TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

    भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, बसंत पंचमी पूजा और जुमे की नमाज के लिए अलग-अलग समय

    भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिरा

    जम्मू-कश्मीर: डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरा, 10 जवानों की मौत, 7 घायल; बचाव अभियान जारी

    बीफ मामले में पति को फंसाने का आरोप, पुलिस ने किया मामला दर्ज

    पति से अलग होने के लिए साजिश :लखनऊ में गिरफ्तार हुई आमीना खातून और उसका प्रेमी

    राज्यपाल गहलोत के भाषण पूरा किए बिना चले जाने के बाद हंगामा हुआ

    कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल गहलोत के भाषण पूरा किए बिना चले जाने के बाद हंगामा हुआ

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिरा

    जम्मू-कश्मीर: डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरा, 10 जवानों की मौत, 7 घायल; बचाव अभियान जारी

    गणतंत्र दिवस परेड में हाइपरसोनिक हथियार का प्रदर्शन

    गणतंत्र दिवस परेड में भारत का ‘हाइपरसोनिक’ संदेश! किसी के पास क्यों नहीं है DRDO के इस ‘नेवी किलर’ हथियार की काट ?

    सिमरन बाला 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर क्या खास करने वाली है

    पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच पली-बढ़ीं, अब गणतंंत्र दिवस परेड में CRPF की पुरुष टुकड़ी का करेंगी नेतृत्व, जानिए कौन हैं जम्मू-कश्मीर का नाम रौशन करने वालीं सिमरन बाला?

    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    विदेश मंत्रालय का स्पष्ट जवाब: 500% अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा

    ईरान पर ट्रंप का गुस्सा, देश तबाह करने की बात

    ट्रंप की ईरान को खुली धमकी: कहा- पूरा देश तबाह कर देंगे

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

    भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, बसंत पंचमी पूजा और जुमे की नमाज के लिए अलग-अलग समय

    भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिरा

    जम्मू-कश्मीर: डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरा, 10 जवानों की मौत, 7 घायल; बचाव अभियान जारी

    बीफ मामले में पति को फंसाने का आरोप, पुलिस ने किया मामला दर्ज

    पति से अलग होने के लिए साजिश :लखनऊ में गिरफ्तार हुई आमीना खातून और उसका प्रेमी

    राज्यपाल गहलोत के भाषण पूरा किए बिना चले जाने के बाद हंगामा हुआ

    कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल गहलोत के भाषण पूरा किए बिना चले जाने के बाद हंगामा हुआ

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिरा

    जम्मू-कश्मीर: डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरा, 10 जवानों की मौत, 7 घायल; बचाव अभियान जारी

    गणतंत्र दिवस परेड में हाइपरसोनिक हथियार का प्रदर्शन

    गणतंत्र दिवस परेड में भारत का ‘हाइपरसोनिक’ संदेश! किसी के पास क्यों नहीं है DRDO के इस ‘नेवी किलर’ हथियार की काट ?

    सिमरन बाला 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर क्या खास करने वाली है

    पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच पली-बढ़ीं, अब गणतंंत्र दिवस परेड में CRPF की पुरुष टुकड़ी का करेंगी नेतृत्व, जानिए कौन हैं जम्मू-कश्मीर का नाम रौशन करने वालीं सिमरन बाला?

    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    विदेश मंत्रालय का स्पष्ट जवाब: 500% अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा

    ईरान पर ट्रंप का गुस्सा, देश तबाह करने की बात

    ट्रंप की ईरान को खुली धमकी: कहा- पूरा देश तबाह कर देंगे

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

“नील क्रांति का क्रेडिट भी महात्मा गांधी ने खा लिया” जबकि आंदोलन की वास्तविकता कुछ और ही है

महात्मा गांधी का चंपारण सत्याग्रह 'स्कैम' था लेकिन उसे ऐसे हाइलाइट किया गया कि लोग आज तक उसे ही सत्य मानते आ रहे हैं!

Awanish Tiwari द्वारा Awanish Tiwari
2 November 2022
in इतिहास
नील विद्रोह

Source- TFI

Share on FacebookShare on X

हमारे देश में अनेक आंदोलन हुए, जिनका दर्द आज भी भारतीयों की रगों में जिंदा है। कुछ आंदोलन ऐसे हैं, जो बिना तोप ताने और बिना बंदूक चलाए लड़े गए। उन्हीं में से एक है चंपारण की नील क्रांति। कहा जाता है इस आंदोलन से ही मोहनदास करमचंद गांधी, महात्मा गांधी बने लेकिन इसके पीछे की सच्चाई क्या है, यह हम आपको आगे बताएंगे, उससे पहले पूरे मामले को समझते हैं। वर्ष था 1917 का, बिहार के चंपारण में अंग्रेजों का किसानों पर शोषण लगातार बढ़ता जा रहा था। किसानों की कई पीढियां इस शोषण का शिकार हो रही थी। अंग्रेजों के द्वारा बेहद कम मेहनताने पर किसानों से जबरदस्ती नील की खेती कराई जाती थी। अंग्रेजों के अत्यातार की यह दास्तां यहीं खत्म नहीं होती, गोरे किसानों पर टैक्स लगा देते थे और टैक्स ना चुका पाने पर उनकी खाल उधेड़ दी जाती थी।

दरअसल, बिहार के चंपारण में अंग्रेजों ने तीनकठिया प्रणाली लागू की थी। इस प्रणाली के तहत किसान को अपनी भूमि के तीन कट्ठे प्रति बीघा, नील की खेती करना अनिवार्य कर दिया गया था। किसान जी तोड़ मेहनत करते थे लेकिन उसके बदले उन्हें कुछ नहीं मिलता था। वहीं, यदि कोई किसान नील की खेती नहीं करना चाहता था तो उसे अपने मालिक को एक बड़ी राशि “तवान” के रूप में देनी पड़ती थी, जिससे चंपारण के किसानों की स्थिती दयनीय बनी हुई थी। अंग्रेजों के इस अत्याचार से त्रस्त होकर किसानों ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। महात्मा गांधी, राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर 10 अप्रैल 1917 को बांकीपुर पहुंचे और 15 अप्रैल 1917 को मुजफ्फरपुर होते हुए चंपारण पहुंचे। फिर व्यापक रूप से यह आंदोलन 17 अप्रैल 1917 को ‘शुरू’ हुआ लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि महात्मा गांधी के चंपारण पहुंचने से पूर्व किसानों ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज नहीं उठाई थी या उनके खिलाफ आंदोलन नहीं किया था।

संबंधितपोस्ट

वंदे मातरम् के 150 वर्ष: बंकिमचंद्र की वेदना से जनमा गीत, जिसने भारत को जगाया और मोदी युग में पुनः जीवित हुआ आत्मगौरव

सरदार पटेल: लौहपुरुष जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया

भारत विरोधियों की शरणस्थली बनता जा रहा लंदन, गांधी जयंती से पहले खालिस्तानी उपद्रवियों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़ी, लिखा- ‘गांधी- मोदी आतंकवादी

और लोड करें
चंपारण सत्याग्रह
Source- Google

लेकिन जब महात्मा गांधी इससे जुड़े तो इसे चंपारण आंदोलन का नाम दे दिया और इसे चंपारण सत्याग्रह के नाम से जाना जाने लगा। ऐसे में दिमाग में यह प्रश्न उठता है कि स्थानीय किसान, जो लंबे समय से किसानों से संघर्ष कर रहे थे उनके संघर्ष को भूलाकर इस पूरे आंदोलन को महात्मा गांधी पर कैसे मोड़ दिया गया? इस आंदोलन का श्रेय किसानों को न देकर पूर्ण रूप से महात्मा गांधी को क्यों दिया गया? क्या चंपारण में गांधी के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन से पहले नील की खेती के विरोध में आंदोलन नहीं हुआ था? जवाब है कि उससे पहले भी आंदोलन हुआ था लेकिन गांधी के चंपारण आंदोलन को प्रचारित कर पुराने मामले पर पर्दा डाल दिया गया। चलिए इसे विस्तार से समझते हैं।

और पढ़ें: South Africa में अब महात्मा गांधी की परपोती को हुई जेल, आंदोलन के लिए नहीं बल्कि fraud के लिए

बंगाल में शुरू हुआ था आंदोलन

ध्यान देने वाली बात है कि नील की खेती की शुरूआत सबसे पहले 1777 में बंगाल से हुई थी। यूरोप में ब्लू डाई की डिमांड बहुत ज्यादा थी जिसके कारण अंग्रेज किसानों से नील की खेती कराकर आर्थिक लाभ ले रहे थे लेकिन नील खेती किसानों के खेतों को बंजर बना दे रही थी। नील की खेती करने से न सिर्फ किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि की उर्वरता नष्ट हो रही थी अपितु वे अपने लिए आवश्यक खाद्यान उत्पन करने में भी सक्षम नहीं थे। साथ ही जमींदारों द्वारा किसानों से मनमाने ढंग से फसल की वसूली करने के साथ कई तरह के नियम थोप दिए गए थे। यहां तक कि अकाल एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय भी किसानों को किसी प्रकार की कोई रियायत नहीं दी जाती थी। इन सब में ब्रिटिश सरकार की सहायता जमींदार और साहूकार कर रहे थे। जिससे किसान गोरों के इस अत्याचार के खिलाफ आंदोलन करने पर मजबूर हो गए और यही नील की खेती के विरोध में पहला व्यापक आंदोलन था।

नील विद्रोह, बंगाल
Source- Google

ज्ञात हो कि अंगेज बागान मालिक और जमींदार दोनों ही किसानों के शोषण में शामिल थे। हालात ऐसे थे कि किसान खुद खाने के लिए चावल की खेती भी नहीं कर पाते थे। बंगाल सहित पूरे भारत में किसानों के साथ यही हाल था। ब्रिटिश सरकार किसानों को नील के बाजार भाव का 2.5% मूल्य देती थी। बंगाल में नदिया जिले के किसानों ने 1859-60 में ‘नील विद्रोह’ शुरू करके नील की खेती करना बंद कर दिया और अंग्रेजों के खिलाफ आवाज़ उठाई। नदिया जिले के गोविन्दपुर और चौगाछा गाँव में ‘बिष्णुशरण विश्वास’ और ‘दिगम्बर विश्वास’ नामक किसान नेताओं ने नील विद्रोह शुरू किया था।

नील आयोग का गठन करने पर मजबूर हुए थे अंग्रेज

नदिया जिले के बाद तेजी से यह विद्रोह बंगाल के अन्य जिलों मुर्शिदाबाद, बीरभूम, बर्दवान, खुलना, मालदा, नरैल आदि जिलों में फैला। शोषण से पीड़ित किसानों की इस एकता का यह परिणाम हुआ कि 1860 तक पूरे बंगाल में नील की खेती और उत्पादन बंद हो गया और आखिरकार 1860 में ब्रिटिश सरकार ने नील आयोग का गठन किया। नील आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अधिसूचना निकाली गई कि किसानों को नील की खेती करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और विवादों को कानूनी तरीके से निपटाया जाएगा।

बंगाल में हुए इस आंदोलन ने अंग्रेजों की खटिया खड़ी कर दी थी और वे कोई भी मांग पूरी करने को तैयार थे। उन्होंने किसानों की मांगों को पूरा भी किया लेकिन जब यही आंदोलन चंपारण में शुरू हुआ तो इस पूरे प्रकरण का क्रेडिट गांधी को दे दिया गया। चंपारण सत्याग्रह को ऐसे हाइलाइट किया गया और दिखाया गया कि गांधी ने किसानों के हित में आंदोलन करते हुए अंग्रेजों की नानी याद दिला दी लेकिन अब आप समझ सकते हैं कि यह पूरा का पूरा ‘स्कैम’ था और कथित इतिहासकारों ने हमें नील विद्रोह को लेकर क्या पढ़ाया यह बताने की आवश्यकता नहीं है।

और पढ़ें: ब्रह्मचर्य के साथ मोहनदास करमचंद गांधी के प्रयोग: सुशीला नैयर, आभा गांधी और प्रभावती देवी की कहानी

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें.

Tags: चंपारण सत्याग्रहनील विद्रोहनील विद्रोह बंगालमहात्मा गाँधी
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

Instagram Account delete kaise kare step by step guide in Hindi 

अगली पोस्ट

चीन के मंच पर उसका मुंह पकड़कर जयशंकर ने निचोड़ दिया, ‘ड्रैगन’ आह तक नहीं कर पाया

संबंधित पोस्ट

औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था
इतिहास

वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

26 December 2025

यह सप्ताह, वर्ष का अंतिम सप्ताह है। नए साल की दहलीज़ पर खड़े इस सप्ताह का इंतज़ार सबको ही रहता है, क्योंकि पहले क्रिसमस का...

गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया
इतिहास

वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

26 December 2025

यह सप्ताह वर्ष का अंतिम सप्ताह होता है, जिसका लोग बेसब्री से इंतज़ार करते हैं, क्योंकि इसी दौरान पहले क्रिसमस और फिर नए साल का...

23 दिसम्बर  बलिदान-दिवस: परावर्तन के अग्रदूत — स्वामी श्रद्धानन्द
इतिहास

23 दिसम्बर बलिदान-दिवस: परावर्तन के अग्रदूत — स्वामी श्रद्धानन्द

23 December 2025

भारत में परावर्तन आंदोलन के सबसे प्रभावशाली और निर्भीक अग्रदूत स्वामी श्रद्धानन्द थे। उनका दृढ़ विश्वास था कि भारत में निवास करने वाले मुसलमानों के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Republic Day Shock: India’s Hypersonic Warning to the World| DRDO | HGV | Indian Army

Republic Day Shock: India’s Hypersonic Warning to the World| DRDO | HGV | Indian Army

00:05:24

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

00:04:36

An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

00:03:24

Ramjet-Powered Shell: A Potential Game Changer for Indian Artillery| IIT Madra

00:06:25

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited