TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    युवराज की मौत: लापरवाही, लाचारी और जवाबदेही का सवाल

    नोएडा में सिस्टम की लापरवाही से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत

    युवराज की मौत: लापरवाही, लाचारी और जवाबदेही का सवाल

    नितिन नबीन के ताजपोशी में पीएम मोदी ने खुद को बताया कार्यकर्ता , बीजेपी ऑफिस में जश्न का माहौल

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    सिमरन बाला 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर क्या खास करने वाली है

    पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच पली-बढ़ीं, अब गणतंंत्र दिवस परेड में CRPF की पुरुष टुकड़ी का करेंगी नेतृत्व, जानिए कौन हैं जम्मू-कश्मीर का नाम रौशन करने वालीं सिमरन बाला?

    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    भारतीय नौसेना पानी और ज़मीन दोनों से उड़ान भर सकने वाले उभयचर विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय नौसेना का नया प्लान, पानी पर नए रनवे बनाने की तैयारी

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    विदेश मंत्रालय का स्पष्ट जवाब: 500% अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा

    ईरान पर ट्रंप का गुस्सा, देश तबाह करने की बात

    ट्रंप की ईरान को खुली धमकी: कहा- पूरा देश तबाह कर देंगे

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    युवराज की मौत: लापरवाही, लाचारी और जवाबदेही का सवाल

    नोएडा में सिस्टम की लापरवाही से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत

    युवराज की मौत: लापरवाही, लाचारी और जवाबदेही का सवाल

    नितिन नबीन के ताजपोशी में पीएम मोदी ने खुद को बताया कार्यकर्ता , बीजेपी ऑफिस में जश्न का माहौल

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    सिमरन बाला 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर क्या खास करने वाली है

    पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच पली-बढ़ीं, अब गणतंंत्र दिवस परेड में CRPF की पुरुष टुकड़ी का करेंगी नेतृत्व, जानिए कौन हैं जम्मू-कश्मीर का नाम रौशन करने वालीं सिमरन बाला?

    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    भारतीय नौसेना पानी और ज़मीन दोनों से उड़ान भर सकने वाले उभयचर विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय नौसेना का नया प्लान, पानी पर नए रनवे बनाने की तैयारी

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    विदेश मंत्रालय का स्पष्ट जवाब: 500% अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा

    ईरान पर ट्रंप का गुस्सा, देश तबाह करने की बात

    ट्रंप की ईरान को खुली धमकी: कहा- पूरा देश तबाह कर देंगे

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

The Tashkent Declaration: एक ऐसा समझौता जो आज भी भारत को ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से परेशान करता है

कुछ घाव समय के साथ भी नहीं भरते!

Shikhar Srivastava द्वारा Shikhar Srivastava
10 January 2022
in इतिहास
Tashkent Declaration

Source- Google

Share on FacebookShare on X

10 जनवरी 1966, भारत और पाकिस्तान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि इसी दिन ताशकंद में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल मोहम्मद अयूब खान ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हुए शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था। ताशकंद समझौते को भारत की कूटनीतिक हार माना जाता है, क्योंकि अपनी सैन्य शक्ति के बल पर मिली विजय को भारत ने कूटनीतिक मंच पर स्वयं ही पराजय के रूप में बदल दिया था। यहां तक कि उस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले तत्कालीन लाल बहादुर शास्त्री की धर्मपत्नी ललिता शास्त्री भी समझौते की शर्तों को सुनकर अपने पति से नाराज हो गई थी। इस समझौते के अगले दिन 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर 1965 के युद्ध के बाद हुए समझौते में भारत ने क्या गंवाया और कैसे यह जख्म आज भी भारत को परेशान करता है।

और पढ़ें: 1965 भारत-पाक युद्ध: चाविंडा की वह लड़ाई जो भुला दी गयी

संबंधितपोस्ट

हाजी पीर दर्रा: भूली हुई जीत, जिंदा ज़ख्म — पुरानी भूल सुधारने का यही वक्त है

जब राजनीति ने विज्ञान से सीखा… लाल बहादुर शास्त्री और मेरी क्युरी, जेल की दीवारों के बीच देशसेवा वाला कनेक्शन

जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

और लोड करें

1965 युद्ध : पाकिस्तान के दंभ का परिणाम

वर्ष 1962 में चीन के हाथों मिली पराजय के बाद भारतीय सेना का मनोबल गिर चुका था। भारतीय सेना परिवर्तन के दौर से गुजर रही थी, जबकि पाकिस्तान दक्षिण एशिया में अमेरिका का सबसे विश्वसनीय सहयोगी बन चुका था और बगदाद पैक्ट का हिस्सा था। बगदाद पैक्ट के कारण पाकिस्तान को अत्याधुनिक अमेरिकी हथियार, लड़ाकू विमान, टैंक आदि मिल चुके थे और पाकिस्तान को उसी बल पर अपनी विजय सुनिश्चित दिख रही थी।

दरअसल, वर्ष 1965 में कश्मीर में अस्थिरता बढ़ रही थी और पाकिस्तान ने इसका फायदा उठाने के उद्देश्य से भारत पर हमला किया। 1 सितंबर 1965 को कश्मीर पर हमला हुआ। भारत इस हमले से अचंभित रह गया और शुरुआती 5 दिन की लड़ाई में पाकिस्तान की फौज भारत पर भारी पड़ी। किंतु 6 सितंबर को भारत ने पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान पर हमला किया और युद्ध का रुख बदल गया। पाकिस्तान को उम्मीद नहीं थी कि भारत पंजाब की ओर से हमला करेगा, क्योंकि यह हिस्सा कभी विवादित क्षेत्र नहीं रहा था, जबकि कश्मीर को दुनिया विवादित मानती थी। किन्तु तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री ने यह साहसिक निर्णय किया। जिसके बाद कुछ ही दिनों में भारतीय फौज लाहौर, सियालकोट तक पहुंच गई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव में दोनों पक्षों ने सीजफायर प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

और पढ़ें: 1965: हाजी पीर पास का वो युद्ध जो भारत जमीन पर जीत कर भी टेबल पर हार गया

युद्ध लंबा चलता तो भारत एकतरफा विजयी होता

भारतीय पक्ष और विश्व के अधिकांश मिलिट्री विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यह युद्ध कुछ दिन और चलता तो भारत निर्णायक रूप से पाकिस्तान पर विजय प्राप्त कर सकता था। भारत के पूर्व एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह ने वर्ष 2015 में अपने एक इंटरव्यू में यह बात कही थी कि “राजनीतिक कारणों से पाकिस्तान 1965 के युद्ध में जीत का दावा करता है। मेरी राय में, युद्ध एक प्रकार के गतिरोध में समाप्त हुआ। हम ताकत की स्थिति में थे, यदि युद्ध कुछ और दिन चलता तो हमें निर्णायक विजय प्राप्त होती। मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को युद्धविराम के लिए सहमत न होने की सलाह दी थी। लेकिन मुझे लगता है कि उन पर संयुक्त राष्ट्र और कुछ देशों का दबाव था।”

भारत द्वारा सीजफायर स्वीकार करने का एक कारण आर्मी चीफ जयंतो नाथ चौधरी द्वारा प्रधानमंत्री को दी गई गलत जानकारी थी। जब लाल बहादुर शास्त्री ने आर्मी चीफ से यह पूछा कि भारत अभी कितने दिन युद्ध और लड़ सकता है, तो उन्होंने बताया कि भारत के पास अभी अधिक गोला बारूद नहीं बचा है। जबकि वास्तविकता यह थी कि भारत ने अपने पूरे आयुध सामग्री का केवल 14 से 20% का प्रयोग किया था, जबकि पाकिस्तान 80% आयुध सामग्री प्रयोग कर चुका था। ऐसे में कुछ दिनों की लड़ाई में भारत आसानी से पाकिस्तानी पंजाब का एक बड़ा हिस्सा जीत सकता था।

और पढ़ें: JFR Jacob – भारत के वो शूरवीर जिन्होंने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के पराजय की पटकथा रची

सोवियत संघ ने नहीं दिया था साथ

वर्ष 1965 के युद्ध के बाद भारत ने कश्मीर में जितने हिस्से पाकिस्तान के हाथों गंवाए थे, उसका 3 गुना हिस्सा भारतीय सेना ने पाकिस्तानी पंजाब में जीत लिया था। किंतु भारत में समझौते के समय अपनी सैन्य उपलब्धि का सही प्रयोग नहीं किया। भारत सरकार चाहती, तो पाकिस्तान पर दबाव बनाकर न्यू वार क्लॉज पर पाकिस्तान को सहमत कर सकती थी, अर्थात् पाकिस्तान यह स्वीकार करता कि वह कभी भी युद्ध का पहल नहीं करेगा। गौरतलब है कि भारत के लिए कश्मीर का जितना सामरिक और आर्थिक महत्व है, उससे बहुत अधिक महत्व पाकिस्तानी पंजाब का पाकिस्तान के लिए है। ऐसे में भारत चाहता, तो इस बात पर अड़ सकता था कि पाकिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर को खाली करे, तभी उसे पाकिस्तानी पंजाब के हिस्से वापस मिलेंगे। किन्तु भारत कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल नहीं कर सका।

ध्यान देने वाली बात है कि निश्चित रूप से लाल बहादुर शास्त्री ने बहुत विपरीत परिस्थितियों में भारत का नेतृत्व किया था। उस समय पाकिस्तान के पास अमेरिका जैसा सहयोगी था, जबकि भारत कूटनीतिक स्तर पर अकेले खड़ा था। नेहरू अपने पूरे शासन में सोवियत रूस के प्रवक्ता बने रहे, किंतु सोवियत रूस ने वर्ष 1965 में कूटनीतिक स्तर पर भारत की कोई सहायता नहीं की। दूसरी ओर चीन को पाकिस्तान का सहयोग भी प्राप्त था। ऐसे में लाल बहादुर शास्त्री अत्यधिक दबाव में निर्णय ले रहे थे। संभवत: यही कारण था कि भारत ने अपनी सैन्य उपलब्धि को कॉन्फ्रेंस टेबल पर अपनी पराजय में स्वयं ही बदल दिया!

और पढ़ें: विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी बोले डर था, भारत हमला न कर दे इसलिए अभिनंदन को लौटाना पड़ा

Tags: जयंतो नाथ चौधरीताशकंद समझौतालाल बहादुर शास्त्री
शेयर100ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

सोनू सूद की बहन मालविका पंजाब कांग्रेस से लड़ेंगी 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव

अगली पोस्ट

भारत के अनुरोध से पाकिस्तान पर शस्त्र प्रतिबंध लगा सकता है फ्रांस

संबंधित पोस्ट

औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था
इतिहास

वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

26 December 2025

यह सप्ताह, वर्ष का अंतिम सप्ताह है। नए साल की दहलीज़ पर खड़े इस सप्ताह का इंतज़ार सबको ही रहता है, क्योंकि पहले क्रिसमस का...

गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया
इतिहास

वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

26 December 2025

यह सप्ताह वर्ष का अंतिम सप्ताह होता है, जिसका लोग बेसब्री से इंतज़ार करते हैं, क्योंकि इसी दौरान पहले क्रिसमस और फिर नए साल का...

23 दिसम्बर  बलिदान-दिवस: परावर्तन के अग्रदूत — स्वामी श्रद्धानन्द
इतिहास

23 दिसम्बर बलिदान-दिवस: परावर्तन के अग्रदूत — स्वामी श्रद्धानन्द

23 December 2025

भारत में परावर्तन आंदोलन के सबसे प्रभावशाली और निर्भीक अग्रदूत स्वामी श्रद्धानन्द थे। उनका दृढ़ विश्वास था कि भारत में निवास करने वाले मुसलमानों के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

00:04:36

An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

00:03:24

Ramjet-Powered Shell: A Potential Game Changer for Indian Artillery| IIT Madra

00:06:25

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited