TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला: रमज़ान में मुसलमानों की हत्या पाकिस्तान के लिए नई बात नहीं

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    एलपीजी गैस संकट हुआ खत्म

    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी, रसोई गैस महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    बिपिन रावत

    ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’: जनरल बिपिन रावत का सेना को लेकर देखा गया स्वप्न फ़िलहाल अधूरा ज़रूर है, लेकिन उसने सैन्य सुधार की एक मज़बूत नींव रख दी है

    Indian navy in hormuz and trump

    होर्मुज़ संकट: इधर ट्रम्प चीन से मदद मांग रहे हैं, उधर इंडियन नेवी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ को साथ लेकर भारत लौट रही है

    भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

    नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

    सुखोई-30 विमान दुर्घटना

    सुखोई-30 विमान हादसा: स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    14 मार्च 2005 को चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    भारत को मिली अहम ऊर्जा राहत,

    उड़ती मिसाइलों और आग उगलते ड्रोन के बीच एलपीजी लेकर आने वाले शिवालिक और नंदादेवी के क्रू की हो रही है जमकर तारीफ

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

    वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

    हिंदू नववर्ष, हिंदू नव वर्ष का विज्ञान, चैत्र नववर्ष

    अंग्रेजी नववर्ष से कितना अलग है हिंदू नववर्ष? जानें इसके पीछे का विज्ञान।

    सारा अली खान को केदारनाथ दौरे के लिए देना होगा एफिडेविट

    सारा अली खान को केदारनाथ दौरे के लिए देना होगा एफिडेविट

    जुंदिशापुर: ईरान का वो शहर जिसने भारतीय ज्ञान परंपरा को अरब और फिर यूरोप तक पहुंचाया, कभी वराहमिहिर ने स्थापित की थी वेधशाला

    जुंदिशापुर: ईरान का वो शहर जिसने भारतीय ज्ञान परंपरा को अरब और फिर यूरोप तक पहुंचाया, कभी वराहमिहिर ने स्थापित की थी वेधशाला

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    सुनील गावस्कर का सनग्रुप से तीखा सवाल

    सुनील गावस्कर का काव्या मारन की टीम से सीधा तीखा सवाल…कहां भारतीयों के खून का पैसा बर्बाद न करें

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला: रमज़ान में मुसलमानों की हत्या पाकिस्तान के लिए नई बात नहीं

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    एलपीजी गैस संकट हुआ खत्म

    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी, रसोई गैस महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    बिपिन रावत

    ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’: जनरल बिपिन रावत का सेना को लेकर देखा गया स्वप्न फ़िलहाल अधूरा ज़रूर है, लेकिन उसने सैन्य सुधार की एक मज़बूत नींव रख दी है

    Indian navy in hormuz and trump

    होर्मुज़ संकट: इधर ट्रम्प चीन से मदद मांग रहे हैं, उधर इंडियन नेवी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ को साथ लेकर भारत लौट रही है

    भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

    नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

    सुखोई-30 विमान दुर्घटना

    सुखोई-30 विमान हादसा: स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    14 मार्च 2005 को चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    भारत को मिली अहम ऊर्जा राहत,

    उड़ती मिसाइलों और आग उगलते ड्रोन के बीच एलपीजी लेकर आने वाले शिवालिक और नंदादेवी के क्रू की हो रही है जमकर तारीफ

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

    वह भेष बदलकर अंधेरे में निकले, और फिर कभी वापस नहीं आए: दलाई लामा का तिब्बत से पलायन

    हिंदू नववर्ष, हिंदू नव वर्ष का विज्ञान, चैत्र नववर्ष

    अंग्रेजी नववर्ष से कितना अलग है हिंदू नववर्ष? जानें इसके पीछे का विज्ञान।

    सारा अली खान को केदारनाथ दौरे के लिए देना होगा एफिडेविट

    सारा अली खान को केदारनाथ दौरे के लिए देना होगा एफिडेविट

    जुंदिशापुर: ईरान का वो शहर जिसने भारतीय ज्ञान परंपरा को अरब और फिर यूरोप तक पहुंचाया, कभी वराहमिहिर ने स्थापित की थी वेधशाला

    जुंदिशापुर: ईरान का वो शहर जिसने भारतीय ज्ञान परंपरा को अरब और फिर यूरोप तक पहुंचाया, कभी वराहमिहिर ने स्थापित की थी वेधशाला

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    सुनील गावस्कर का सनग्रुप से तीखा सवाल

    सुनील गावस्कर का काव्या मारन की टीम से सीधा तीखा सवाल…कहां भारतीयों के खून का पैसा बर्बाद न करें

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

विक्रम साराभाई: भारत को अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक पहुँचाने वाले वैज्ञानिक, उनकी रोमांटिक प्रेमकहानी और बहन मृदुला साराभाई की क्रांतिकारी विरासत

भारत को ISRO देने वाले वैज्ञानिक

himanshumishra द्वारा himanshumishra
30 December 2024
in चर्चित
Know All About Vikram Sarabhai his love life and about his sister

Know All About Vikram Sarabhai his love life and about his sister

Share on FacebookShare on X

आज हम भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की पुण्यतिथि मना रहे हैं। 30 दिसंबर 1971 को नींद के दौरान उनका निधन हो गया, लेकिन उनका योगदान आज भी हमारे दिलों में जीवित है। विज्ञान के क्षेत्र में उनके अद्वितीय कार्य को देखते हुए उन्हें 1966 में पद्म भूषण और 1972 में पद्म विभूषण (मृत्योपरांत) जैसे सम्मान मिले। डॉ. विक्रम साराभाई का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम से हमेशा जुड़ा रहेगा। यह सच है कि उन्होंने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में एक अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई, लेकिन उनके कार्यों का दायरा बहुत बड़ा था। वे केवल एक वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि वस्त्र उद्योग, भेषज और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे तमाम क्षेत्रों में भी अग्रणी थे।

डॉ. विक्रम साराभाई
डॉ. विक्रम साराभाई

उनकी जीवनगाथा केवल उनके वैज्ञानिक योगदानों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनकी प्रेमकहानी भी किसी फिल्मी रोमांस से कम नहीं। एक ऐसी कहानी, जो उनके निजी जीवन को एक और खास मोड़ देती है। और उनके परिवार की क्रांतिकारी धारा, खासकर उनकी बहन मृदुला साराभाई का योगदान, आज भी हमें प्रेरित करता है। इस परिवार ने न केवल विज्ञान में, बल्कि समाज में भी अपनी छाप छोड़ी, जो आज भी हमें सामूहिक दृष्टिकोण और प्रेरणा देती है।

संबंधितपोस्ट

दांडी मार्च और वायसराय लॉर्ड इरविन को लिखा गया गांधी का वो ऐतिहासिक पत्र

भारत की अंतरिक्ष उड़ान में नया इतिहास: LVM3-M6 की सफलता ने वैश्विक मंच पर बढ़ाया भारत का कद

वंदे मातरम् के 150 वर्ष: बंकिमचंद्र की वेदना से जनमा गीत, जिसने भारत को जगाया और मोदी युग में पुनः जीवित हुआ आत्मगौरव

और लोड करें

भारत को अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक पहुँचाने वाले वैज्ञानिक

विक्रम साराभाई, एक नाम जो भारतीय विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। उनका जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में हुआ था, और उनकी यात्रा भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को ऊंचाइयों तक ले जाने की थी। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से फिजिक्स में डिग्री प्राप्त करने के बाद, विक्रम ने 1947 में भारत लौटकर अपने देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखा। उनका दृष्टिकोण था कि भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी जगह बनानी चाहिए, और इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की।

Source:- ISRO
Source:- ISRO

1962 में जब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) की स्थापना की, तो यह कदम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए निर्णायक साबित हुआ। विक्रम की सोच और नेतृत्व में 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की नींव रखी गई, जिससे भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में एक नई दिशा मिली। विक्रम का सपना था कि भारत आत्मनिर्भर बने और अंतरिक्ष अनुसंधान में अपनी पहचान बनाए, और उन्होंने इसके लिए जीवनभर संघर्ष किया। 1975 में भारत ने अपना पहला उपग्रह “आर्यभट्ट” लॉन्च किया, जो सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत थी।

विक्रम साराभाई की कड़ी मेहनत और संकल्प ने भारत को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मानचित्र पर मजबूती से खड़ा किया। उन्हें उनके योगदान के लिए 1966 में पद्मभूषण और 1972 में पद्मविभूषण (मृत्योपरांत) से सम्मानित किया गया। 30 दिसंबर 1971 को विक्रम का निधन हुआ, लेकिन उनका योगदान और उनकी सोच आज भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान में जीवित हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि एक व्यक्ति की संकल्प शक्ति और दूरदृष्टि से राष्ट्र का भविष्य बदल सकता है।

विक्रम साराभाई और मृणालिनी स्वामीनाथन की रोमांटिक प्रेमकहानी

कैंब्रिज से वापस लौटने के बाद विक्रम साराभाई ने बंगलौर के ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस’ में अपनी शोध यात्रा जारी रखी, लेकिन उनके जीवन में एक और अनोखा मोड़ आया। यही वह समय था जब उनकी मुलाकात महान परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा से हुई, जिन्होंने उन्हें भारतीय नृत्यांगना मृणालिनी स्वामीनाथन से मिलवाया। मृणालिनी, जो अपनी कला और नृत्य के प्रति समर्पित थीं, विक्रम के लिए शुरू में कोई खास आकर्षण नहीं बन पाईं। दोनों की पहली मुलाकात किसी रोमांटिक फिल्म की शुरुआत जैसी नहीं थी—मृणालिनी ने टेनिस शॉर्ट्स पहने थे, और विक्रम को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया।

विक्रम साराभाई और मृणालिनी स्वामीनाथन
विक्रम साराभाई और मृणालिनी स्वामीनाथन

 

लेकिन जैसा कि अक्सर होता है, एक साधारण मुलाकात धीरे-धीरे कुछ खास बन जाती है। मृणालिनी ने भरतनाट्यम में अपनी रुचि को बढ़ाया, और विक्रम को उनके साथ समय बिताना अच्छा लगने लगा। दोनों का रिश्ता एक प्यारी सी दोस्ती से आगे बढ़ा, और वे एक-दूसरे के साथ भुट्टे खाते, बांगला गीतों का आनंद लेते, जो मृणालिनी ने शांति निकेतन में सीखे थे। विक्रम उन्हें कालिदास के उद्धरण बताते , और इन छोटी-छोटी बातों ने उनके रिश्ते में गहरी समझ और आत्मीयता पैदा की।

यहां तक कि जब दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया, तो वह एक बेहद साधारण, लेकिन बेहद सुंदर समारोह था। मृणालिनी ने सफेद खद्दर की साड़ी पहनी थी, और उनके शरीर पर गहनों की जगह फूलों की माला सजी थी। विक्रम के अनुरोध पर मृणालिनी और उनकी दोस्त ने रामायण के हिरण वाले दृश्य पर एक भावपूर्ण नृत्य भी किया। शादी के बाद, विक्रम और मृणालिनी ने अपनी यात्रा शुरू की—लेकिन इस बार वे ट्रेन से अहमदाबाद जा रहे थे। यह भारत छोड़ो आंदोलन का समय था, और आंदोलनकारियों द्वारा पटरियों को उखाड़ने के कारण, जो सफर सामान्यतः 18 घंटे में पूरा होता, वह उन्हें 48 घंटे में करना पड़ा। इस अनूठे सफर ने उनके जीवन के पहले हनीमून को ट्रेन के फ़र्स्ट क्लास कूपे में बदल दिया—यह एक यात्रा नहीं, बल्कि एक अनमोल याद बन गई, जो हमेशा उनके दिलों में बसी रही।

विक्रम साराभाई और उनके परिवार की प्रेरणादायक यात्रा

विक्रम साराभाई का परिवार भारतीय समाज और विज्ञान का एक अद्वितीय उदाहरण है। उनके पिता, श्री अम्बालाल साराभाई, जो अहमदाबाद के प्रमुख कपड़ा मिल के मालिक थे, केवल एक उद्योगपति नहीं बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास रखने वाले इंसान थे। उनके रिश्ते महात्मा गांधी और क्रांतिकारी रविंद्रनाथ टैगोर से भी थे। एक बार जब टैगोर अहमदाबाद आए, तो उन्होंने विक्रम साराभाई को देखकर यह भविष्यवाणी की थी, “यह बच्चा एक दिन बहुत बड़े काम करेगा।” यह शब्द सच साबित हुए जब विक्रम ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी कड़ी मेहनत और लगन से भारत को एक नई दिशा दी।

विक्रम के कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान भी टैगोर ने उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें एक ‘रिकमेंडेशन लेटर’ दिया, जो उनके भविष्य के लिए एक प्रेरणा बना। विक्रम ने अपने जीवन में कई ऐसे बदलाव किए जिनसे भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति को अपार लाभ हुआ।

वहीं, विक्रम की बहन मृदुला साराभाई ने भी अपनी अद्वितीय साहसिकता से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया। वह महात्मा गांधी के प्रेरणास्त्रोत से प्रभावित होकर सत्याग्रह और अन्य आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल हुईं। जेल यात्राओं के दौरान उनकी कड़ी परीक्षा हुई, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। मृदुला का जज़्बा देखकर पंडित नेहरू ने उन्हें 1936 में कांग्रेस का महामंत्री नियुक्त किया, जो कांग्रेस के इतिहास में किसी महिला को दिया गया पहला बड़ा पद था।

हालांकि, मृदुला ने महिलाओं के साथ कांग्रेस कार्यसमिति के व्यवहार को लेकर विरोध जताया और अपने विचारों को साझा किया, जिस कारण उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। फिर भी, उनके साहसिक विचार और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान ने उन्हें हमेशा एक प्रेरणास्त्रोत बना दिया।

विक्रम सरभाई का परिवार केवल विज्ञान और राजनीति में ही नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ गया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिवार का समर्थन, एकजुटता और विचारशीलता किसी भी समाज को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

स्रोत: ISRO, Vikram, Vikram Sarabhai, INCOSPAR, विक्रम साराभाई, मृणालिनी स्वामीनाथन, महात्मा गांधी,
Tags: INCOSPARISROVikramVikram Sarabhaiमहात्मा गाँधीमृणालिनी स्वामीनाथनविक्रम साराभाई
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

यमुना की सफाई में 5 साल में ₹6856 करोड़ खर्च फिर भी दोगुना हुआ प्रदूषण, अब बोले केजरीवाल- ‘इससे वोट नहीं मिलते’

अगली पोस्ट

डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देश शोककाल में राहुल गांधी वियतनाम मे, कांग्रेस को मनमोहन विरोधी बता भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप

संबंधित पोस्ट

मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?
अर्थव्यवस्था

मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

20 March 2026

हॉर्मुज क्राइसिस की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं, लेकिन भारत में न सिर्फ कीमतें, बल्कि सप्लाई भी स्थिर...

1000 किमी की ‘बारिश पट्टी’ का कहर: दिल्ली में 3 साल की सबसे ज्यादा बारिश, मार्च बना रिकॉर्ड तोड़ महीना
चर्चित

1000 किमी की ‘बारिश पट्टी’ का कहर: दिल्ली में 3 साल की सबसे ज्यादा बारिश, मार्च बना रिकॉर्ड तोड़ महीना

20 March 2026

भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में इस समय एक असामान्य मौसम सामने आ रहा है, जो तेज बारिश, आंधी-तूफान, तेज हवाएं और यहां...

इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले
चर्चित

इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

20 March 2026

दुनिया के कई हिस्सों में पहले से मौजूद तनाव अब एक खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05

India’s Swadesi ‘Meteor’: World’s Most Lethal BVR Missile | Gandiv| SFDR | DRDO

00:06:48
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited