में टीएमसी के 58 विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोवनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया था। वहीं, खबरों के अनुसार पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की बात कही है। लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों से ममता बनर्जी की पार्टी के भीतर बढ़ते बिखराव की चर्चा तेज हो गई है।






























