ठाकुर रोशन सिंह ने असहयोग आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और उन्हें जेल की सज़ा हुई थी...
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

    ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

    vijay diwas

    Vijay Diwas 2025 : 16 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है विजय दिवस, जानें पूरा इतिहास

    जनसंख्या के बदलते संतुलन पर असहज विमर्श प्रस्तुत करती पुस्तक ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’

    जनसंख्या के बदलते संतुलन पर असहज विमर्श प्रस्तुत करती पुस्तक ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’

    प्रधानमंत्री मोदी

    BJP ने व्हिप जारी कर सभी सांसदों को पूरे सप्ताह उपस्थित रहने के दिए निर्देश, क्या लोकसभा में कुछ बड़ा होने वाला है?

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    शिप बेस्ड ISBM लॉन्च के पाकिस्तान के दावे में कितना दम है

    पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

    ऑपरेशन सिंदूर 2:0

    दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

    जैवलिन मिसाइल

    अमेरिका ने भारत को बताया “मेजर डिफेंस पार्टनर”, जैवलिन मिसाइल समेत बड़े डिफेंस पैकेज को दी मंजूरी, पटरी पर लौट रहे हैं रिश्ते ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: असीम मुनीर की सेना हाई अलर्ट पर, एयर डिफेंस सक्रिय, भारत की ताकत और रणनीति ने आतंकियों और पड़ोसी को किया सतर्क

    दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: असीम मुनीर की सेना हाई अलर्ट पर, एयर डिफेंस सक्रिय, भारत की ताकत और रणनीति ने आतंकियों और पड़ोसी को किया सतर्क

    राजनाथ सिंह ने दिखाया आईना, यूनुस को लगी मिर्ची: बांग्लादेश की नई दिशा, भारत की नई नीति

    राजनाथ सिंह ने दिखाया आईना, यूनुस को लगी मिर्ची: बांग्लादेश की नई दिशा, भारत की नई नीति

    आईएनएस सह्याद्री गुआम में: भारत की नौसेना का बहुपक्षीय सामरिक प्रदर्शन, एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता और एशिया-प्रशांत में नेतृत्व

    आईएनएस सह्याद्री गुआम में: भारत की नौसेना का बहुपक्षीय सामरिक प्रदर्शन, एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता और एशिया-प्रशांत में नेतृत्व

    ढाका में पाकिस्तानी सक्रियता: यूनुस सरकार, नौसेना प्रमुख की यात्रा और भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा पर खतरे की समीक्षा

    ढाका में पाकिस्तानी सक्रियता: यूनुस सरकार, नौसेना प्रमुख की यात्रा और भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा पर खतरे की समीक्षा

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    पाकिस्तान, बांग्लादेश, 1971 युद्ध, विजय दिवस

    बाँध कर नदी में खड़ा कराते, बहती थी गोलियों से भूनी हुई लाशें… भारत ने न बचाया होता तो बांग्लादेश कैसे मनाता ‘विजय दिवस’?

    ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

    ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

    vijay diwas

    Vijay Diwas 2025 : 16 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है विजय दिवस, जानें पूरा इतिहास

    हिंदी में पढ़ें वीर सावरकर की कविता ‘सागर प्राण तलमाला’

    हिंदी में पढ़ें वीर सावरकर की कविता ‘सागर प्राण तलमाला’

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    भारत की वैज्ञानिक विजय: ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के उम्मीदों को मिली नई रोशनी, जानें क्यों महत्वपूर्ण है ये दवा

    आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक विजय: ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के उम्मीदों को मिली नई रोशनी, जानें क्यों महत्वपूर्ण है ये दवा

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

    ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

    vijay diwas

    Vijay Diwas 2025 : 16 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है विजय दिवस, जानें पूरा इतिहास

    जनसंख्या के बदलते संतुलन पर असहज विमर्श प्रस्तुत करती पुस्तक ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’

    जनसंख्या के बदलते संतुलन पर असहज विमर्श प्रस्तुत करती पुस्तक ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’

    प्रधानमंत्री मोदी

    BJP ने व्हिप जारी कर सभी सांसदों को पूरे सप्ताह उपस्थित रहने के दिए निर्देश, क्या लोकसभा में कुछ बड़ा होने वाला है?

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    शिप बेस्ड ISBM लॉन्च के पाकिस्तान के दावे में कितना दम है

    पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

    ऑपरेशन सिंदूर 2:0

    दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

    जैवलिन मिसाइल

    अमेरिका ने भारत को बताया “मेजर डिफेंस पार्टनर”, जैवलिन मिसाइल समेत बड़े डिफेंस पैकेज को दी मंजूरी, पटरी पर लौट रहे हैं रिश्ते ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: असीम मुनीर की सेना हाई अलर्ट पर, एयर डिफेंस सक्रिय, भारत की ताकत और रणनीति ने आतंकियों और पड़ोसी को किया सतर्क

    दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: असीम मुनीर की सेना हाई अलर्ट पर, एयर डिफेंस सक्रिय, भारत की ताकत और रणनीति ने आतंकियों और पड़ोसी को किया सतर्क

    राजनाथ सिंह ने दिखाया आईना, यूनुस को लगी मिर्ची: बांग्लादेश की नई दिशा, भारत की नई नीति

    राजनाथ सिंह ने दिखाया आईना, यूनुस को लगी मिर्ची: बांग्लादेश की नई दिशा, भारत की नई नीति

    आईएनएस सह्याद्री गुआम में: भारत की नौसेना का बहुपक्षीय सामरिक प्रदर्शन, एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता और एशिया-प्रशांत में नेतृत्व

    आईएनएस सह्याद्री गुआम में: भारत की नौसेना का बहुपक्षीय सामरिक प्रदर्शन, एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता और एशिया-प्रशांत में नेतृत्व

    ढाका में पाकिस्तानी सक्रियता: यूनुस सरकार, नौसेना प्रमुख की यात्रा और भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा पर खतरे की समीक्षा

    ढाका में पाकिस्तानी सक्रियता: यूनुस सरकार, नौसेना प्रमुख की यात्रा और भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा पर खतरे की समीक्षा

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    पाकिस्तान, बांग्लादेश, 1971 युद्ध, विजय दिवस

    बाँध कर नदी में खड़ा कराते, बहती थी गोलियों से भूनी हुई लाशें… भारत ने न बचाया होता तो बांग्लादेश कैसे मनाता ‘विजय दिवस’?

    ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

    ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

    vijay diwas

    Vijay Diwas 2025 : 16 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है विजय दिवस, जानें पूरा इतिहास

    हिंदी में पढ़ें वीर सावरकर की कविता ‘सागर प्राण तलमाला’

    हिंदी में पढ़ें वीर सावरकर की कविता ‘सागर प्राण तलमाला’

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    भारत की वैज्ञानिक विजय: ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के उम्मीदों को मिली नई रोशनी, जानें क्यों महत्वपूर्ण है ये दवा

    आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक विजय: ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के उम्मीदों को मिली नई रोशनी, जानें क्यों महत्वपूर्ण है ये दवा

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

‘रंज न करें, मेरी मौत खुशी की वजह होगी’ लिखा और ॐ कहकर फांसी के फंदे को चूम लिया; कहानी क्रांतिकारी रोशन सिंह की

ठाकुर रोशन सिंह ने असहयोग आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और उन्हें जेल की सज़ा हुई थी

Shiv Chaudhary द्वारा Shiv Chaudhary
22 January 2025
in इतिहास
22 जनवरी को 1892 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के नवादा गांव में जन्मे थे रोशन सिंह

22 जनवरी को 1892 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के नवादा गांव में जन्मे थे रोशन सिंह

Share on FacebookShare on X

19 दिसंबर 1927 का दिन था इलाहाबाद जेल में बंद एक स्वतंत्रता सेनानी रोज की तरह सुबह उठकर गीता का पाठ करने के बाद कसरत कर रहा था। इतन में ही एक संतरी उधर से गुज़रा तो उसने क्रांतिकारी से पूछा, “आपको तो थोड़ी देर में फांसी दी जाएगी, आप कसरत क्यों कर रहे हैं?” इस पर क्रांतिकारी ने हल्की मुस्कुराहट के साथ कहा, “जिस वक्त के लिए जो काम तय हो उसे ज़रूर करना चाहिए। जब फांसी का वक्त आएगा उसे भी कर लेंगे, अभी तो कसरत का वक्त है।” फांसी की बात सुनकर अच्छे-अच्छे लोगों के मन में जहां भय आ जाता था, वहीं उस क्रांतिकारी की यह बेपरवाही देखकर वह संतरी भी सकते में पड़ गया था। फांसी से कुछ देर पहले मुस्कुरा रहे यह क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह थे।

माता-पिता ने बोए क्रांति के बीज

रोशन सिंह का जन्म 22 जनवरी को 1892 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के नवादा गांव में हुआ था। बचपन से ही उनके माता-पिता कौशल्या देवी और जंगी सिंह ने रोशन के मन में राष्ट्रवाद का बीज बो दिया था। प्रबल राष्ट्रवादी रोशन बचपन से ही तलवारबाज़ी, लाठी चलाने और बंदूक से निशाना लगाने में प्रवीण थे। व्यायाम करने से उनके बेहद प्यार था और वे कुश्ती भी किया करते थे। हिंदी, उर्दू के अच्छे जानकार रोशन सिंह ने जेल में जाकर बांग्ला और अंग्रेज़ी भी सीख ली थी।

संबंधितपोस्ट

उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठन बदलाव की तैयारी शुरू- 14 दिसंबर को होगा नए प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान

वाराणसी के मंदिर में हनुमान चालीसा बजने पर कट्टरपंथी मुस्लिम ने लगाई रोक कहा- “मेरे कानों तक आवाज ना आए”: क्यों बार-बार हिंदुओं की पूजा-पाठ और आस्था पर हमले होते हैं?

बरेली हिंसा मामले में बड़ी कार्रवाई, दो आरोपियों को एनकाउंटर के बाद किया गिरफ्तार

और लोड करें

असहयोग आंदोलन और जेल की सज़ा

1920-21 में जब महात्मा गांधी ने अंग्रेज़ों के खिलाफ असहयोग आंदोलन का एलान किया था तो देश भर में लोग उसमें कूद पड़े थे। देश में अलग-अलग जगहों पर अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे थे और ठाकुर रोशन सिंह के नेतृत्व में शहाजहांपुर से बरेली भी एक दल प्रदर्शन करने पहुंचा गया था। बरेली में उन्हें कुतुबखाने पहुंचना था और पुलिस ने उस इलाके में धारा 144 लगा दी थी। सिर पर लाल साफा बांधे पुलिसकर्मी लाठी लिए वहां पहरा दे रहे थे। ठाकुर रोशन के नेतृत्व में लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाईं और रोशन सिंह समेत अन्य प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस मामले में जहां उनके साथियों को 6 महीने की सज़ा हुई वहीं रोशन सिंह को दो वर्ष तक जेल में भेज दिया गया था। जेल में रोशन सिंह के साथ बहुत अमानवीय व्यवहार किया गया था। करीब 1 वर्ष तक उन्होंने वहां चक्की पीसी और जेलर ने भी वहां बहुत कठोर व्यवहार किया था। इस व्यवहार के बाद से वे इतने नाराज़ हो गए कि उन्होंने अपने साथ हुई इस क्रूरता का बदला लेने की कसम खाई थी।

जब रोशन सिंह ने डाली डकैती

जेल से रिहा होने के बाद क्रांतिकारी रोशन सिंह की मुलाकात पंडित राम प्रसाद बिस्मिल से हुई और वे 1924 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचएसआरए) से जुड़ गए। एचएसआरए में उस दौरान बिस्मिल, अशफाकउल्लाह खान, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जैसे कई अन्य क्रांतिकारी शामिल थे। क्रांतिकारियों को अंग्रेज़ों से लड़ाई के लिए हथियारों की ज़रूरत थी तो उन्होंने अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर एक डकैती की योजना बनाई थी।

उन्होंने पीलीभीत के बमरौली में एक सूदखोर व्यापारी के यहां डाका डाल दिया और उन्हें करीब 4,000 रुपए और सोना-चांदी मिला था। इस डकैती के दौरान उन्होंने एक पहलवान की गोली मारकर हत्या कर दी थी जिससे वे अंग्रेज़ों की नज़र में आ गए थे। हालांकि, इस कांड में पुलिस उन्हें पकड़ नहीं सकी थी।

काकोरी रेल एक्शन में फांसी की सज़ा

डकैती के बाद रोशन सिंह अंग्रेज़ों की नज़र में आ गए थे और उन्हें पकड़ने के प्रयास किए जा रहे थे। उसी समय काकोरी रेल एक्शन हुआ और रोशन सिंह को इस मामले में पकड़ लिया गया था। बताया जाता है कि रोशन सिंह एक अन्य क्रांतिकारी केशव चक्रवर्ती की तरह दिखते थे। केशव चक्रवर्ती काकोरी रेल एक्शन में शामिल थे जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

कहते हैं कि अंग्रेज़ों ने बमरौली कांड का बदला लेने के लिए उन्हें फांसी की सज़ा दिलाने पर पूरा ज़ोर लगा दिया था। रोशन सिंह ने न्यायाधीश को समझाने की कोशिश भी लेकिन उनके सभी तर्कों को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद रोशन सिंह को रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्लाह खान और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के साथ मौत की सज़ा सुना दी गई।

‘मेरी मौत खुशी की वजह होगी’

रोशन सिंह को 19 दिसंबर 1927 को फांसी होनी थी लेकिन इससे पहले 13 दिसंबर को उन्होंने अपने पौत्र जगदीश सिंह को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में रोशन सिंह ने लिखा था, “इस सप्ताह के भीतर ही फांसी होगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह आपको मुहब्बत का बदला दे। आप मेरे लिए हरगिज न दुख करें। मेरी मौत खुशी की वजह होगी। दुनिया मे पैदा होकर मरना ज़रूर है। दुनिया मे वदफैल (गलत काम) करके मनुष्य अपने को बदनाम न करे और मरते वक्त ईश्वर की याद रहे, यही दो बाते होनी चाहिए और ईश्वर की कृपा से मेरे साथ ये दोनो बाते है। इसलिए मेरी मौत किसी प्रकार अफसोस के लायक नहीं है।”

वे आगे लिखते हैं, “दो साल से मैं बाल-बच्चों से अलग हूँ। इस बीच ईश्वर-भजन का खूब मौका मिला। इससे मेरा मोह छूट गया और कोई वासना बाकी नहीं रही। मेरा पूरा विश्वास है कि दुनिया की कष्टमयी यात्रा समाप्त करके, मैं अब आराम की ज़िंदगी के लिए जा रहा हूँ। हमारे शास्त्रों मे लिखा है कि जो आदमी धर्म-युद्ध मे प्राण देता है उस की वही गति होती है जो जंगल मे रहकर तपस्या करने वालो की। जिंदगी ज़िंदा दिली को जान ऐ रोशन, वरना कितने मरते और पैदा होते रहते है।”

‘ॐ’ कहकर फांसी के फंदे को चूमा

चारों क्रांतिकारी तय तारीख से पहले जेल से गायब ना हो जाएं इससे ब्रिटिश सरकार डरी हुई थी और राजेंद्र लाहिड़ी को 17 दिसंबर को ही फांसी दे दी गई थी। वहीं, बिस्मिल, अशफाक और रोशन सिंह को 19 दिसंबर को फांसी दी गई। जब रोशन को फांसी के लिए ले जाने को अफसर आए तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट तैर रही थी। भारत माता का यह वीर सपूत हाथ में गीता लेकर चल दिया तेज़ आवाज़ में वंदेमातरम् का उद्घोष करता रहा। रोशन ने तीन बार ‘ॐ’ कहकर फांसी के फंदे को चूम लिया सदा के लिए ईश्वर में लीन हो गए।

स्रोत: उत्तर प्रदेश, शाहजहांपुर, इलाहाबाद, काकोरी एक्शन, रोशन सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्लाह खान, राजेंद्र लाहिड़ी, Uttar Pradesh, Shahjahanpur, Allahabad, Kakori Action, Roshan Singh, Ramprasad Bismil, Ashfaqullah Khan, Rajendra Lahiri,
Tags: AllahabadAshfaqullah KhanKakori ActionRajendra LahiriRamprasad BismilRoshan SinghShahjahanpurUttar Pradeshअशफाकउल्लाह खानइलाहाबादउत्तर प्रदेशकाकोरी एक्शनराजेंद्र लाहिड़ीरामप्रसाद बिस्मिलरोशन सिंहशाहजहांपुर
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

अर्जेंटीना के मिलेई का आर्थिक मॉडल; मस्क के ‘DOGE’ प्रोग्राम और ट्रम्प की आर्थिक क्रांति का ब्लूप्रिंट?

अगली पोस्ट

गीता में कृष्ण-अर्जुन नहीं, युधिष्ठिर-द्रौपदी संवाद… रामायण के बाद अब केजरीवाल का गीता-ज्ञान

संबंधित पोस्ट

पाकिस्तान, बांग्लादेश, 1971 युद्ध, विजय दिवस
इतिहास

बाँध कर नदी में खड़ा कराते, बहती थी गोलियों से भूनी हुई लाशें… भारत ने न बचाया होता तो बांग्लादेश कैसे मनाता ‘विजय दिवस’?

16 December 2025

16 दिसंबर, यानी 'विजय दिवस' - वो दिन, जब भारत ने पूर्वी पाकिस्तान, यानी बांग्लादेश को पाकिस्तान से आज़ाद करवाया। पाकिस्तानी फ़ौज की क्रूरता से...

ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया
इतिहास

ढाका में आत्मसमर्पण: 1971 की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया

16 December 2025

16 दिसंबर 1971 को ढाका में भारतीय और बांग्लादेशी सैन्य कमांडरों की मौजूदगी में एक शांत लेकिन ऐतिहासिक दृश्य सामने आया, जब पाकिस्तान की ईस्टर्न...

vijay diwas
इतिहास

Vijay Diwas 2025 : 16 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है विजय दिवस, जानें पूरा इतिहास

16 December 2025

16 दिसंबर 2025 को भारत में विजय दिवस (Vijay Diwas) के रूप में मनाया जाता है. 1971 में इसी दिन भारत ने पाकिस्तान सेना से...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58

A War Won From Above: The Air Campaign That Changed South Asia Forever

00:07:37

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

00:06:59

Dhurandar: When a Film’s Reality Shakes the Left’s Comfortable Myths

00:06:56

Tejas Under Fire — The Truth Behind the Crash, the Propaganda, and the Facts

00:07:45
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2025 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2025 TFI Media Private Limited