मानव मस्तिष्क को पूरी तरह से स्वस्थ कर सकता है योग, जानिए कैसे

आज के समय में अधिकतर लोग अवसाद और चिंता जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं और इन परेशानियों से उबरने के लिए योग सबसे प्रभावी माध्यम है। इस लेख में योग के अलग-अलग प्रभावों को जानेंगे।

मस्तिष्क योग

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योग एक ऐसी आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिससे आप अपने शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का प्रयास करते हैं, अर्थात इसमें जुड़ाव महसूस करते हैं। योग शास्त्रों के अनुसार योग का किसी भी मानव के मस्तिष्क और शरीर के बीच वैसा ही सीधा संबंध है जिस प्रकार मानव का प्रकृति से। योग की परम्परा बहुत प्राचीन है और इसकी उत्‍पत्ति हजारों वर्ष पहले ही हुई थी। प्राचीनतम धर्मों के जन्म लेने से बहुत पहले योग का जन्म हो चुका था। योग विद्या में शिव को “आदि योगी” तथा “आदि गुरु” का स्थान प्राप्त है।

इस लेख में हम जानेंगे कि योग मानव मस्तिष्क के लिए किस प्रकार से लाभकारी है।    

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योग अभ्यास के बारे में

महर्षि पतंजलि के अनुसार, योग मस्तिष्क को शांत करने का अभ्यास है। अगर सही अर्थों में देखा जाए तो आपका मस्तिष्क ही आपके शरीर को नियंत्रित करता है। अगर यह मजबूत है तभी आप शारीरिक और मानसिक रूप से तंदुरुस्त कहलाते हैं। किसी भी तरह का भावनात्मक तनाव आपके मस्तिष्क को विकृत बना सकता है जिससे मानसिक विकार उत्पन्न होने में तनिक भी विलम्ब नहीं होगा। जर्नल ऑफ फिजिकल एक्टिविटी एंड हेल्थ के अनुसार, अपने मस्तिष्क को मजबूत बनाए रखने के लिए कम से कम 20 मिनट तक योगासन करना अति आवश्यक होता है। वैसे तो योग आपके पूरे शरीर के लिए बहुत अधिक लाभकारी है लेकिन यह आपके अंतर्मन के लिए एक जड़ी बूटी की तरह कार्य करता है। अगर शोधकर्ताओं की माने तो पिछले 5 सालों में योग की रिसर्च को लेकर लागत बहुत बढ़ी है क्योंकि दक्षिण देशों में इसका चलन बहुत बढ़ा है।

2016 में हुए एक सर्वे की माने तो 36.7 मिलियन लोग यूएस में योग करते हैं जो कि साल 2012 के 20.4 मिलियन लोगों की संख्या से अधिक है। सर्वे के अनुसार, अधिकतर लोग योग अपनी बॉडी को सुडौल दिखाने के लिए करते हैं जबकि उनको इसकी जगह शांति, स्वास्थ्य और लचीलापन लाने के लिए करना चाहिए।

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बढ़ती है सकारात्मक रहने की क्षमता

वहीं अगर तनाव को काम करने की बात की जाए तो योग इसमें बहुत अधिक भूमिका निभाता है। योग से आपका तनाव कम होता है साथ ही यह आपके मूड को भी अच्छा करता है। योग से आपके सकारात्मक रहने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है। यह शरीर की अलग-अलग गतिविधियों पर भी बहुत अधिक प्रभाव डालता है, जैसे- रिएक्शन टाइम और मेमोरी कैपेसिटी आदि। आज के समय में अधिकतर लोग अवसाद और चिंता जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं, ऐसे में योग करने से इसमें भी बहुत हद तक छुटकारा मिलता है। प्रश्न है कि योग मानव के मस्तिष्क के लिए इतना अधिक लाभकारी क्यों है? सचेत होकर योग करना ( कुछ ऐसे व्यायाम होते हैं जो बहुत अधिक गहन होते है, वहीं कुछ ऐसे होते हैं जिनसे आपकी धड़कन तक तेज नहीं होती है)।

योग बाकी की कसरतों से बहुत अलग होता है क्योंकि योग में केवल एक ही मुद्रा आपके शरीर और मन को एक साथ जोड़ देती है। योग में की जाने वाली मुद्राएं आपके मन को स्वतंत्र और आपकी सोच को फैलाती हैं। न्यूट्रिशियनिस्ट की माने तो योग सक्रिय ध्यान घटक (active attention component) है। यह श्वास और मन का एक ऐसा समागम क्षण है जो मष्तिष्क पर प्रभाव डालता है।

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योग पर शोध

एक अध्ययन के अनुसार, 8 सप्ताह तक कुछ वृद्धों को योग करवाया गया जिससे उनकी क्रियाशील स्मृति(working memory) बहुत अच्छी हो गयी। working memory का अर्थ प्रतिदिन की छोटी- मोटी बातों को स्मरण रखना वो भी अधिक बारीकियों के साथ। वहीं एक दूसरा अध्ययन योग और टहलने की है। इसमें कुछ लोगों को 12 सप्ताह तक हर दिन 1 घंटा या तो योग करने या फिर टहलने को कहा गया। जिसमें अंत में यह पता चला कि जो लोग हर दिन योग कर रहे हैं उनका मूड बहुत अच्छा था और वो तनाव ग्रस्त भी नहीं थे।

इसके पीछे का कारण जानने के लिए रिसर्चर ने योग करने वालों का दिमाग स्कैन किया। योग करने वालों के दिमाग में अधिक मात्रा में GABA मिला। GABA दिमाग में मौजूद एक ऐसा केमिकल है जो न्यूरोनल गतिविधि को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

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मस्तिष्क तरंगों के लिए उपयोगी है योग

योग मस्तिष्क तरंगों की गतिविधियों को चार्ज करके मूड को अच्छा करने में मदद करता है। योग से इनके आकार में भी बढ़ोतरी होती है, इसमें ब्रीथिंग, मैडिटेशन और मुद्राएं सबसे महत्वपूर्ण है। ब्रीथिंग योग करने से वेव अच्छी होती है और हमारी एकाग्रता भी बढ़ती है। मस्तिष्क एक मांसपेशी होती है और इसके बेहतर और सुचारू रूप से कार्य करने के लिए योग से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता है। मस्तिष्क की कार्यक्षमता को अधिक बढ़ाने के लिए योग से अच्छा कुछ भी नहीं है।

SOURCE- Brain Power Book

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