TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला: रमज़ान में मुसलमानों की हत्या पाकिस्तान के लिए नई बात नहीं

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    एलपीजी गैस संकट हुआ खत्म

    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी, रसोई गैस महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    बिपिन रावत

    ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’: जनरल बिपिन रावत का सेना को लेकर देखा गया स्वप्न फ़िलहाल अधूरा ज़रूर है, लेकिन उसने सैन्य सुधार की एक मज़बूत नींव रख दी है

    Indian navy in hormuz and trump

    होर्मुज़ संकट: इधर ट्रम्प चीन से मदद मांग रहे हैं, उधर इंडियन नेवी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ को साथ लेकर भारत लौट रही है

    भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

    नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

    सुखोई-30 विमान दुर्घटना

    सुखोई-30 विमान हादसा: स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    14 मार्च 2005 को चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    भारत को मिली अहम ऊर्जा राहत,

    उड़ती मिसाइलों और आग उगलते ड्रोन के बीच एलपीजी लेकर आने वाले शिवालिक और नंदादेवी के क्रू की हो रही है जमकर तारीफ

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    दुनिया भर में मुसलमान ईद मना रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में मुस्लिमों के एक वर्ग पर ईद मनाने पर प्रतिबंध क्यों है? अहमदिया मुस्लिम क्यों नहीं मना सकते ईद ?

 


    दुनिया भर में मुसलमान ईद मना रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में मुस्लिमों के एक वर्ग पर ईद मनाने पर प्रतिबंध क्यों है? अहमदिया मुस्लिम क्यों नहीं मना सकते ईद ?

 


    वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

    वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

    हिंदू नववर्ष, हिंदू नव वर्ष का विज्ञान, चैत्र नववर्ष

    अंग्रेजी नववर्ष से कितना अलग है हिंदू नववर्ष? जानें इसके पीछे का विज्ञान।

    सारा अली खान को केदारनाथ दौरे के लिए देना होगा एफिडेविट

    सारा अली खान को केदारनाथ दौरे के लिए देना होगा एफिडेविट

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    सुनील गावस्कर का सनग्रुप से तीखा सवाल

    सुनील गावस्कर का काव्या मारन की टीम से सीधा तीखा सवाल…कहां भारतीयों के खून का पैसा बर्बाद न करें

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला: रमज़ान में मुसलमानों की हत्या पाकिस्तान के लिए नई बात नहीं

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    एलपीजी गैस संकट हुआ खत्म

    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी, रसोई गैस महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    बिपिन रावत

    ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’: जनरल बिपिन रावत का सेना को लेकर देखा गया स्वप्न फ़िलहाल अधूरा ज़रूर है, लेकिन उसने सैन्य सुधार की एक मज़बूत नींव रख दी है

    Indian navy in hormuz and trump

    होर्मुज़ संकट: इधर ट्रम्प चीन से मदद मांग रहे हैं, उधर इंडियन नेवी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ को साथ लेकर भारत लौट रही है

    भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

    नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

    सुखोई-30 विमान दुर्घटना

    सुखोई-30 विमान हादसा: स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    14 मार्च 2005 को चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    भारत को मिली अहम ऊर्जा राहत,

    उड़ती मिसाइलों और आग उगलते ड्रोन के बीच एलपीजी लेकर आने वाले शिवालिक और नंदादेवी के क्रू की हो रही है जमकर तारीफ

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    दुनिया भर में मुसलमान ईद मना रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में मुस्लिमों के एक वर्ग पर ईद मनाने पर प्रतिबंध क्यों है? अहमदिया मुस्लिम क्यों नहीं मना सकते ईद ?

 


    दुनिया भर में मुसलमान ईद मना रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में मुस्लिमों के एक वर्ग पर ईद मनाने पर प्रतिबंध क्यों है? अहमदिया मुस्लिम क्यों नहीं मना सकते ईद ?

 


    वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

    वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

    हिंदू नववर्ष, हिंदू नव वर्ष का विज्ञान, चैत्र नववर्ष

    अंग्रेजी नववर्ष से कितना अलग है हिंदू नववर्ष? जानें इसके पीछे का विज्ञान।

    सारा अली खान को केदारनाथ दौरे के लिए देना होगा एफिडेविट

    सारा अली खान को केदारनाथ दौरे के लिए देना होगा एफिडेविट

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    सुनील गावस्कर का सनग्रुप से तीखा सवाल

    सुनील गावस्कर का काव्या मारन की टीम से सीधा तीखा सवाल…कहां भारतीयों के खून का पैसा बर्बाद न करें

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

The Tashkent Declaration: एक ऐसा समझौता जो आज भी भारत को ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से परेशान करता है

कुछ घाव समय के साथ भी नहीं भरते!

Shikhar Srivastava द्वारा Shikhar Srivastava
10 January 2022
in इतिहास
Tashkent Declaration

Source- Google

Share on FacebookShare on X

10 जनवरी 1966, भारत और पाकिस्तान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि इसी दिन ताशकंद में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल मोहम्मद अयूब खान ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हुए शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था। ताशकंद समझौते को भारत की कूटनीतिक हार माना जाता है, क्योंकि अपनी सैन्य शक्ति के बल पर मिली विजय को भारत ने कूटनीतिक मंच पर स्वयं ही पराजय के रूप में बदल दिया था। यहां तक कि उस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले तत्कालीन लाल बहादुर शास्त्री की धर्मपत्नी ललिता शास्त्री भी समझौते की शर्तों को सुनकर अपने पति से नाराज हो गई थी। इस समझौते के अगले दिन 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर 1965 के युद्ध के बाद हुए समझौते में भारत ने क्या गंवाया और कैसे यह जख्म आज भी भारत को परेशान करता है।

और पढ़ें: 1965 भारत-पाक युद्ध: चाविंडा की वह लड़ाई जो भुला दी गयी

संबंधितपोस्ट

हाजी पीर दर्रा: भूली हुई जीत, जिंदा ज़ख्म — पुरानी भूल सुधारने का यही वक्त है

जब राजनीति ने विज्ञान से सीखा… लाल बहादुर शास्त्री और मेरी क्युरी, जेल की दीवारों के बीच देशसेवा वाला कनेक्शन

जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

और लोड करें

1965 युद्ध : पाकिस्तान के दंभ का परिणाम

वर्ष 1962 में चीन के हाथों मिली पराजय के बाद भारतीय सेना का मनोबल गिर चुका था। भारतीय सेना परिवर्तन के दौर से गुजर रही थी, जबकि पाकिस्तान दक्षिण एशिया में अमेरिका का सबसे विश्वसनीय सहयोगी बन चुका था और बगदाद पैक्ट का हिस्सा था। बगदाद पैक्ट के कारण पाकिस्तान को अत्याधुनिक अमेरिकी हथियार, लड़ाकू विमान, टैंक आदि मिल चुके थे और पाकिस्तान को उसी बल पर अपनी विजय सुनिश्चित दिख रही थी।

दरअसल, वर्ष 1965 में कश्मीर में अस्थिरता बढ़ रही थी और पाकिस्तान ने इसका फायदा उठाने के उद्देश्य से भारत पर हमला किया। 1 सितंबर 1965 को कश्मीर पर हमला हुआ। भारत इस हमले से अचंभित रह गया और शुरुआती 5 दिन की लड़ाई में पाकिस्तान की फौज भारत पर भारी पड़ी। किंतु 6 सितंबर को भारत ने पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान पर हमला किया और युद्ध का रुख बदल गया। पाकिस्तान को उम्मीद नहीं थी कि भारत पंजाब की ओर से हमला करेगा, क्योंकि यह हिस्सा कभी विवादित क्षेत्र नहीं रहा था, जबकि कश्मीर को दुनिया विवादित मानती थी। किन्तु तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री ने यह साहसिक निर्णय किया। जिसके बाद कुछ ही दिनों में भारतीय फौज लाहौर, सियालकोट तक पहुंच गई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव में दोनों पक्षों ने सीजफायर प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

और पढ़ें: 1965: हाजी पीर पास का वो युद्ध जो भारत जमीन पर जीत कर भी टेबल पर हार गया

युद्ध लंबा चलता तो भारत एकतरफा विजयी होता

भारतीय पक्ष और विश्व के अधिकांश मिलिट्री विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यह युद्ध कुछ दिन और चलता तो भारत निर्णायक रूप से पाकिस्तान पर विजय प्राप्त कर सकता था। भारत के पूर्व एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह ने वर्ष 2015 में अपने एक इंटरव्यू में यह बात कही थी कि “राजनीतिक कारणों से पाकिस्तान 1965 के युद्ध में जीत का दावा करता है। मेरी राय में, युद्ध एक प्रकार के गतिरोध में समाप्त हुआ। हम ताकत की स्थिति में थे, यदि युद्ध कुछ और दिन चलता तो हमें निर्णायक विजय प्राप्त होती। मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को युद्धविराम के लिए सहमत न होने की सलाह दी थी। लेकिन मुझे लगता है कि उन पर संयुक्त राष्ट्र और कुछ देशों का दबाव था।”

भारत द्वारा सीजफायर स्वीकार करने का एक कारण आर्मी चीफ जयंतो नाथ चौधरी द्वारा प्रधानमंत्री को दी गई गलत जानकारी थी। जब लाल बहादुर शास्त्री ने आर्मी चीफ से यह पूछा कि भारत अभी कितने दिन युद्ध और लड़ सकता है, तो उन्होंने बताया कि भारत के पास अभी अधिक गोला बारूद नहीं बचा है। जबकि वास्तविकता यह थी कि भारत ने अपने पूरे आयुध सामग्री का केवल 14 से 20% का प्रयोग किया था, जबकि पाकिस्तान 80% आयुध सामग्री प्रयोग कर चुका था। ऐसे में कुछ दिनों की लड़ाई में भारत आसानी से पाकिस्तानी पंजाब का एक बड़ा हिस्सा जीत सकता था।

और पढ़ें: JFR Jacob – भारत के वो शूरवीर जिन्होंने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के पराजय की पटकथा रची

सोवियत संघ ने नहीं दिया था साथ

वर्ष 1965 के युद्ध के बाद भारत ने कश्मीर में जितने हिस्से पाकिस्तान के हाथों गंवाए थे, उसका 3 गुना हिस्सा भारतीय सेना ने पाकिस्तानी पंजाब में जीत लिया था। किंतु भारत में समझौते के समय अपनी सैन्य उपलब्धि का सही प्रयोग नहीं किया। भारत सरकार चाहती, तो पाकिस्तान पर दबाव बनाकर न्यू वार क्लॉज पर पाकिस्तान को सहमत कर सकती थी, अर्थात् पाकिस्तान यह स्वीकार करता कि वह कभी भी युद्ध का पहल नहीं करेगा। गौरतलब है कि भारत के लिए कश्मीर का जितना सामरिक और आर्थिक महत्व है, उससे बहुत अधिक महत्व पाकिस्तानी पंजाब का पाकिस्तान के लिए है। ऐसे में भारत चाहता, तो इस बात पर अड़ सकता था कि पाकिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर को खाली करे, तभी उसे पाकिस्तानी पंजाब के हिस्से वापस मिलेंगे। किन्तु भारत कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल नहीं कर सका।

ध्यान देने वाली बात है कि निश्चित रूप से लाल बहादुर शास्त्री ने बहुत विपरीत परिस्थितियों में भारत का नेतृत्व किया था। उस समय पाकिस्तान के पास अमेरिका जैसा सहयोगी था, जबकि भारत कूटनीतिक स्तर पर अकेले खड़ा था। नेहरू अपने पूरे शासन में सोवियत रूस के प्रवक्ता बने रहे, किंतु सोवियत रूस ने वर्ष 1965 में कूटनीतिक स्तर पर भारत की कोई सहायता नहीं की। दूसरी ओर चीन को पाकिस्तान का सहयोग भी प्राप्त था। ऐसे में लाल बहादुर शास्त्री अत्यधिक दबाव में निर्णय ले रहे थे। संभवत: यही कारण था कि भारत ने अपनी सैन्य उपलब्धि को कॉन्फ्रेंस टेबल पर अपनी पराजय में स्वयं ही बदल दिया!

और पढ़ें: विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी बोले डर था, भारत हमला न कर दे इसलिए अभिनंदन को लौटाना पड़ा

Tags: जयंतो नाथ चौधरीताशकंद समझौतालाल बहादुर शास्त्री
शेयर100ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

सोनू सूद की बहन मालविका पंजाब कांग्रेस से लड़ेंगी 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव

अगली पोस्ट

भारत के अनुरोध से पाकिस्तान पर शस्त्र प्रतिबंध लगा सकता है फ्रांस

संबंधित पोस्ट

वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन
इतिहास

वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

20 March 2026

वह 24 साल के थे उन्होंने एक सैनिक की वर्दी पहनी, कंधे पर एक राइफल टांगी, और अपने महल से बाहर उस रात में कदम...

जुंदिशापुर: ईरान का वो शहर जिसने भारतीय ज्ञान परंपरा को अरब और फिर यूरोप तक पहुंचाया, कभी वराहमिहिर ने स्थापित की थी वेधशाला
इतिहास

जुंदिशापुर: ईरान का वो शहर जिसने भारतीय ज्ञान परंपरा को अरब और फिर यूरोप तक पहुंचाया, कभी वराहमिहिर ने स्थापित की थी वेधशाला

16 March 2026

ईरान और अमेरिका / इजरायल के बीच युद्ध जारी हैं। दो सप्ताह से ज्यादा समय हो चुका हैं। एक दूसरे पर जबर्दस्त बमबारी हो रही...

खानवा का वो युद्ध: अगर राणा सांगा बाबर के विरुद्ध विजयी होते, तो?
इतिहास

खानवा का वो युद्ध: अगर राणा सांगा बाबर के विरुद्ध विजयी होते, तो?

16 March 2026

“राणा सांगा अपनी वीरता और तलवार के बल पर अत्यधिक शक्तिशाली हो गया है। वास्तव में उसका राज्य चित्तौड़ में था। मांडू के सुल्तानों के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05

India’s Swadesi ‘Meteor’: World’s Most Lethal BVR Missile | Gandiv| SFDR | DRDO

00:06:48
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited