उत्तराखंड सरकार ने सोमवार (27 जनवरी) को राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी है। 2024 में 6 फरवरी को धामी सरकार ने एक विशेष विधानसभा सत्र में UCC विधेयक पेश किया था जिसे उसके अगले ही दिन यानी 7 फरवरी को भारी बहुमत के साथ पारित कर दिया गया था। 2024 में ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 13 मार्च को इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का दर्जा दिया था। देश में कई राज्य यह कानून अपनाने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।
UCC लागू होने के बाद राज्य में शादी, उत्तराधिकार, तलाक और लिव-इन जैस मामलों के लिए एक कानून बन जाएगा और इसके बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कानून प्रभावी नहीं रहेंगे। UCC का क्रियान्वयन समाज में समानता, न्याय और एकता को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस प्रयास है और अब उत्तराखंड में ‘इद्दत’ और ‘हलाला’ जैसी कुप्रथाएं बंद हो जाएंगी।
इस्लाम में किसी महिला के पति की मृत्यु हो जाने पर या उसके तलाक दिए जाने के बाद कुछ समय तक महिला के दूसरी शादी करने पर पाबंदी लगा दी जाती है। किसी महिला के पति के मृत्यु हो जाने पर यह अवधि 4 महीने और 10 दिन की होती है। यदि वह अपने पति की मृत्यु के 4 महीने और 10 दिन से पहले बच्चे को जन्म देती है तो भी उसे 4 महीने और 10 दिन तक की प्रतीक्षा अवधि का पालन करना होता है।
इस दौरान महिला ना महरम मर्दों से पर्दा भी रखती है। ना महरम वे होते हैं जिससे इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, महिलाओं की शादी नहीं हो सकती है। इसके पीछे सामान्य तौर पर वजह महिला के प्रेगनेंसी को लेकर किसी तरह के संदेह को दूर करना और महिला को पति की मृत्यु के बाद संभलने के लिए वक्त देना होता है। इस अवधि के महिला के मेकअप करने पर पाबंदी होती है और उन्हें सादे लिबास में रहना होता है।
क्या है ‘हलाला’?
इस्लामिक शरिया के मुताबिक, मुस्लिम महिला अपने पति को तलाक देने के बाद वो उसी शख्स से तब तक शादी नहीं कर सकती जब तक कि वह किसी और शख्स से शादी कर उसे तलाक ना दे दे। महिला की इस शादी को ही ‘निकाह हलाला’ कहा जाता है। इसके बेहद तर्क दिया जाता है कि औरत के दूसरे मर्द से शादी करने और संबंध बनाने से उसके पहले पति को दुख पहुंचता है और अपनी गलती का एहसास होता है। कुछ जगहों पर इसे बेहद गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। लोग ‘निकाह हलाला’ को व्यावसायिक रूप से कराने लगे हैं जिसे इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ भी माना जाता रहा है। यह प्रथा कई बार महिलाओं के लिए मानसिक, सामाजिक, और भावनात्मक समस्याओं का कारण बनती है और लंबे समय से इसे बंद करने की मांग की जा रही थी।
उत्तराखंड ने देश में समानता और न्याय की एक नई मिसाल पेश करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह कदम समाज में एकरूपता लाने और सभी नागरिकों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।