इस्तीफा देने जा रहे हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

जीवनभर राष्ट्रपति बने रहने का सपना पालने वाले ‘लाल बादशाह’ के दिन भी लद गए!

Source: TFI

चीन भले ही ख़ुद को दुनिया की सुपर पावर कहता हो लेकिन कोरोना वायरस को कंट्रोल करने में उसके पसीने छूट गए हैं. अपने ही देश में पैदा हुए वायरस को कंट्रोल करने के चक्कर में चीन की अर्थव्यवस्था गर्त में समा गई है. स्थिति आज भी भयानक है. स्थिति आज भी बेकाबू है. दोनों ही मोर्चों पर चीन के ‘लाल बादशाह’ शी जिनपिंग बुरी तरह से फेल हुए हैं. और अब ख़बरें हैं कि शी जिनपिंग इस्तीफा देने जा रहे हैं.

चीन की कम्युनिस्ट सरकार अपने ही घर में पैदा हुए वायरस को काबू पाने में पूरी तरह से फेल साबित हुई है. चीन के कई शहर आज भी कोरोना की वज़ह से बंद है. स्थिति इतनी बुरी है कि तानाशाही सरकार ने लोगों के घरों के बाहर दीवारें तक बना दी हैं. इसके बाद भी कम्युनिस्टों के गढ़ में कोरोना वायरस का प्रकोप कम नहीं हुआ है. अब ख़बरें हैं कि कोरोना प्रसार को रोकने में बुरी तरह से असफल होने के कारण, अर्थव्यवस्था के धाराशाई होने के कारण, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस्तीफा दे सकते हैं. चाइनीज़ सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं ज़ोरों से चल रही हैं.

कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो की बैठक के बाद इन चर्चाओं या फिर कहें कि अफवाहों ने और ज्यादा जोर पकड़ लिया है. कनाडाई ब्लॉगर का एक वीडियो भी चीन की सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस वीडियो में दावा किया जा रहा था कि शी जिनपिंग इस्तीफा देने जा रहे हैं. चीनी की तानाशाह सरकार जो करती है, वही हुआ. इस वीडियो को चाइनीज़ सोशल मीडिया पर बैन कर दिया गया.

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कनाडाई ब्लॉगर की अगर मानें तो कम्युनिस्ट पार्टी एक बड़ी बैठक करने जा रही है. इसी बैठक में शी जिनपिंग अपने पद से हट जाएंगे और उनकी जगह वर्तमान प्रीमियर ली केकियांग ले लेंगे. ली केकियांग ही पार्टी और सरकार की रोजाना की गतिविधियों को देखेंगे.

चाइनीज़ सोशल मीडिया पर चल रही इन चर्चाओं को बल चीन में बिगड़ती कोरोना की स्थिति और बर्बाद होती अर्थव्यवस्था से भी मिलता है. चीन के लाल बादशाह शी जिनपिंग ने कोरोना को रोकने के लिए तानाशाही की सभी हदें पार कर दी. मनमाने प्रतिबंध लगाए. मनमाने तरीकों से लोगों को प्रताड़ित किया गया. कम्युनिस्ट चीन का सरकारी तंत्र ऐसा है कि वहां से ख़बरें बाहर नहीं निकलती हैं.

इसके बाद भी कई बार कई ख़बरें बाहर आई हैं. जिनमें दिखता है कि चीनी सरकार ने कोरोना पर काबू करने के नाम पर लोगों पर कितने कहर ढाए हैं. तमाम निरकुंश तरीके अपनाने के बाद भी ‘लाल बादशाह’ अपनी ही घर में पैदा हुए वायरस को रोक नहीं पाया. ऊपर से कोरोना को रोकने के चक्कर में लगाए गए प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था भी बर्बाद हो गई. कोरोना के सख्त प्रतिबंधों के कारण चीन के औद्योगिक उत्पादन पर एक तरह से ब्रेक लग गया है. इसकी वज़ह से पहली बार सप्लाई चेन भी गड़बड़ा गई है.

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इसके साथ ही निर्माण कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. फरवरी 2020 के बाद सबसे कम निर्माण कार्य हुआ है. संघाई में बढ़ते लॉकडाउन को देखकर तमाम बैंकों और आर्थिक विशेषज्ञों ने अपनी भविष्यवाणी में चीन की आर्थिक विकास दर को घटा दिया. अप्रैल महीने की बात करें तो चीन की मुद्रा युआन में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है जोकि पिछले 28 वर्ष में सबसे बड़ी मासिक गिरावट है.

कहा जा रहा है कि कोरोना पर कंट्रोल ना कर पाने की वज़ह से और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देने की वज़ह से चीन में शी जिनपिंग के प्रति गहरा असंतोष है. चीन के लोगों का विश्वास अब शी जिनपिंग से खत्म हो गया है. चीन के लोग समझ गए हैं कि कठिन परिस्थितयों में शी जिनपिंग और उनका प्रशासन बुरी तरह से फेल साबित हुआ है. इन्हीं सब कारणों की वज़ह से चीन में शी जिनपिंग के इस्तीफा देने की चर्चाएं ज़ोरों से हो रही हैं.

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