आलिया की शादी का निमंत्रण न मिलने से बौखलाए रवीश ने मढ़ा मोदी के मत्थे आरोप

पूरी दुनिया सुधर जाएगी लेकिन ये नहीं सुधरने वाले!

Ranvir Aliya bHATT Ravish

Source- TFI

कभी-कभी बचपन की गलतियां बुढ़ापे में बहुत परेशान करती हैं। ब्रह्मांड के एकमात्र निष्पक्ष पत्रकार रवीश जी, बचपन की एक गलत आदत के कारण इन दिनों बौखलाए हुए हैं। शादियों का समय चल रहा है और रवीश को संभवत अपने बचपन की यादें सता रही है इसलिए उन्होंने मानसिक संतुलन खो दिया है। आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की शादी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने नरेंद्र मोदी को कोसना शुरु कर दिया है।

आप में से बहुत से लोगों ने कॉलेज के दिनों में शरारत में दूसरी शादियों में घुसकर खाना खाया होगा। ऐसा एक दृश्य 3 इडियट्स फिल्म में भी दिखाया गया है, जहां रणछोड़ दास अपने दो दोस्तों के साथ एक शादी में जाकर खाना खाता है। रवीश भी संभवत: कॉलेज के दिनों में ऐसे ही थे और उन्होंने संभवत इस शरारत को अपनी आदत बना लिया था। उन्हें शादी का खाना इतना प्रिय है कि रणबीर और आलिया भट्ट द्वारा शादी में ना बुलाए जाने पर उन्हें अत्यंत दुख पहुंचा है।

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एक बार को जवानी के दिन होते तो रवीश अच्छे कपड़े पहनकर, बिना किसी को बताए, दरबान को चकमा देकर, सिक्योरिटी से बचते हुए, शादी समारोह में घुस जाते और पकड़े जाने के पहले कम से कम चाट पकोड़े तो खा ही लेते। लेकिन पिछले 7-8 सालों में प्रधानमंत्री मोदी को कोस-कोस कर रवीश की दुकान ऐसी चली है कि अब उन्हें बहुत से लोग पहचानते हैं। अब उनके लिए अपनी भेष बदलकर, शादी में जाने की कला का प्रदर्शन करना संभव नहीं है।

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रवीश का घिसा पिटा व्यंग्य

मुफ्त का अच्छा भोजन खाने को नहीं मिला इसलिए रवि का हृदय संतप्त हो उठा और धीरे-धीरे उनका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वह शादी वाले समारोह के बीच में मन की बात शुरू करे अन्यथा शादी का लाइव टेलीकास्ट बंद हो जाएगा। इसके बाद उन्होंने हिंदी के पत्रकारों को सीख देना शुरू कर दिया। रवीश द्वारा की गई सारी बकवास को यहां पर रेखांकित करने की आवश्यकता नहीं किंतु कुछ मूल बातें और हैं जैसे रवीश ने लोगों को शादी में जाकर नींबू न चुराने की सीख दी। अंत में उन्होंने लोगों से कहा कि उनकी बकवास को नजरअंदाज कर दें जैसे महंगाई को नजरअंदाज कर रहे हैं।

क्योंकि रवीश का लेख है इसलिए एक वर्ग विशेष के लोग ‛वाह रवीश जी’ कहते हुए दांत दिखाने लगे। फिलहाल बात रवीश के मानसिक संतुलन की हो रही थी तो उसके बिगड़ने का एक कारण यह भी हो सकता है कि इन दिनों वह शादियों में नींबू नहीं चुरा पा रहे हैं, उनकी ख्याति उनकी दुश्मन बन गई है।

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रवीश का बिगड़ता मानसिक संतुलन

हिंदी पत्रकारों को सदैव सीख देने वाले रवीश के अंदर हिंदी बोलने वाले और यूपी-बिहार के लोगों के प्रति विशेष घृणा देखने को मिलती है। किंतु इसे भी मानसिक विक्षिप्ता के कारण स्वभाव में परिवर्तन माना जा सकता है। क्योंकि जिस व्यक्ति को सुनने वाले ही अधिकांशत हिंदी भाषी हैं और जो अपना हर प्राइम टाइम हिंदी में ही करता है वह हिंदी भाषियों के प्रति सदैव जहर उगलने की मूर्खता नहीं करता। किंतु रवीश मजबूर है, उनकी मानसिक अवस्था उनका साथ नहीं दे रही। ना तो अब वह शादियों में जाकर छुप-छुप कर भोजन कर पाते हैं, ना ही नींबू ला पाते हैं। रवीश के प्रिय जनों को उन्हें रोज सुबह एक गिलास नींबू पानी देना चाहिए जिससे धीरे-धीरे उनमें अपनापन जागेगा।

रवीश को प्रेम की आवश्यकता है क्योंकि प्रायः देखा गया है कि उन्हें यह लगता है कि सरकार उनके विरुद्ध साजिश कर रही है। आसमान से लड़की बिजली का जवाब देने के लिए कोई छोटा बच्चा आसमान की ओर पत्थर खींचकर मारे तो आप उससे जुड़ेंगे या उसे स्नेह देंगे। अवश्य ही स्नेह करेंगे। रवीश प्रधानमंत्री मोदी को बार-बार अपमानित करने का जो प्रयास करते हैं, उसे देख कर यह समझना चाहिए कि उनकी हालत उस बच्चे के समान ही है जो आसमान पर पत्थर मारता है। अब रवीश को अपनेपन और नींबू पानी की आवश्यकता है।

रवीश ने अपने लेख के अंत में कहा था उन्हें गंभीरता से मत लीजिए, पाठक इस लेख को भी गंभीरता से ना लें, यह रवीश की शैली में लिखा गया व्यंग है। अंत में एक आवश्यक सूचना :- रवीश समर्थक इसे फैक्ट चेक ना करें।

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