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देश-विरोधियों पर चल रहा है मोदी का क्रैकडाउन, चुन-चुनकर दबोचा जा रहा है

PFI पर कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा है।

TFI Desk द्वारा TFI Desk
26 September 2022
in समीक्षा
amit shah
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PFI रेड: देश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों, जनता माफ नहीं करेगी। आतंकी संगठनों पर कार्रवाई न करने वालों, जनता माफ नहीं करेगी। अपराध को अंजाम देने वालों, जनता माफ नहीं करेगी। क्या यह सब पढ़कर आपको कुछ याद आया? जी हां साल 2014 में जब वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी का चुनावी कार्यक्रम शुरू हुआ था तो इन नारों ने खूब लोकप्रियता बटोरी थीं। इसके बाद जब से नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला है वे प्रत्येक नकारात्मक मुद्दे को जड़ से खत्म कर रहे हैं। अभी भी यदि आपको लग रहा है कि ऐसा कुछ कहां हो रहा है तो आज हम आपको इन कार्रवाई के पैटर्न के बारे में बताते हैं कि कैसे किसी भी मुद्दे पर मोदी सरकार देशव्यापी कार्रवाई करके राष्ट्र की गंभीर समस्याओं का हल निकाल रही थी है।

इस लेख में जानेंगे कि कैसे ऑपरेशन ऑक्टोपस के तहत मोदी सरकार के द्वारा की गयी अखिल भारतीय कार्रवाई ने भारत विरोधी सांठगांठ की रीढ़ को ही कुचल डाला है।

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कुछ महत्वपूर्ण कार्रवाई

पिछले दो तीन हफ्तों की बात करें तो देश की जांच और खुफिया एजेंसियों ने कुछ बहुत महत्वपूर्ण कार्रवाई की हैं। इसमें सबसे बड़ा मामला PFI का है, जिसे ऑपरेशन ओक्टोपस कहा गया। दरअसल, देश के कई राज्यों में पिछले कुछ महीनों से लगातार हिंसा और आतंक से जुड़े मामलों में PFI से जुड़े संदिग्धों का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियां चिंतित थीं। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल जैसे राज्यों में हुई हिंसा में PFI से जुड़े आरोपियों का नाम सामने आने से यह आवश्यक हो गया था कि उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए। गृह मंत्री अमित शाह PFI पर कारवाई करने का मन बना चुके थे और यहीं से लिखी गयी थी आपरेशन आक्टोपस की पटकथा।

PFI के समूल नाश की कार्रवाई के लिए सबसे पहले पिछले महीने की 29 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की थी। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आईबी चीफ तपन डेका समेत रॉ चीफ सामंत गोयल भी मौजूद थे। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने सभी एजेंसियों को ये निर्देश दिया कि PFI और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी इकट्ठी की जाए। सभी एजेंसियों को अलग-अलग जानकारियों को इकट्ठा करने को कहा गया। PFI के विरुद्ध ऑपरेशन (रेड) का कोड नेम ऑपरेशन ऑक्टोपस रखा गया।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए टास्क को लेकर PFI पर पिछले दिनों हुए रेड से पहले खुफिया एजेंसी आईबी और रॉ ने PFI की गतिविधियों की अहम जानकारियां इकट्ठी की थी, जिसमें उसके कैडर और उनके नेताओं से जुड़ी जानकारियों वाली एक डोजियर तैयार किया था।

छापे से पहले PFI के डोजियर को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय को मुहैया करायी गयी थी। जानकारी के मुताबिक मिडनाईट में हुए ऑपरेशन से पहले दिल्ली में एक स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया गया था। गृह मंत्री लगातार ऑपरेशन पर नजर बनाये हुए थे। ऑपेरशन की रात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और आईबी चीफ तपन डेका कंट्रोल रूम में मौजूद थे।

और पढ़ें- 2022 के अंत तक PFI का हो जाएगा समूल विनाश

PFI पर सर्जिकल स्ट्राइक

अहम बात यह है कि PFI पर सर्जिकल स्ट्राइक करने से पहले खुफिया एजेंसियों की अलग-अलग टीम ने  PFI के हर उस काडर के बारे में जानकारियां जुटाई थीं, जिससे देश के सुरक्षा को खतरा था। PFI के खिलाफ हुए कुछ रेड ऐसे लोकेशन पर हो रही थी, जिससे एनआईए और ईडी टीम की सुरक्षा को खतरा था। ऐसे में छापे को इस तरह से प्लान किया गया कि सुबह जब तक सभी को ये पता चलता कि PFI पर रेड हो रही थी सभी टीमें सुरक्षित अपने ठिकानों पर लौट आएं। PFI पर हुए छापे में ऐसा ही हुआ। सुबह आठ बजे तक ज्यादातर टीमें आरोपियों को अपने साथ लेकर हेडक्वार्टर पर वापस आ गयी थीं और जो लोकेशन पर थीं वहां अतिरिक्त सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे।

इस आपरेशन आक्टोपस के तहत एनआईए, ईडी और कुछ राज्यों की पुलिस के जरिये PFI के 93 लोकेशन पर छापे डाले गये थे, जिसमें PFI के 106 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। PFI पर रेड के अगले ही दिन एक बार फिर से गृह मंत्री अमित शाह ने एनएसए अजीत डोभाल और एनआईए चीफ दिनकर गुप्ता के साथ बैठक की। इस मीटिंग में इस बात पर चर्चा हुई कि PFI और उससे जुड़े संगठन एसडीपीआई पर छापों के दौरान क्या सबूत मिले हैं और आगे इनके विरुद्ध क्या एक्शन लिया जा सकता है।

और पढ़ें- PFI की बड़ी साजिश का खुलासा, युवाओं को दी जा रही थी आतंकी हमले की ट्रेनिंग, अब NIA बजाएगी बैंड

अजीत डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका

अहम बात यह है कि इस आपरेशन में न केवल अमित शाह बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और भारत के जेम्स बॉन्ड अजीत डोभाल भी महत्वपूर्ण भूमिका में थे। जब तक यह पूरा आपरेशन चला तब तक अजीत डोभाल स्पेशल कंट्रोल रूम में थे और NIA की अलग-अलग टीम से एक-एक पल‌की रिपोर्ट ले रहे थे। इसकी वजह यह है कि देश में आंतरिक सुरक्षा को भी खतरा हो सकता था और दंगों की आग भड़क सकती थी जिसके चलते अजीत डोभाल ने प्लान B भी तैयार कर लिया था। वहीं आपरेशन आक्टोपस पूरी तरह से सफल रहा तो डोभाल ने चैन की सांस ली।

PFI पर रेड देश के लिए एक बड़ी सफलता है क्योंकि सांप्रदायिक हिंसा भड़कने से लेकर दंगों में सक्रिय रहने में सबसे आगे PFI ही रहता था। संगठन से यूपी बिहार मध्य प्रदेश गुजरात महाराष्ट्र और-कर्नाटक जैसे राज्य बेहद परेशान रहे हैं। इसके अलावा पिछले दिनों ही पश्चिम बंगाल से एक आतंकी नेटवर्क का पता चला और सुरक्षा एजेंसियों ने छापेमारी कर तीन मॉड्यूल़ों का भंडाफोड़ किया है जिसके चलते एक बड़ी आतंकी कार्रवाई टल गयी।

और पढ़ें- अजीत डोभाल जी! सर्वधर्म बैठक तो अच्छा है, लेकिन वास्तव में PFI को लताड़ने की आवश्यकता है

कई आपराधिक कृत्यों पर भी जोर का हथौड़ा

PFI का ढांचा तो दरक ही गया लेकिन कई और क्षेत्रों में चल रहे आपराधिक कृत्यों पर भी जोर का हथौड़ा चला गया है। इसी क्रम में आंतरिक सुरक्षा को लेकर पिछले दिनों देश की केंद्रीय एजेंसियों ने तगड़ी सफलता पायी लेकिन कुछ ऐसा ही इंटरनेट के माध्यम से अपराध करने वालों के विरुद्ध CBI ने भी किया है। दरअसल, CBI ने ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल पोर्नोग्राफी करने वालों पर शिकंजा कस लिया और है। CBI ने ऐसे कामों में लिप्त लोगों को पकड़ने और सबूत जुटाने के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसी 20 राज्यों में कम से कम 150 लोकेशन पर छापेमारी की गयी। सीबीआई के मुताबिक कई ऐसे गैंग चिह्नित किए गए हैं जो न केवल चाइल्ड सेक्सुअल पोर्नोग्राफी करते हैं बल्कि उसके मध्याम से बच्चों को फिजिकली ब्लैकमेल भी करते हैं। ये छापेमारी अभियान क्लाउड स्टोरेज सेवाओं पर टारगेट है, जिसका अपराधी बच्चों के साथ अवैध यौन गतिविधियों के ऑडियो-विजुअल सर्कुलेट करने के लिए उपयोग में लाते हैं।

जानकारी के मुताबिक CBI की इस छापेमारी का कोड नेम ‘ऑपरेशन मेघदूत’ रखा गया था। ऐसे कामों में शामिल गैंग्स दो तरीके से काम करते हैं, पहला- ग्रुप बनाकर और दूसरा व्यक्तिगत रूप से। CBI को इंटरपोल के माध्यम से सिंगापुर से इस मामले के इनपुट्स मिले थे, जिसके बाद भारत में यह छापेमारी की गयी। गौरतलब है कि पिछले साल 16 नवंबर को भी CBI ने इंटरपोल की जानकारी पर ‘ऑपरेशन कार्बन’ चलाया था, यह भी उसी ऑपरेशन का फॉलोअप है और इस बार फिर CBI को बड़ी सफलता मिली है।

और पढ़ें- चीनियों द्वारा वित्त पोषित एक इस्लामिक संगठन है PFI

बाल दिवस पर शुरू हुआ था अभियान

आपकों बता दें कि जांच एजेंसी ने पिछले वर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस पर शुरू किए गए अभियान में 14 राज्यों में अपनी कार्रवाई की थी और 77 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। 83 आरोपियों के तलाशी अभियान में इलेक्ट्रॉनिक डेटा और गैजेट्स की बड़ी खेप जब्त की गयी थी, जिसमें पैसे के लेन-देन के पैटर्न और अलग-अलग अपराधियों की संलिप्तता का पता चला था। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अभियान ने 51 से ज्यादा सोशल मीडिया ग्रुप को टारगेट किया था जिनमें पांच हजार से ज्यादा अपराधी पाकिस्तान, कनाडा, बांग्लादेश, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, अजरबैजान, श्रीलंका, संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब, यमन, मिस्र, ब्रिटेन, बेल्जियम, घाना में स्थित कुछ अन्य आरोपियों के साथ बाल यौन शोषण सामग्री सर्कुलेट कर रहे थे।

वहीं दो सप्ताह पहले देश में पांच राज्यों में 60 अलग-अलग जगहों पर NIA ने छापेमारी की थी। इसमें गैंगस्टर से आतंकी कनेक्शन के मामलों जांच की जा रही थी। जानकारी के मुताबिक यह गिरोह देश और विदेश के साथ-साथ भारतीय जेलों में सक्रिय थे। हाल ही में एनआईए के शीर्ष अधिकारियों ने इस मामले को लेकर हरियाणा और पंजाब पुलिस के अधिकारियों से मुलाकात की थी। गोल्डी बरार सहित कई गैंगस्टर्स विदेशों से सक्रिय हैं। यह वहीं गैंग्स्टर है जिस पर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मामला था।

और पढ़ें- कानपुर हिंसा में इस्लामिक चरमपंथी संगठन PFI का हाथ!

CBI और NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी

एक तरफ़ अपराध को लेकर CBI और NIA ताबड़तोड़ छापेमारी कर रहे हैं तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार करने वालों के विरुद्ध भी ED की छापेमारी हो रही है। पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के मंत्री के घर 50 करोड़ का मामला सामने आना ED की सफलता ही थी। हाल ही में ED ने दिल्ली में शराब घोटोला मामले को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 राज्यों में 40 ठिकानों पर छापे मारे थे। इसमें दिल्ली एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बेंगलुरु, हैदराबाद, नेल्लोर, चेन्नई समेत कुल 40 से ज्यादा लोकेशन पर छापेमारी की गयी थी।

पिछले लगभग एक महीने में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अनेकों छापेमारी कर आतंक वाद, भ्रष्टाचार, गैंग्स्टर्स और चाइल्ड पोर्नोग्राफी की कमर तोड़ दी है। पीएफआई के खिलाफ जिस तरह से एक्शन लिया गया है, उससे न केवल भारत बल्कि ISI से लेकर आतंकी फंडिंग करने वाले भारत  विरोधी देशों को कारारा झटका लगा है जो कि आवश्यक था। अहम बात यह है कि मोदी सरकार ने इस मामले में राजनीति परिदृश्यों को भी नकार दिया। इन कार्रवाई में मुस्लिम पक्ष से लेकर अनेकों राजनीतिक संगठनों को दिक्कत थी और वे लगातार मोदी सरकार के खिलाफ विरोध भी कर रहे हैं लेकिन इसे प्रधानमंत्री की कठोर फैसले लेने वाली नीति के तहत देखा जा रहा है।

और पढ़ें- ‘भारत को 2047 तक बनाना चाहते थे इस्लामिक मुल्क’ पटना में गिरफ्तार दोनों आतंकियों का PFI से कनेक्शन

वहीं CBI, ईडी, इनकम टैक्स की छापेमारी ने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब देश में भ्रष्टाचार और आंतरिक रूप से पर पाले गए आतंकवाद के विरुद्ध बड़ी जंग छिड़ चुकी है और अब देश में नासूर बन चुके किसी भी घाव को अनदेखा नहीं किया जाएगा।

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